77 साल अंधेरे में रहा मध्यप्रदेश का यह गांव:आजादी के बाद पहली बार पहुंची बिजली, BSNL का मोबाइल टॉवर लगा

77 साल अंधेरे में रहा मध्यप्रदेश का यह गांव:आजादी के बाद पहली बार पहुंची बिजली, BSNL का मोबाइल टॉवर लगा

देश को आजाद हुए 77 साल बीतने के बाद शिवपुरी जिले के आदिवासी गांव अहेरा में पहली बार बिजली पहुंची है।अब तक गांव अंधेरे में था। आजादी के बाद से अब तक इस गांव में न बिजली थी, न पानी की स्थायी व्यवस्था और न ही मोबाइल नेटवर्क। पीढ़ियां बदलीं, लेकिन रातें दीये और लालटेन की रोशनी में ही गुजरती रहीं। 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव कूनो नेशनल पार्क जाते समय इस क्षेत्र से गुजरे। ग्रामीणों ने सीएम के काफिले को रोककर बताया कि उनके गांव में अब तक बिजली नहीं आती है। इसके बाद सीएम ने अधिकारियों को मौके पर निर्देश दिए। सात दशक का इंतजार अब पूरा हुआ गांव में पीएम जनमन योजना के तहत विद्युतीकरण का काम शुरू किया गया। करीब एक महीने के भीतर गांव के 138 आदिवासी परिवारों को बिजली से जोड़ा गया। इसके लिए बिजली के साथ पानी और स्ट्रीट लाइट भी बिजली के साथ-साथ गांव में पहली बार हर घर के बाहर नल कनेक्शन लगाकर पानी की व्यवस्था की गई। इसके अलावा सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइटें भी लगाई गई हैं। मोबाइल नेटवर्क से कटे इस गांव में अब बीएसएनएल का मोबाइल टावर लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी के अनुसार अहेरा गांव फॉरेस्ट एरिया में होने के कारण पहले जरूरी अनुमतियां नहीं मिल पाई थीं। अनुमति मिलते ही बिजली, पानी, सोलर लाइट और मोबाइल कनेक्टिविटी से जुड़े काम तेजी से पूरे किए गए। राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हुआ नाम इसी अभियान के तहत शिवपुरी जिले की 339 पीवीटीजी/जुगा आदिवासी बस्तियों में भी बिजली पहुंचाई गई है। कुल 4017 आदिवासी परिवारों को बिजली सुविधा मिलने के बाद शिवपुरी जिले को पीवीटीजी योजना में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिला है। सरपंच विद्याबाई आदिवासी के पति लम्पी आदिवासी बताते हैं कि उन्होंने अपने पूर्वजों के समय से गांव में कभी बिजली नहीं देखी थी। वहीं गीता यादव का कहना है कि 15 साल पहले गांव में आकर बसने के बाद बिना बिजली जीवन बेहद मुश्किल था,अब जाकर हालात बदले हैं। देखें गांव की तस्वीरें

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