ये जरूरी टेस्ट बता देंगे आपको हार्ट अटैक का कितना खतरा, क्या आपने कराए…?

ये जरूरी टेस्ट बता देंगे आपको हार्ट अटैक का कितना खतरा, क्या आपने कराए…?

Healthy Heart dil ka sach series Part 5: अक्सर आपने देखा होगा कि जब किसी को अचानक हार्ट अटैक आता है… तो परिवार के लोग भले न कहें, लेकिन आस-पड़ोस जरूर कहता है कि सुबह तो अच्छे-खासे थे, इतना हंसकर बात कर रहे थे, अचानक हार्टटैक कैसे आ गया? अब सवाल यह उठता है कि क्या Heart Attack का खतरा पहले से पता नहीं चल सकता? दिलचस्प बात यह है कि वर्तमान की आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अब इस बात को स्वीकार करता है कि हार्ट अटैक का जोखिम कई मामलों में पहले से ही पहचाना जा सकता है। हालांकि यह कोई भविष्यवाणी नहीं है और न ही ऐसा सच कि जिसे सटीक मान लिया जाए। लेकिन कुछ मेडिकल जांचें, पारिवारिक इतिहास और जीवनशैली के विश्लेषण के आधार पर यह अंदाजा लगाया जा सकता है किसी व्यक्ति में दिल की बीमारी का खतरा कितना है? पढ़ें संजना कुमार की खास रिपोर्ट…

अब सवाल ये है कि अगर खतरा पहले से पता लगाया जा सकता है, तो फिर अचानक हार्ट अटैक क्यों? फिर अचानक हार्ट अटैक क्यों आते हैं? जब मेडिकल में इतने टेस्ट मौजूद हैं, तो फिर डॉक्टरों या युवा लोग अचानक आने वाले अटैक से क्यों मर रहे हैं।

एमबीबीएस, एमडी और हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. विनोद कोठारी से बातचीत

राजधानी भोपाल के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. कोठारी कहते हैं कि इसके पीछे कई कारण हैं, सबसे बड़ा कारण है कि दिल का आकलन केवल एक-दो टेस्ट से नहीं किया जा सकता। इसके लिए कई पहलुओं को एक साथ देखना पड़ता है।

–मेडिकल टेस्ट

–जीवनशैली

–मानसिक तनाव

–नींद की क्वालिटी

–पारिवारिक इतिहास

नोट- अगर इनमें से कुछ कारकों को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो आकलन सही नहीं माना जाएगा।

केवब लैब रिपोर्ट से सबकुछ पता नहीं चलता

दिल के जोखिम का मूल्यांकन करते समय कई बार डॉक्टरों का ध्यान लैब रिपोर्ट पर रहता है। हालांकि ये जांचें बेहद महत्वपूर्ण हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स को यह भी ध्यान रखना होगा कि लाइफस्टाइल का इम्पैक्ट भी उता ही महत्वपूर्ण है…
-लगातार तनाव
-पर्याप्त नींद
-काम का ज्यादा बोझ

नोट-ये सभी ऐसे कारकों में शामिल हैं डो सूजन और हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकते हैं और भविष्य में यही दिल की बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

स्ट्रैस और हार्ट का कनेक्शन

पिछले पार्ट 2 में हमने इसे जाना था। एक बार फिर समझ लें कि लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। ये हार्मोन…

-ब्लड प्रेशर (BP) बढाता है

-शरीर में सूजन को बढ़ा देता है।

-मेटाबोलिक असंतुलन पैदा कर सकता है।

नोट- यही कारण है कि जब दिल की बीमारियों का जोखिम का सही आकलन करना है, तो लैब रिपोर्ट के साथ लाइफस्टाइल को समझना भी जरूरी है।

हार्ट अटैक का जोखिम पता लगाने वाले मुख्य टेस्ट

दिल की जांच के लिए कई तहर के टेस्ट किए जाते हैं। इन टेस्ट का उद्देश्य दिल की संरचना, कार्यक्षमता और रक्तवाहिकाओं की स्थिति को जानना और समझना होता है।

1- इकोकार्डियोग्राम

इकोकार्डियोग्राम एक प्रकार का दिल का अल्ट्रासाउंड टेस्ट होता है। इस टेस्ट से डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि

  • दिल के वॉल्व सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं
  • दिल की पंपिग कैपेबिलिटी कैसी है
  • दिल की संरचना में कोई भी असामान्य परिवर्तन तो नहीं है

नोट-ये टेस्ट दिल की कार्यक्षमता को समझने में मदद करते हैं।

2-स्ट्रेस टेस्ट

इस जांच में शरीर पर नियंत्रित शारीरिक दबाव डाला जाता है। आमतौर पर व्यक्ति को ट्रेडमील पर चलाया जाता है। इस दौरान दिल की गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जाती है। शारीरिक मेहनत के दौरान दिल की प्रतिक्रिया यहां महत्वपूर्ण हो जाती है। इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम में कोई असामान्यता तो नजर नहीं आ रही। ये सभी जानकारियां आपके दिल का हाल बता देती हैं।

3-कैल्शियम का टेस्ट

यह एक खास प्रकार का स्कैनिंग टेस्ट है, इससे पता लगाया जाता है कहीं रक्तवाहिकाओं में कैल्शियम तो जमा हुआ नहीं है। अगर ब्लड वैसल्स में कैल्शियम जमा होने लगता है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि वहां प्लाक बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

