डॉक्टरों की नियुक्ति न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी:विधायक मुंजारे ने सदन में रखी बालाघाट की समस्याएं, कहा-जर्जर नहरों से 50 गांवों के किसान परेशान

डॉक्टरों की नियुक्ति न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी:विधायक मुंजारे ने सदन में रखी बालाघाट की समस्याएं, कहा-जर्जर नहरों से 50 गांवों के किसान परेशान

बालाघाट की समस्याओं को लेकर कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने बुधवार को विधानसभा में सरकार को घेरा। बजट के बाद अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए। विधायक ने कहा कि 400 बिस्तरों वाले शहीद भगत सिंह जिला अस्पताल बालाघाट में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के विशेषज्ञों व प्रशासनिक अधिकारियों के कुल 40 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 22 ही कार्यरत हैं। जनसंख्या के हिसाब से यह संख्या बेहद कम है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द नियुक्तियां नहीं की गईं तो वह आमरण अनशन पर बैठेंगी। मरीजों को बाहर रेफर करने की मजबूरी विधायक ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को अक्सर नागपुर और गोंदिया रेफर करना पड़ता है। वहीं 50 बिस्तर वाले लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञों के 8 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल एक संविदा महिला चिकित्सक डॉ. रितु धुर्वे ही 24 घंटे सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 28 जून 2023 को 100 सीटों वाले बालाघाट मेडिकल कॉलेज को कैबिनेट मंजूरी और भूमिपूजन के बावजूद अब तक निविदा प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई। शिक्षा व्यवस्था की खामियां भी गिनाईं स्वास्थ्य के साथ-साथ विधायक ने शिक्षा व्यवस्था की खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के 18 विद्यालयों में बाउंड्रीवाल नहीं है, 34 स्कूलों में बच्चों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और 23 विद्यालयों को मरम्मत व अतिरिक्त कक्षों की जरूरत है। जर्जर नहरों से 50 गांवों के किसान परेशान विधायक ने सिंचाई व्यवस्था की बदहाली का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि सर्राटी, पाथरी, मुरूमनाला और चांवरपानी जलाशयों से निकलने वाली नहरें जर्जर हालत में हैं। इसके कारण लगभग 50 गांवों के किसान प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्याप्त सिंचाई नहीं होने से किसान पूरा उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनमें निराशा बढ़ रही है।

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