दमोह की जिला जेल और जिला न्यायालय को 26 जनवरी को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया था। एक टीएमसी कार्यकर्ता के नाम से आए इस धमकी भरे खत की जब बारीकी से जांच की गई, तो यह पूरी तरह फर्जी निकला। शुक्रवार दोपहर वकील मनीष नगाइच ने जिला कोर्ट की तरफ से इस पूरे मामले की जानकारी दी। धमकी भरा खत मिलने के बाद जिला जज सुभाष सोलंकी ने फौरन पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों को इस बारे में बताया। शहर में डर का माहौल न बने और कोई गलत खबर न फैले, इसके लिए पूरे मामले की जांच बहुत ही गुपचुप तरीके से कराई गई। जांच में पता चला कि यह खबर महज एक अफवाह थी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पश्चिम बंगाल से आया था धमकी भरा खत जेल के उप अधीक्षक एमएल पटेल ने बताया कि 29 दिसंबर 2025 को डाक से एक चिट्ठी आई थी। यह चिट्ठी पश्चिम बंगाल के पूर्वी वर्धमान से उत्तम राय नाम के किसी शख्स ने भेजी थी। खत भेजने वाले ने खुद को टीएमसी कार्यकर्ता बताते हुए 26 जनवरी को जेल और कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। तलाशी में नहीं मिला कुछ भी संदिग्ध मामला गंभीर था, इसलिए पुलिस और जांच टीमों ने खोजी कुत्तों के साथ मिलकर जेल और कोर्ट परिसर की सघन तलाशी ली। कड़ी सुरक्षा के बीच 26 जनवरी का प्रोग्राम अच्छे से संपन्न हुआ और कहीं भी कोई गड़बड़ी नहीं हुई। पूरी पड़ताल के बाद पुलिस और प्रशासन इस नतीजे पर पहुंचे कि यह धमकी भरा पत्र पूरी तरह फर्जी था।


