सुल्तानपुर जिले में आज शब-ए-बारात का पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मुस्लिम बहुल इलाकों में विशेष तैयारियां की गई हैं। मस्जिदों और कब्रिस्तानों की साफ-सफाई कर उन्हें सजाया गया है। घरों में भी महिलाएं पकवान बनाने की तैयारी में हैं। इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं रात को शब-ए-बारात मनाई जाती है, जिसे एक पवित्र रात माना जाता है। इस रात मुसलमान इबादत करते हैं। सुल्तानपुर के गभड़िया स्थित तकिया, घासीगंज कर्बला स्थित शिया कब्रिस्तान, ईदगाह कब्रिस्तान और पांचोपीरन जैसे विभिन्न कब्रिस्तानों में विशेष तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु आज अपने पूर्वजों की कब्रों पर मोमबत्तियां जलाकर फातिहा पढ़ेंगे। शहर की प्रमुख मस्जिदों और दरगाहों को भी सजाया गया है। यहां रात भर नमाज, कुरान की तिलावत और दुआओं का सिलसिला जारी रहेगा। पांचोपीरन दरगाह और नकराही में बड़ी संख्या में जायरीनों के उमड़ने की उम्मीद है।
एक विशेष परंपरा के अनुसार, शिया समुदाय के श्रद्धालु सुबह की नमाज के बाद शहर के गोमती पुल पर एकत्रित होते हैं। वे अपनी मन्नतें और दुआएं लिखे ‘अरीजे’ (प्रार्थना पत्र) गोमती नदी में प्रवाहित करते हैं। घरों में हलवा और अन्य पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें गरीबों, जरूरतमंदों और रिश्तेदारों में बांटा जाता है। प्रशासन ने संवेदनशील कब्रिस्तानों के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके, इसके लिए शांति समिति की बैठकें भी आयोजित की गई हैं। शब-ए-बारात का पर्व इबादत, गुनाहों की माफी और पूर्वजों को याद करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।


