कैबिनेट के विस्तार पर चर्चा के बीच सरकार बोर्ड-आयोग का पुनर्गठन करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो मार्च से पहले इनका पुनर्गठन किया जा सकता है। इसके लिए नाम फाइनल किए जा रहे हैं। सरकारी स्तर पर फाइलों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के लिए तारापुर से अपना नॉमिनेशन वापस लेकर उन्हें सपोर्ट करने वाले सकलदेव बिंद को किसी आयोग का अध्यक्ष बनाकर इनाम दिया जा सकता है। उपेंद्र कुशवाहा की बहू साक्षी मिश्रा के भी बोर्ड-आयोग में जाने की चर्चा है। इनके अलावा मुजफ्फरपुर से सहनी समुदाय के बीजेपी नेता मुकेश निषाद को भी आयोग में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। दलित समाज से आने वाले भाजपाई राजेश का नाम भी एक आयोग के लिए लगभग फाइनल माना जा रहा है। किन बोर्ड-आयोग का पुनर्गठन होगा? किन नेताओं को पद मिल सकते हैं? क्या है इसके पीछे की राजनीति? पढ़ें रिपोर्ट…। किन आयोग-बोर्ड का होगा पुनर्गठन 1- नागरिक परिषद
2- युवा आयोग
3-बिहार सफाई कर्मचारी आयोग
4- किसान आयोग
5- व्यापार आयोग
6- पिछड़ा वर्ग आयोग MLC पद की डिमांड कर रहे बिंद, BJP के लिए जरूरी क्यों BJP सूत्रों की मानें तो सकलदेव बिंद MLC पद की डिमांड कर रहे हैं। चुनाव के दौरान BJP के एक मल्लाह नेता ने उनकी सम्राट चौधरी के साथ डील कराई थी। उन्हें भरोसा दिया गया था कि सरकार में अच्छा पद मिलेगा। अब उन्हें आयोग में सेट करने की तैयारी है। वह MLC बनना चाहते हैं। दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान तारापुर विधानसभा सीट से सकलदेव बिंद ने निर्दलीय नामांकन कराया था। नाम वापसी के आखिरी दिन 20 अक्टूबर को उन्होंने नाम वापस ले लिया और सम्राट चौधरी के स्टेज पर जाकर उनको सपोर्ट कर दिया। सकलदेव बिंद लखीसराय-मुंगेर के इलाके में बालू के बड़े कारोबारी माने जाते हैं। पेट्रोल पंप भी है। पैसे से काफी मजबूत हैं। उनकी अपने समाज मल्लाह में अच्छी-खासी पैठ है। EBC की 20% आबादी में बिंद समाज की तादाद अधिक है। एक्सपर्ट की मानें तो अगर वह चुनाव लड़ते तो 10-15 हजार वोट पा सकते थे। बिंद ऐसे वोटर हैं, जो NDA का साथ देते रहे हैं। अगर ये चुनाव लड़ते तो इसका सीधा नुकसान सम्राट चौधरी को होता। नागरिक परिषद से 2 विधायकों की हो सकती है छुट्टी चुनाव से पहले जून में नागरिक परिषद का पुनर्गठन किया गया था। इसमें कुल 32 लोगों को शामिल किया गया। जदयू की तरफ से मंजीत सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के कोटे से माधव आनंद को उपाध्यक्ष बनाया गया था। दोनों विधानसभा चुनाव जीत गए हैं। मंजीत सिंह गोपालगंज के बरौली से तो माधव आनंद मधुबनी से विधायक चुने गए हैं। ऐसे में इनका हटना तय माना जा रहा है। चुनाव में निष्क्रिय रहने वाले नेताओं की होगी छुट्टी सूत्रों की मानें तो जदयू और बीजेपी बोर्ड-आयोग में मलाईदार पद का आनंद लेकर भी चुनाव में निष्क्रिय रहने या साइलेंट रह कर पार्टी विरोधी एक्टिविटी में शामिल होने वाले नेताओं की लिस्ट तैयार कर रही है। कई ऐसे आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ शिकायत इलाके के विधायकों के तरफ से की गई है। इन नेताओं की भी बोर्ड-आयोग से छुट्टी हो सकती है। युवा आयोग और सफाई आयोग का होगा पुनर्गठन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार की तरफ से युवा आयोग के गठन की घोषणा हुई थी। उस समय पद धारकों के नाम का ऐलान नहीं हो सका। उम्मीद की जा रही है कि अब इस आयोग का गठन हो जाएगा। इसमें एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्षों के अलावा सात सदस्य होंगे। अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष तय की गई है। फिलहाल रोजगार और युवा सरकार के मुख्य फोकस में हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं के साथ-साथ इसमें एक्सपर्ट को भी जगह मिल सकती है। इसके अलावा बिहार सफाई कर्मचारी आयोग के गठन की प्रक्रिया