जिंदोली गुरुकुल में तीन दिवसीय वैदिक सम्मेलन शुरू:18 राज्यों से आए वेदाचार्य हुए शामिल, वेद शोभायात्रा भी निकाली

जिंदोली गुरुकुल में तीन दिवसीय वैदिक सम्मेलन शुरू:18 राज्यों से आए वेदाचार्य हुए शामिल, वेद शोभायात्रा भी निकाली

खैरथल-तिजारा की ऐतिहासिक 52 मोड़ की घाटी स्थित जिंदोली गुरुकुल शनिवार देर शाम को वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि से गूंज उठा। श्री भगवत धर्म संस्कृत वेद विद्यालय छात्राश्रम, जिंदोली गुरुकुल में तीन दिवसीय भव्य वैदिक सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसमें देशभर से आए वेदाचार्यों और छात्रों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। दीप प्रज्जवलन से सम्मेलन का शुभारंभ
सम्मेलन का शुभारंभ स्वामी बालकादेवाचार्य महाराज (रैणागिरी धाम), महंत ऋषिदास दास महाराज (सिहाली कलां), जिला प्रमुख बलबीर सिंह छिल्लर, विधायक ललित यादव तथा भाजपा जिला अध्यक्ष महासिंह चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान के सचिव अनुप मिश्रा तथा भाजपा नेता जितेंद्र शर्मा (बानसूर) सहित अनेक गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। 18 राज्यों से आए वेदाचार्यों ने मंत्रोच्चार किया
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और गुरुकुल परंपरा के अनुसार स्वागत से हुई। देश के 18 राज्यों से आए वेदाचार्यों ने ऋग्वेद की शाकल शाखा, शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनि एवं काण्व शाखा, सामवेद की कोथुम और राणायनीय शाखा तथा अथर्ववेद की शौनक और पैपलाद शाखा के मंत्रों का सस्वर उच्चारण किया। मंत्रोच्चारण के साथ-साथ वेदाचार्यों ने वैदिक ज्ञान की महत्ता, संस्कृति संरक्षण और युवा पीढ़ी को वेदों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी विस्तार से विचार व्यक्त किए। पूरे गुरुकुल परिसर में वैदिक स्वर गूंजने से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक और भक्तिमय हो गया। मुख्य अतिथि जिला प्रमुख बलबीर सिंह छिल्लर ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा हमारी सभ्यता की पहचान रही है और इसे आगे बढ़ाने के लिए समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। विधायक ललित यादव ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाले ज्ञान का भंडार हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष महासिंह चौधरी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वेदों का ज्ञान भी प्राप्त करें, ताकि भारतीय संस्कृति की पहचान सशक्त बनी रहे। इस अवसर पर गुरुकुल संस्थापक आचार्य भगवत दयाल वेदपाठी और गुरुकुल के आचार्यों द्वारा सभी अतिथियों का माल्यार्पण, शाल ओढ़ाकर तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीणजन और छात्र उपस्थित रहे, जिन्होंने वैदिक मंत्रों का श्रवण कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। वेद शोभायात्रा निकाली
सायंकाल सम्मेलन के प्रथम दिन खैरथल जिला मुख्यालय पर भव्य वेद शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसने पूरे नगर का ध्यान आकर्षित किया। शोभायात्रा में देशभर से आए वेदाचार्य, गुरुकुल के विद्यार्थी और श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। उनके हाथों में “वेदों की रक्षा, देश की रक्षा”, “वेदों की शक्ति, आपदा से मुक्ति” और “गौ रक्षा” जैसे संदेशों वाली तख्तियां थीं, जो लोगों को संस्कृति और धर्म के प्रति जागरूक करने का संदेश दे रही थीं।। धार्मिक नारों से गूंजा शहर
शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरी, जहां विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही और वातावरण धार्मिक नारों से गूंजता रहा। आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम में आचार्य उमेश दास, उदयलाल सहित देशभर से आए अनेक वेदाचार्यों की उपस्थिति रही। तीन दिवसीय इस वैदिक सम्मेलन के दौरान वेद पाठ, वैदिक प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति के अनुसार इस सम्मेलन का उद्देश्य युवा पीढ़ी को वेदों से जोड़ना और समाज में वैदिक संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

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