जहानाबाद में विभिन्न छात्र संगठनों ने यूजीसी रेगुलेशन और सामाजिक न्याय के समर्थन में मशाल जुलूस निकाला। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से यूजीसी रेगुलेशन को जल्द लागू करने की मांग की। यह मशाल जुलूस शहर के अंबेडकर चौक से शुरू होकर हॉस्पिटल मोड़ और अरवल मोड़ तक पहुंचा। इस दौरान छात्रों ने सामाजिक न्याय के समर्थन में नारे लगाए और यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग की। छात्र नेताओं ने कहा कि यह रेगुलेशन सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और सामाजिक न्याय के लिए नए यूजीसी रेगुलेशन लाने की पहल की थी। हालांकि, कुछ संगठनों के विरोध के बाद मामला अदालत में पहुंच गया है और फिलहाल इस पर अस्थायी रोक लगी हुई है। छात्रसंघ अध्यक्ष शैलेश कुमार यादव ने कहा कि सरकार को किसी दबाव में आकर इस नियम को नहीं रोकना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस रेगुलेशन के लागू होने से ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के छात्रों को काफी लाभ मिलेगा। छात्र नेता राहुल प्रजापति ने बताया कि आज भी कई विश्वविद्यालयों और बड़े शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव देखा जाता है। जहानाबाद में विभिन्न छात्र संगठनों ने यूजीसी रेगुलेशन और सामाजिक न्याय के समर्थन में मशाल जुलूस निकाला। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से यूजीसी रेगुलेशन को जल्द लागू करने की मांग की। यह मशाल जुलूस शहर के अंबेडकर चौक से शुरू होकर हॉस्पिटल मोड़ और अरवल मोड़ तक पहुंचा। इस दौरान छात्रों ने सामाजिक न्याय के समर्थन में नारे लगाए और यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग की। छात्र नेताओं ने कहा कि यह रेगुलेशन सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और सामाजिक न्याय के लिए नए यूजीसी रेगुलेशन लाने की पहल की थी। हालांकि, कुछ संगठनों के विरोध के बाद मामला अदालत में पहुंच गया है और फिलहाल इस पर अस्थायी रोक लगी हुई है। छात्रसंघ अध्यक्ष शैलेश कुमार यादव ने कहा कि सरकार को किसी दबाव में आकर इस नियम को नहीं रोकना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस रेगुलेशन के लागू होने से ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के छात्रों को काफी लाभ मिलेगा। छात्र नेता राहुल प्रजापति ने बताया कि आज भी कई विश्वविद्यालयों और बड़े शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव देखा जाता है।