लगभग फाइनल स्टेज में है। बिहार सरकार ने सफाई कर्मचारियों के कल्याण, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के गठन को 29 जुलाई 2025 को मंजूरी दी थी। इस आयोग में 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष और 5 सदस्य शामिल होंगे, जिसमें कम से कम 1 महिला या ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि अनिवार्य है। यह आयोग राज्य के सफाई कर्मियों के अधिकारों की रक्षा और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए काम करेगा। इसके अलावा किसान आयोग, व्यापार आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन होना भी बाकी है। कुशवाहा-मांझी ने की है बोर्ड आयोग में हिस्सेदारी की मांग NDA में शामिल बिहार के छोटे दल लगातार बोर्ड और आयोग में अपनी हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। अभी बीजेपी और जदयू के अलावा मात्र एक आयोग (अनुसूचित जाति आयोग) के अध्यक्ष चिराग पासवान के बहनोई मृणाल पासवान को बनाया गया है। इनके साथ हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी के दामाद देवेंद्र कुमार को इस आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा छोटे सहयोगी दल को सदस्य के तौर पर एक या दो आयोग में मौका मिला है। अब सभी छोटे दल अपने कार्यकर्ताओं के लिए आयोग-बोर्ड में जगह मांग रहे हैं। अध्यक्ष को 2.5 लाख रुपए से ज्यादा की सैलरी बोर्ड और आयोग के अध्यक्ष व सदस्य को बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य जितना वेतन, भत्ता और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। साथ ही राज्य सरकार इन्हें अपने विवेक से मंत्री, राज्य मंत्री या उप मंत्री का दर्जा दे सकती है। 2023 में सरकार ने यह संशोधन किया था। इस समय BPSC आयोग के अध्यक्ष की सैलरी 2.25 लाख रुपए (डीए अलग से) और इसी तरह सदस्य की सैलरी 2 लाख रुपए प्लस थी। इसके अलावा आवास और गाड़ी की सुविधा दी जाती है। कैबिनेट के विस्तार पर चर्चा के बीच सरकार बोर्ड-आयोग का पुनर्गठन करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो मार्च से पहले इनका पुनर्गठन किया जा सकता है। इसके लिए नाम फाइनल किए जा रहे हैं। सरकारी स्तर पर फाइलों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के लिए तारापुर से अपना नॉमिनेशन वापस लेकर उन्हें सपोर्ट करने वाले सकलदेव बिंद को किसी आयोग का अध्यक्ष बनाकर इनाम दिया जा सकता है। उपेंद्र कुशवाहा की बहू साक्षी मिश्रा के भी बोर्ड-आयोग में जाने की चर्चा है। इनके अलावा मुजफ्फरपुर से सहनी समुदाय के बीजेपी नेता मुकेश निषाद को भी आयोग में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। दलित समाज से आने वाले भाजपाई राजेश का नाम भी एक आयोग के लिए लगभग फाइनल माना जा रहा है। किन बोर्ड-आयोग का पुनर्गठन होगा? किन नेताओं को पद मिल सकते हैं? क्या है इसके पीछे की राजनीति? पढ़ें रिपोर्ट…। किन आयोग-बोर्ड का होगा पुनर्गठन 1- नागरिक परिषद
2- युवा आयोग
3-बिहार सफाई कर्मचारी आयोग
4- किसान आयोग
5- व्यापार आयोग
6- पिछड़ा वर्ग आयोग MLC पद की डिमांड कर रहे बिंद, BJP के लिए जरूरी क्यों BJP सूत्रों की मानें तो सकलदेव बिंद MLC पद की डिमांड कर रहे हैं। चुनाव के दौरान BJP के एक मल्लाह नेता ने उनकी सम्राट चौधरी के साथ डील कराई थी। उन्हें भरोसा दिया गया था कि सरकार में अच्छा पद मिलेगा। अब उन्हें आयोग में सेट करने की तैयारी है। वह MLC बनना चाहते हैं। दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान तारापुर विधानसभा सीट से सकलदेव बिंद ने निर्दलीय नामांकन कराया था। नाम वापसी के आखिरी दिन 20 अक्टूबर को उन्होंने नाम वापस ले लिया और सम्राट चौधरी के स्टेज पर जाकर उनको सपोर्ट कर दिया। सकलदेव बिंद लखीसराय-मुंगेर के इलाके में बालू के बड़े कारोबारी माने जाते हैं। पेट्रोल पंप भी है। पैसे से काफी मजबूत हैं। उनकी अपने समाज मल्लाह में अच्छी-खासी