कर्नाटक सरकार ने एसएसएलसी SSLC (10वीं) के छात्रों पर पढ़ाई का दबाव कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने घोषणा की कि अब एसएसएलसी परीक्षा में ‘तीसरी भाषा’ Third Language in SSLC Exam को पास-फेल के बजाय ग्रेडिंग प्रणाली में रखा जाएगा।
विधानसभा सत्र के बाद संवाददाता सम्मेलन में मंत्री ने बताया कि अब तक 625 अंकों की परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए 100 अंक निर्धारित थे, लेकिन अब इन अंकों को अंतिम परिणाम में नहीं जोड़ा जाएगा। इसके बजाय छात्रों को ए, बी, सी, डी जैसे ग्रेड दिए जाएंगे।उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी, संस्कृत, तुलु, मराठी, अरबी समेत सभी तीसरी भाषाओं पर यह नियम लागू होगा। इस संबंध में आधिकारिक आदेश जल्द जारी किया जाएगा।
नैतिक शिक्षा की शुरुआत
मंत्री ने कहा कि चालू शैक्षणिक वर्ष से छात्रों को ‘नैतिक शिक्षा’ (मोरल साइंस) की किताबें सरकार की ओर से मुफ्त दी जा रही हैं। इसका उद्देश्य बेहतर नागरिक तैयार करना है।
सोशल मीडिया पर रोक का प्रस्ताव
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी सदन में चर्चा के लिए लाया गया है, जिसे व्यापक समर्थन मिला है। मंत्री ने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल उपयोग पर निगरानी रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाना, पारदर्शिता बनाए रखना और छात्रों को परीक्षा के तनाव से मुक्त करना है। इसी दिशा में साल में तीन परीक्षाएं आयोजित कर छात्रों को बेहतर अंक बनाए रखने का अवसर दिया जा रहा है।
सभी बोर्डों पर लागू
पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा में दो महीने की छूट को लेकर उन्होंने कहा कि उम्र का नया मापदंड सभी बोर्डों पर लागू होगा।


