मप्र के आदिवासी ग्रेजुएट युवाओं को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में चयन दिलाने के लिए राज्य सरकार अपनी कोचिंग योजना में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब दिल्ली भेजने से पहले विभागीय स्तर पर एंट्रेंस टेस्ट लिया जाएगा। तय कटऑफ के आधार पर केवल चयनित अभ्यर्थियों पर ही सरकार खर्च करेगी। इसके साथ ही आय सीमा और एक बार ही कोचिंग के लिए वित्तीय सहायता देने के नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित है। अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर पिछले सप्ताह शासन को भेज दिया है। एंट्रेंस टेस्ट एमपी ऑनलाइन, राज्य ओपन स्कूल या किसी अन्य शासकीय एजेंसी के माध्यम से कराया जा सकता है। ऐसी व्यवस्था तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में पहले से लागू है। दरअसल, 2012-13 में आदिवासी युवाओं के लिए यूपीएससी कोचिंग योजना शुरू की गई थी, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। 2017 में तत्कालीन प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने इसकी समीक्षा कराई, जिसमें पाया गया कि चयनित अभ्यर्थियों का शैक्षणिक स्तर और तैयारी पर्याप्त नहीं थी और वे बिना चयन प्रक्रिया के किसी भी कोचिंग में प्रवेश ले रहे थे। इसके बाद चार अधिकारियों की कमेटी बनी और रिपोर्ट भी आई, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका। बाद में 2024-25 में तत्कालीन आयुक्त श्रीमन शुक्ला ने फिर समीक्षा कर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में काम शुरू किया। अब वर्तमान आयुक्त तरुण राठी ने योजना को संशोधित कर शासन को भेजा है। अब तक स्कीम की हकीकत : 2012-13 से शुरु हुई योजना में हर साल औसतन 50 बच्चे कोचिंग के लिए दिल्ली जाते थे। सिर्फ 12 बच्चे ही यूपीएससी प्री और मेन्स तक पहुंच पाए। योजना में फीस के अलावा 12 हजार रुपए प्रतिमाह खाने का खर्च भी अलग से। किताबों के लिए साल में 15 हजार रुपए।
विदेश की पढ़ाई का भी रिव्यू : राज्य सरकार में आदिवासी बच्चों को विदेश पढ़ाई के लिए भेजने की स्कीम है। यह 2004-05 से चल रही है। पीएचडी या रिसर्च के लिए अंतरराष्ट्रीय विवि में दाखिला लेने पर प्रत्येक छात्र-छात्रा को 40 हजार डॉलर (आज की स्थिति में करीब 38 लाख रुपए) एक साल में मिलते हैं। इसके अलावा रहने और खाने के लिए 10 हजार डॉलर सालाना, एक बार आने-जाने का हवाई जहाज का टिकट मिलता है। पिछले तीन साल में सिर्फ 12 बच्चे ही विदेश जा पाए। इसलिए इस स्कीम का भी रिव्यू करने के साथ इसका प्रचार किया जाएगा। 3 बड़े बदलाव की तैयारी
1. आय सीमा 6 लाख रु. से बढ़ाकर 10 लाख रु. होगी। ताकि कोचिंग छात्रों की संख्या बढ़े।
2. अभी कोचिंग जाने वाले हर बच्चे को दो लाख रुपए तक या जो कोचिंग की फीस है, पैसा मिलता है। अब इसे एक की बजाय दो साल दिया जाना प्रस्तावित है। दूसरे साल कोचिंग का खर्च उन्हीं को मिलेगा, जो पहले प्रयास में प्री या प्री-मेन्स निकाल लेते हैं।
3. अभ्यर्थियों को केवल दिल्ली की शीर्ष 5-6 कोचिंग संस्थानों में ही भेजा जाएगा।


