‘SIR’ के आंकड़ों में उलझीं टीना डाबी:विधायकजी ने ‘लेटर’ फाड़ मुंह पर फेंका; SDM ने दे दिया ‘अल्टीमेटम’

‘SIR’ के आंकड़ों में उलझीं टीना डाबी:विधायकजी ने ‘लेटर’ फाड़ मुंह पर फेंका; SDM ने दे दिया ‘अल्टीमेटम’

नमस्कार SIR वाली मतदाता सूचि हो या फिर मनरेगा का बदला हुआ नाम ‘वीबी-जीरामजी’, अफसरों को परीक्षा देनी पड़ रही है। जोधपुर में विधायकजी ने कलेक्ट्रेट में साहब के मुंह पर पर्चा फाड़कर फेंक दिया और बाड़मेर में सांसद, पूर्व मंत्री और विधायक ने कलेक्टर साहिबा से न्याय की मांग कर दी। लेकिन शाहपुरा (जयपुर) के SDM ने हवा का रुख भांपकर जनता के सुर में सुर मिला दिया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. पर्चा फाड़ साहब के मुंह पर फेंका साहब लोगों की जान हलक में अटकी हुई है। सरकार कोई फैसला लेती है और विपक्ष आंदोलन पर उतारू हो जाता है। राजनीति का काम भी यही है। निकाय चुनाव सिर पर हैं इसलिए खूब जोर लगाया जा रहा है। सरकार का आधा कार्यकाल बीत चुका है इसलिए विपक्ष के नेता एक्टिव। छोटे नेता बड़े बनना चाहते हैं और बड़े अपना बड़प्पन बनाए रखना चाहते हैं। इसी रस्साकशी में मुद्दे भी निकल रहे हैं। ताजा मुद्दा है मनरेगा का नाम ‘वीबी-जीरामजी’ करना। विपक्ष का आरोप है कि गांधी जी का नाम मिटाया जा रहा है। सत्ता पक्ष के नेता कह रहे हैं कि ‘उन्हें’ राम के नाम से एलर्जी है। इसी खींचतान में युवा कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ यात्रा निकाल दी। युवा कांग्रेस का जिम्मा अभिमन्यु पूनिया संभाल रहे हैं। संगरिया (हनुमानगढ़) से विधायक भी हैं। यात्रा जोधपुर पहुंची। युवा कांग्रेस ने पर्चा तैयार किया था। जिस पर लिखा था कि योजना का नाम बदलकर वही पुराना वाला करो। सारे नियम भी वही रखो। तैयार पर्चा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। आरोप लगाया कि काफी इंतजार के बाद भी पर्चा लेने अधिकारी बाहर नहीं निकले। विरोध प्रदर्शन हुआ तो अफसर साहब चैंबर से बाहर निकले। निकलते ही अभिमन्यु पूनिया ने पर्चा फाड़ा और अधिकारी के मुंह पर दे मारा। बोले- ज्ञापन लेने में भी दिक्कत आ रही है? 2. टीना डाबी से सांसद-पूर्व मंत्री ने की शिकायत SIR का काम अधिकारियों के लिए सिर-दर्द बना हुआ है। सारा काम-धाम छोड़कर इसी में उलझे हुए हैं कि किसका नाम कट गया, किसका रह गया। बाड़मेर में नाम कटने की सूचि लेकर सांसद उम्मेदाराम और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी कलेक्टर साहिबा से मिलने पहुंच गए। सांसद और विधायक जी की एक मीटिंग में ‘समोसा खाने आते हो क्या’ ब्रह्मवाक्य पहले ही किरकिरी करा चुका था। ऐसे में कलेक्टर साहिबा सतर्क। चुपचाप महोदयों के उलाहने सुनती रहीं। सांसद महोदय ने शिकायत की- कौन चढ़ा रहा है ये गलत डॉक्यूमेंट? जहां माइनरिटी और एससी के लोग ज्यादा हैं वहीं टारगेट करके आपत्ति वाले फॉर्म दे दिए। किसी बूथ पर 50, किसी पर 25, किसी पर डेढ़ सौ और कहीं ढाई सौ। बल्क में इतने डॉक्यूमेंट कंप्यूटर से तैयार किए हैं क्या? किसी का एड्रेस ही गंगानगर लिख दिया है। कंप्यूटर से तैयार करके कौन ला रहा है इतने डॉक्यूमेंट? किसकी साजिश है? ये नॉर्मल नहीं, बड़ा मार्जन है। चौहटन में तो 25 हजार आपत्ति फॉर्म आ गए। कलेक्टर मैडम आंखें मलने लगीं। फिर धीरे से बोलीं- जी। माननीयों के सामने एक उत्साहित कार्यकर्ता ने बात आगे बढ़ाई- एक BLA (बूथ लेवल एजेंट) के तो पिताजी का नाम कट गया। बोलो, खुद के पिताजी का। 