गोरखपुर में राजनजी की कथा में पहुंच रहे हजारों श्रद्धालु:पांचवे दिन धनुष भंग और सीता-राम विवाह का प्रसंग, भजन पर झूमते रहे लोग, देखें VIDEO

गोरखपुर में राजनजी की कथा में पहुंच रहे हजारों श्रद्धालु:पांचवे दिन धनुष भंग और सीता-राम विवाह का प्रसंग, भजन पर झूमते रहे लोग, देखें VIDEO

गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में 27 जनवरी से चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। विश्व विख्यात कथावाचक राजन जी महाराज ने इस दिन धनुष भंग और सीता-राम विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। कथा सुनने के लिए रोज़ की तरह करीब 40 से 50 हजार श्रद्धालु पहुंचे।
कथा का शुभारंभ राजन जी महाराज ने आरती और भजनों के साथ किया। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। भारी भीड़ को देखते हुए पंडाल को और बड़ा किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था हो सके। पहले देखिए 2 तस्वीरें
कथा के दौरान राजन जी महाराज ने कहा कि जीवन में जितनी आवश्यकता धन और साधनों की होती है, उतनी ही जरूरत परमार्थ की भी होती है। परमार्थ मिलना जीवन का बड़ा सौभाग्य है। धनुष भंग प्रसंग का जीवंत वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे ऋषि विश्वामित्र भगवान राम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला पहुंचे। कई बड़े-बड़े राजा शिव धनुष को हिला तक नहीं पाए, लेकिन गुरु की आज्ञा पाकर भगवान राम ने उसे सहजता से उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। इस घटना से राजा जनक सहित पूरे जनकपुर में आनंद और उल्लास छा गया। राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान राम ने धनुष को केवल तोड़ा नहीं, बल्कि उसका “भंजन” किया, ताकि अहंकार दोबारा खड़ा न हो सके। उन्होंने बताया कि धनुष भंग अहंकार के अंत और भक्ति व विनम्रता की जीत का प्रतीक है। इससे यह संदेश मिलता है कि ईश्वर की कृपा पाने के लिए बल नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय की जरूरत होती है।
कथा में लक्ष्मण और परशुराम संवाद का भी सुंदर वर्णन किया गया। राजन जी ने बताया कि इस प्रसंग में भगवान राम का धैर्य, ब्राह्मण के प्रति सम्मान, तर्क और वीरता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
सीता-राम विवाह प्रसंग सुनाते हुए राजन जी महाराज ने कहा कि इस दिव्य विवाह को देखने के लिए देवता भी वेश बदलकर जनकपुर पहुंचे थे। सुंदर भजनों के साथ विवाह का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और स्वयं को विवाह का साक्षी मानने लगे। जनक और सुनयना द्वारा कन्यादान, पाणिग्रहण और फेरों का वर्णन सुनकर पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। कथा व्यास ने कहा कि चारों भाइयों को अपनी दुल्हनों के साथ मंडप में बैठे देखना देवताओं के लिए भी दुर्लभ दृश्य है। यह कथा मर्यादा, प्रेम और धर्म के आदर्श को पूरी दुनिया के सामने रखती है।
कार्यक्रम का संचालन बृजेश राम त्रिपाठी ने किया। कथा में कुशीनगर विधायक पी.एन. पाठक, विधायक महेंद्र पाल सिंह, पूर्व डीआईजी गोरखपुर आनंद कुलकर्णी, भाजपा नेता रमेश मिश्रा, उद्योगपति जगदीश आनंद, शिवजी सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
सहजनवा विधायक प्रदीप शुक्ला के संयोजन में आयोजित इस कथा में आयोजक डॉ. कुमुद त्रिपाठी, अशोक शुक्ला, भोलेन्द्र नारायण दूबे और आयोजन समिति के अनेक सदस्य मौजूद रहे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सीता-राम विवाह के दिव्य प्रसंग और भजनों का आनंद लिया।

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