पैठ है। EBC की 20% आबादी में बिंद समाज की तादाद अधिक है। एक्सपर्ट की मानें तो अगर वह चुनाव लड़ते तो 10-15 हजार वोट पा सकते थे। बिंद ऐसे वोटर हैं, जो NDA का साथ देते रहे हैं। अगर ये चुनाव लड़ते तो इसका सीधा नुकसान सम्राट चौधरी को होता। नागरिक परिषद से 2 विधायकों की हो सकती है छुट्टी चुनाव से पहले जून में नागरिक परिषद का पुनर्गठन किया गया था। इसमें कुल 32 लोगों को शामिल किया गया। जदयू की तरफ से मंजीत सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के कोटे से माधव आनंद को उपाध्यक्ष बनाया गया था। दोनों विधानसभा चुनाव जीत गए हैं। मंजीत सिंह गोपालगंज के बरौली से तो माधव आनंद मधुबनी से विधायक चुने गए हैं। ऐसे में इनका हटना तय माना जा रहा है। चुनाव में निष्क्रिय रहने वाले नेताओं की होगी छुट्टी सूत्रों की मानें तो जदयू और बीजेपी बोर्ड-आयोग में मलाईदार पद का आनंद लेकर भी चुनाव में निष्क्रिय रहने या साइलेंट रह कर पार्टी विरोधी एक्टिविटी में शामिल होने वाले नेताओं की लिस्ट तैयार कर रही है। कई ऐसे आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ शिकायत इलाके के विधायकों के तरफ से की गई है। इन नेताओं की भी बोर्ड-आयोग से छुट्टी हो सकती है। युवा आयोग और सफाई आयोग का होगा पुनर्गठन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार की तरफ से युवा आयोग के गठन की घोषणा हुई थी। उस समय पद धारकों के नाम का ऐलान नहीं हो सका। उम्मीद की जा रही है कि अब इस आयोग का गठन हो जाएगा। इसमें एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्षों के अलावा सात सदस्य होंगे। अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष तय की गई है। फिलहाल रोजगार और युवा सरकार के मुख्य फोकस में हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं के साथ-साथ इसमें एक्सपर्ट को भी जगह मिल सकती है। इसके अलावा बिहार सफाई कर्मचारी आयोग के गठन की प्रक्रिया लगभग फाइनल स्टेज में है। बिहार सरकार ने सफाई कर्मचारियों के कल्याण, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के गठन को 29 जुलाई 2025 को मंजूरी दी थी। इस आयोग में 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष और 5 सदस्य शामिल होंगे, जिसमें कम से कम 1 महिला या ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि अनिवार्य है। यह आयोग राज्य के सफाई कर्मियों के अधिकारों की रक्षा और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए काम करेगा। इसके अलावा किसान आयोग, व्यापार आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन होना भी बाकी है। कुशवाहा-मांझी ने की है बोर्ड आयोग में हिस्सेदारी की मांग NDA में शामिल बिहार के छोटे दल लगातार बोर्ड और आयोग में अपनी हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। अभी बीजेपी और जदयू के अलावा मात्र एक आयोग (अनुसूचित जाति आयोग) के अध्यक्ष चिराग पासवान के बहनोई मृणाल पासवान को बनाया गया है। इनके साथ हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी के दामाद देवेंद्र कुमार को इस आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा छोटे सहयोगी दल को सदस्य के तौर पर एक या दो आयोग में मौका मिला है। अब सभी छोटे दल अपने कार्यकर्ताओं के लिए आयोग-बोर्ड में जगह मांग रहे हैं। अध्यक्ष को 2.5 लाख रुपए से ज्यादा की सैलरी बोर्ड और आयोग के अध्यक्ष व सदस्य को बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य जितना वेतन, भत्ता और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। साथ ही राज्य सरकार इन्हें अपने विवेक से मंत्री, राज्य मंत्री या उप मंत्री का दर्जा दे सकती है। 2023 में सरकार ने यह संशोधन किया था। इस समय BPSC आयोग के अध्यक्ष की सैलरी 2.25 लाख रुपए (डीए अलग से) और इसी तरह सदस्य की सैलरी 2 लाख रुपए प्लस थी। इसके अलावा आवास और गाड़ी की सुविधा दी जाती है।