3. एसडीएम ने NHAI वालों को सुनाई खरी-खरी जयपुर के शाहपुरा में NHAI के काम ने ‘100 दिन चले अढ़ाई कोस’ कहावत को भी फेल कर दिया है। यहां तिराहा बनना है, बाइपास बनना है और पुलिया बननी है। काम शुरू होने के दिन जो बच्चे पैदा हुए थे वे 16 साल के तरुण हो चुके हैं। लेकिन काम है कि पूरा होने का नाम नहीं लेता। व्यापारियों की दुकानें बरसों से बंद पड़ी हैं। धूल के कारण कस्बे का जीना मुहाल। पानी सिर से ऊपर गुजर गया। लोगों में आक्रोश उबला और फूट पड़ा। NHAI के खिलाफ धरना शुरू हो गया। लोगों में इतना गुस्सा कि बोले NHAI के अधिकारियों को दफ्तरों से निकाल कर दौड़ा-दौड़ाकर पीटेंगे। आखिर धरने में 2 अधिकारी आए। उन्होंने बॉर्डर फिल्म के मशहूर डायलॉग- ‘सुबह का नाश्ता जैसलमेर में करेंगे’ की तर्ज पर आश्वासन दिया। बोले- फलां तारीख को तिराहे का काम पूरा हो जाएगा। फलां तारीख को बाइपास डन। फलां तारीख को पुलिया कंपलीट। ऐसी बातों ने शाहपुरा वासियों को ‘तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख’ डायलॉग भी याद दिला दिया। वे हल्ला मचाने लगे। मौके पर मौजूद SDM साहब ने माइक संभाला और सीधी चेतावनी दी- भैया अपने बड़े अफसरों से बात करके तारीख बताओ। कल को आक्रोश बढ़ा तो लोग आपका टोल रोक देंगे। लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ा तो आप दोनों की जिम्मेदारी होगी। इस पर खूब तालियां बजीं। कस्बे के दशा बताते हुए एक नागरिक ने आपबीती सुनाई- मैं जयपुर से निकला। शाहपुरा में सोचा पुलिया तैयार हो चुकी होगी। मैं दुपहिया लेकर पुलिया पर चढ गया। कुछ दूर तो काली-काली सड़क दिखी, लेकिन आगे जाकर देखा तो पूरा जैसलमेर पड़ा था। 4. चलते-चलते.. बीकानेर के धरनीधर में ऊंट उत्सव हुआ। कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इनमें खूब सज-धज कर आई युवती आकर्षण का केंद्र रही। उसने मायड़ भाषा को लेकर मनुहार की। कहा- कौन हैं हम ध्यान रखना, मायड़ भाषा का मान रखना, रहना कहीं भी संसार में लेकिन दिल में राजस्थान रखना। बहन की बात खरा सोना। लेकिन जो राजस्थानी ज्वेलरी पहनी है, क्या उसकी जानकारी है? या फिर मामला लुंबाराम जी जैसा है? युवती ने बताना शुरू किया- मैंने नाक में नथ, सिर पर बोर लड़ और शीर्ष फूल, गले में आड़ और पंच लड़, कलाइयों में हथफूल, कुणची, चूड़ा, बाजूबंद और कानों में झूमर पहने हैं। वाह बहना वाह। आप इस परीक्षा में पास हुईं। (इनपुट सहयोग- अरविंद सिंह (जोधपुर), विजय कुमार (बाड़मेर), अनुराग हर्ष (बीकानेर)।) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

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