4-एंजियोग्राफी

एंजियोग्राफई दिल की नसों की जांच के लिए किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट माना जाता है। इसमें डॉक्टर्स देख सकते हैं कि नसों में ब्लॉकेज कितना है, कहीं ब्लड फ्लो के दौरान कहीं रुकावट तो नहीं आ रही। हालांकि यह जांच ब्लॉकेज का केवल प्रतिशत बता सकती है, लेकिन यह नहीं बता पाती की प्लाक कितना स्थिर है या अस्थिर है।

5-आधुनिक इमेजिंग तकनीक बड़ी राहत

आजकल कुछ उन्नत तकनीकें भी उपलब्ध हैं। इनमें आईवीयूएस (intravascular Ultrasound), ओसीटी (Optical Coherence Tomography) ये ऐसी आधुनिक तकनीक हैं जो नसों के अंदर की संरचना को ज्यादा विस्तार से दिखा सकती हैं, उनमें कोलेस्ट्रोल और अन्य बायोमार्कर की स्थिति क्या है।

Heart Attack Risk test
Heart Attack Risk test (photo:freepik)

दिल के जोखिम का मूल्यांकन करते समय रक्त में मौजूद कुछ महत्वपूर्ण तत्वों की जांच की जाती है

LDL और ApoB टेस्ट क्या है?

LDL को आमतौर पर खराब कॉलेस्ट्रॉल कहा जाता है। लेकिन डॉक्टर्स के लिए केवल LDL का स्तर देखना ही काफी नहीं होता। ApoB नामक टेस्ट यह बताता है कि खून में कोलेस्ट्रॉल कणों की संख्या कितनी है, जो Heart Attack के जोखिम को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है।

Lp(a) क्यों है जरूरी टेस्ट

Lipoprotien या Lp(a) एक विशेष प्रकार का कण होता है, जो कई मामलों में आनुवंशिक कारणों से बढ़ा हुआ पाया जाता है। यह नसों में प्लाक बनने और खून के थक्के बनने की आशंका को बढ़ा सकता है। कई हार्ट एक्सपर्ट्स इस कण के बढ़ने को हार्ट अटैक के जोखिम कारणों में से एक महत्वपूर्ण फैक्टर मानते हैं।

सूजन को मापने वाले आधुनिक टेस्ट

दिल की बीमारी के खतरे को समझने के लिए महत्वपूर्ण यह भी है कि शरीर में कितनी सूजन है। सूजन के स्तर को भी मापा जा सकता है।

hs-CRP टेस्ट

अगर आपके शरीर में इस टेस्ट में hs-CRP का लेवल बढ़ा हुआ आता है, तो यह संकेत है कि शरीर में सूजन है। जब शरीर में लगातार सूजन बनी रहती है, तो लिवर एक विशेष प्रकार का प्रोटीन बनता है, जिसे CRP कहते हैं।

Lp-PLA2 एंजाइम टेस्ट

यह एक एंजाइम टेस्ट है, जो नसों में प्लाक के साथ जुड़ा होता है। इस टेस्ट के माध्यम से यह पता लगाना आसान हो जाता है कि नसों में प्लाक या ब्लॉकेज है या नहीं, यह प्लाक कितना सक्रिय है या अस्थिर।

किडनी से जुड़ा ये टेस्ट भी बताएगा दिल का हाल

दिल और किडनी की ब्लड वैसल्स कई मामलों में समान तरह से प्रभावित होती हैं। यही कारण है कि यूरिन एल्बुमिन-क्रिएटिनिन रेशियों नामक जांच भी हार्ट अटैक के जोखिम का आकलन करने में मदद करता है। यदि यह टेस्ट पॉजिटिव आता है तो स्पष्ट है कि नसों के नुकसान की शुरुआत हो चुकी है।

MPO टेस्ट क्या होता है?

MPO भी एक एंजाइम टेस्ट होता है, डो कुछ विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाओं से निकलता है। यह परीक्षण यह बताता है कि नसों की दीवारों में सूजन की गतिविधि कितनी एक्टिव है। हालांकि यह टेस्ट अभी इतना कॉमन नहीं हुआ है कि आसानी से उपलब्ध हो सके।

कुल मिलाकर कहना होगा कि दिल की बीमारियों का खतरा समझना किसी एक टेस्च से संभव ही नहीं है। इसे जानने के लिए सभी कारकों को एक साथ देखना होगा… मेडिकल जांच, लाइफस्टाइल, पारिवारिक हिस्ट्री और शरीर में सूजन
यदि इन सभी फैक्टर्स को समझकर डॉक्टर से चर्चा करें तो हार्ट अटैक या दिल की किसी भी बीमारी के जोखिम का आकलन सटीक तरीके से किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बचाव ही पहली सीढ़ी है। जब लोग अपने जोखिम कारकों को समझते हैं, तो वे सतर्क होकर समय रहते सही कदम उठा सकते हैं।

Healthy Heart Dil ka sach Series का पार्ट 5 आपको कैसा लगा, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। अगर आपके मन में भी है कोई सवाल तो हमसे पूछें एक्सपर्ट बता सकते हैं आपके दिल की सेहत का राज… सीरीज के अगले पार्ट्स में ऐसी ही रोचक जानकारियां पढ़ने के लिए जुड़े रहिए patrika.com के साथ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *