जमुई जिले के बरहट प्रखंड के गुगुलडीह गांव निवासी शुभम कुमार तांती ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में आठवां स्थान प्राप्त किया है। एक सामान्य परिवार से आने वाले शुभम ने इस उपलब्धि से अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वह आगे चलकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश लेना चाहते हैं। शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन आठ से नौ घंटे पढ़ाई करते थे और स्वयं अध्ययन पर भी ध्यान केंद्रित करते थे। शुभम को इस बात का मलाल है कि वह कुछ अंकों से टॉपर बनने से चूक गए, जिसका कारण हिंदी में थोड़े कम अंक आना रहा। उन्हें भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषय पसंद हैं, जो IIT की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण हैं। पिता टाइल्स मिस्त्री, आठवीं तक की पढ़ाई की
शुभम के पिता, रंजय तांती, एक टाइल्स मिस्त्री हैं और उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उनकी मां, ललिता देवी, बीड़ी बनाने का काम करती हैं। माता-पिता दोनों दिन-रात मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य होने और मां के कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद, उन्होंने शुभम के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शुभम ने गांव के उत्क्रमित प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुगुलडीह से अपनी पढ़ाई की है। उनकी यह सफलता दर्शाती है कि अच्छे परिणाम के लिए महंगे स्कूलों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और लगन की आवश्यकता होती है। माता-पिता के त्याग और संघर्ष की भी बड़ी भूमिका
शुभम अपनी पढ़ाई के प्रति पूरी तरह समर्पित थे और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहते थे। उनकी इस उपलब्धि में न केवल उनकी मेहनत, बल्कि माता-पिता के त्याग और संघर्ष की भी बड़ी भूमिका है। शुभम के बिहार में आठवां स्थान प्राप्त करने की खबर से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। उनकी कहानी उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह सफलता साबित करती है कि सच्ची लगन और मेहनत से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। जमुई जिले के बरहट प्रखंड के गुगुलडीह गांव निवासी शुभम कुमार तांती ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में आठवां स्थान प्राप्त किया है। एक सामान्य परिवार से आने वाले शुभम ने इस उपलब्धि से अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वह आगे चलकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश लेना चाहते हैं। शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन आठ से नौ घंटे पढ़ाई करते थे और स्वयं अध्ययन पर भी ध्यान केंद्रित करते थे। शुभम को इस बात का मलाल है कि वह कुछ अंकों से टॉपर बनने से चूक गए, जिसका कारण हिंदी में थोड़े कम अंक आना रहा। उन्हें भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषय पसंद हैं, जो IIT की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण हैं। पिता टाइल्स मिस्त्री, आठवीं तक की पढ़ाई की
शुभम के पिता, रंजय तांती, एक टाइल्स मिस्त्री हैं और उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उनकी मां, ललिता देवी, बीड़ी बनाने का काम करती हैं। माता-पिता दोनों दिन-रात मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य होने और मां के कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद, उन्होंने शुभम के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शुभम ने गांव के उत्क्रमित प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुगुलडीह से अपनी पढ़ाई की है। उनकी यह सफलता दर्शाती है कि अच्छे परिणाम के लिए महंगे स्कूलों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और लगन की आवश्यकता होती है। माता-पिता के त्याग और संघर्ष की भी बड़ी भूमिका
शुभम अपनी पढ़ाई के प्रति पूरी तरह समर्पित थे और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहते थे। उनकी इस उपलब्धि में न केवल उनकी मेहनत, बल्कि माता-पिता के त्याग और संघर्ष की भी बड़ी भूमिका है। शुभम के बिहार में आठवां स्थान प्राप्त करने की खबर से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। उनकी कहानी उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह सफलता साबित करती है कि सच्ची लगन और मेहनत से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।


