मुजफ्फरनगर के वकील हत्याकांड में तीन को फांसी की सजा, लाखों रुपये जुर्माना भी

मुजफ्फरनगर के वकील हत्याकांड में तीन को फांसी की सजा, लाखों रुपये जुर्माना भी

Court Order : मुजफ्फरनगर में हुए वकील समीर सैफी के चर्चित हत्याकांड में अदालत का ऐतिहासिक फैसला आया है। चार आरोपियों में तीन को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है और चौथे को सहयोगी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई है। इतना ही नहीं अदालत ने इन पर 14 लाख से अधिक का अर्थ दंड भी लगाया है।

रविकुमार दिवाकर की अदालत से सुनाई सजा

फास्ट ट्रैक कोर्ट रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने यह निर्णय दिया है। छह साल बाद आए इस निर्णय का समीर सैफी के परिजनों और वकीलों ने स्वागत किया है। यह अलग बात है कि निर्णय आने के बाद एक बार फिर से यह चर्चित हत्याकांड लोगों के जहन में ताजा हो गया और समीर सैफी के परिवार वालों की आंखे फिर से नम हो गई लेकिन जिस तरह से छह साल पहले यह हत्याकांड सुर्खियों में छाया था ठीक उसी प्रकार अदालत का फैसला भी अब सुर्खियों में है।

वर्ष 2019 में हुई वारदात के बारे में बताते मुजफ्फरनगर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव वर्मा

40 लाख के लेनदेन में हुई थी हत्या

समीर सैफी हत्याकांड में जो चार्जशीट पुलिस की ओर से दाखिल की गई उसके मुताबिक समीर की हत्या 40 लाख रुपये के लेनदेन के मामले में हुई थी। समीर का अपने साझीदारों के साथ विवाद हुआ था। समीर का साझेदारी में पोल्ट्री फार्म था। इसी फार्म के पैसों के लेकर यह विवाद हुआ था। जिस दिन यह हत्या हुई उसी दिन समीर सैनी ने कचहरी में अपने चेंबर का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के बाद 15 अक्टूबर को ही समीर संदिग्ध हालातों में लापता हो गए थे। 19 अक्टूबर यानी चार दिन बाद समीर का शव भोपा क्षेत्र से मिला था।

पिता ने दी थी तहरीर

शव मिलने के बाद समीर सैफी के पिता अजहर ने इस मामले में समीर के साझीदारों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि समीर अपने साझीदारों से अपने 40 लाख रुपये मांग रहा था। साझीदारों ने पैसा देने से इंकार कर दिया और समीर की हत्या की साजिश रच दी। साझीदार शाम के समय वकील को उसी फार्म पर ले गए और रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या करने के बाद शव को मिट्टी में दफन कर दिया। एक दो दिन तक समीर का कोई पता नहीं चला और आरोपियों को भी लगा कि यह मामला दब जाएगा।

तहरीर के आधार पर हुई गिरफ्तारी

पुलिस ने इस मामले में तहरीर के आधार पर बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, इसके साथी सिंगोल अल्वी और शालू उर्फ अरबाज के साथ-साथ भोपा के ही रहने वाले दिनेश को गिरफ्तार कर लिया। इनकी निशानदेही पर शव बरामद कर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। न्यायालय ने पूरे ट्रायल के बाद सिंगोल अल्वी, सोनू और शालू को अपहरण और हत्या के लिए दोषी माना और दिनेश को सबूत मिटाने में शामिल माना। इस तरह इन तीनों को मृत्युदंड और दिनेश को सात साल कैद की सजा सुनाते हुए मुख्य आरोपी पर दस लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। इस पूरे हत्याकांड में सिंगोल अल्वी मुख्य हत्यारोपी है। सिंगोल अल्वी की कार से समीर का अपहरण किया गया था। सोनू उर्फ रिजवान इस कार का ड्राइवर था इनके अलावा शालू उर्फ अरबाज और दिनेश उसके नोकर थे।

ऐसे हुई सजा ( Court Order )

सिंगोल अल्वी पुत्र मुन्तकी अली को धारा 302/34,364,201 व 120 बी भादवि में मृत्युदण्ड व 11 लाख 10 हजार रूपये का अर्थदण्ड। इसके अलावा सोनू उर्फ रिजवान पुत्र अजहर खान को धारा 302/34,364,201 व 120 बी भादवि में मृत्युदण्ड व 02 लाख 10 हजार रूपये का अर्थदण्ड, तीसरे आरोपी शालू उर्फ अरबाज पुत्र मशकूर खान को धारा 302/34,364,201 व 120 बी भादवि में मृत्युदण्ड व 02 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदण्ड, चौथे आरोपी दिनेश पुत्र कमलसिंह को धारा 201 भादवि में 07 वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रूपये का अर्थदण्ड सुनाया गया।

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