पीड़ितों की आवाज बन उम्मीद की रोशनी जला रहीं ये महिलाएं

पीड़ितों की आवाज बन उम्मीद की रोशनी जला रहीं ये महिलाएं

नीलिमा रानी…माहवारी के दौरान स्वच्छता के फायदे बता रहीं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस रविवार को है। यह दिन महिलाओं के लिए समर्पित है। इस दिन नारी शक्ति आैर उनकी उपलब्धियों का सम्मान करने, जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा देने और हर क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को याद िकया जाता है। इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ‘गिव टू गेन’ है। इसका आशय जब हम दूसरों को सहारा देते हैं पूरी मानवता को लाभ होता है। हमलोगों ने परिवार के लिए समर्पित महिलाओं की कहानियां सुनी हैं। लेकिन, हम ऐसी महिलाओं की कहानियां बता रहे हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन पीड़ित महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए समर्पित कर दिया। साथ ही उनके पक्ष में आवाज उठाई है। उनकी पहल पर आज हजारों महिलाओं और बेटियों को नई जिंदगी मिली है। आइए जानें इन महिलाओं के बारे में… पटना की नीलिमा रानी ने बिहार-झारखंड की 3000 से अधिक महिलाओं को स्वच्छता से जोड़कर उन्हें कई बीमारियों से बचाया है। वह बताती हैं कि आदिवासी महिलाओं में मासिक स्वच्छता के प्रति जागरुकता की कमी होती है। उन्हें जागरूक करने के लिए हेल्थ किट देती हैं। वह स्कूलों में स्वच्छता के फायदे बताती हैं। एमबीए करने के बाद समाज सेवा करने का कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन वह रुकी नहीं। 2016 से ही महिलाओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता को लेकर जागरूक कर रही हैं। शाहीना परवीन…5000 बच्चियों को बाल विवाह और तस्करी से बचाया पटना की शाहीना परवीन पिछले 20 वर्षों से बेटियों को बाल तस्करी, बाल विवाह से बचाने के लिए काम कर रही हैं। वह रोहतास, जमुई, अरवल, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण और शिवहर में बेटियों के लिए सुकन्या क्लब चलाती हैं। इस क्लब में गांव की 35 किशोरियां होती हैं, जिनकी पढ़ाई छूट गई होती है। ये सभी एससी-एसटी समुदाय से आती हैं। वह इन बच्चियों के माता-पिता से बात करती हैं आैर उन्हें इनसे प्यार करना सिखाती हैं। वह कहती हैं अब तक 5000 से अधिक बेटियों को बाल विवाह और तस्करी से बचा चुकी हैं। राखी शर्मा…25 वर्षों में 15 हजार लोगों को नशा से बचाया पटना की राखी शर्मा 25 वर्षों से नशा के खिलाफ अभियान चला रही हैं। वह 15 हजार से अधिक लोगों को नशा से बचाकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ चुकी हैं। इसके लिए उन्हें कई बार धमकी मिली है। इसके बावजूद वह डरी नहीं हैं। वह जेलों में भी नशे के खिलाफ काम करती हैं। वह बताती हैं कई लोग जरूरतों के लिए आदतन नशा का शिकार हो जाते हैं। अब वह नशा के शिकार महिला आैर पुरुषों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई हैं। नीलिमा रानी…माहवारी के दौरान स्वच्छता के फायदे बता रहीं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस रविवार को है। यह दिन महिलाओं के लिए समर्पित है। इस दिन नारी शक्ति आैर उनकी उपलब्धियों का सम्मान करने, जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा देने और हर क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को याद िकया जाता है। इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ‘गिव टू गेन’ है। इसका आशय जब हम दूसरों को सहारा देते हैं पूरी मानवता को लाभ होता है। हमलोगों ने परिवार के लिए समर्पित महिलाओं की कहानियां सुनी हैं। लेकिन, हम ऐसी महिलाओं की कहानियां बता रहे हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन पीड़ित महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए समर्पित कर दिया। साथ ही उनके पक्ष में आवाज उठाई है। उनकी पहल पर आज हजारों महिलाओं और बेटियों को नई जिंदगी मिली है। आइए जानें इन महिलाओं के बारे में… पटना की नीलिमा रानी ने बिहार-झारखंड की 3000 से अधिक महिलाओं को स्वच्छता से जोड़कर उन्हें कई बीमारियों से बचाया है। वह बताती हैं कि आदिवासी महिलाओं में मासिक स्वच्छता के प्रति जागरुकता की कमी होती है। उन्हें जागरूक करने के लिए हेल्थ किट देती हैं। वह स्कूलों में स्वच्छता के फायदे बताती हैं। एमबीए करने के बाद समाज सेवा करने का कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन वह रुकी नहीं। 2016 से ही महिलाओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता को लेकर जागरूक कर रही हैं। शाहीना परवीन…5000 बच्चियों को बाल विवाह और तस्करी से बचाया पटना की शाहीना परवीन पिछले 20 वर्षों से बेटियों को बाल तस्करी, बाल विवाह से बचाने के लिए काम कर रही हैं। वह रोहतास, जमुई, अरवल, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण और शिवहर में बेटियों के लिए सुकन्या क्लब चलाती हैं। इस क्लब में गांव की 35 किशोरियां होती हैं, जिनकी पढ़ाई छूट गई होती है। ये सभी एससी-एसटी समुदाय से आती हैं। वह इन बच्चियों के माता-पिता से बात करती हैं आैर उन्हें इनसे प्यार करना सिखाती हैं। वह कहती हैं अब तक 5000 से अधिक बेटियों को बाल विवाह और तस्करी से बचा चुकी हैं। राखी शर्मा…25 वर्षों में 15 हजार लोगों को नशा से बचाया पटना की राखी शर्मा 25 वर्षों से नशा के खिलाफ अभियान चला रही हैं। वह 15 हजार से अधिक लोगों को नशा से बचाकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ चुकी हैं। इसके लिए उन्हें कई बार धमकी मिली है। इसके बावजूद वह डरी नहीं हैं। वह जेलों में भी नशे के खिलाफ काम करती हैं। वह बताती हैं कई लोग जरूरतों के लिए आदतन नशा का शिकार हो जाते हैं। अब वह नशा के शिकार महिला आैर पुरुषों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई हैं।  

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