निकायों के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत
राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में अब व्यावसायिक प्रोजेक्ट व कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए नई सुविधा दी जाएगी। इसके तहत अब 16 मीटर तक ऊंचाई (5 से 6 मंजिला भवन) वाले व्यावसायिक प्रोजेक्ट के नक्शे को आर्किटेक्ट ही पास कर सकेंगे। ये आर्किटेक्ट नगर विकास एवं आवास विभाग से सूचीबद्ध होंगे। अब तक व्यावसायिक प्रोजेक्ट का नक्शा नगर निगम ही पास करता था। जल्द ही यह नई व्यवस्था लागू होगी। इसे लेकर राज्य सरकार महीने भर में नई गाइडलाइन जारी करेगी। यही नहीं, बिहार बिल्डिंग बायलॉज में भी बदलाव प्रस्तावित है, ताकि भू-संपदा प्रक्षेत्र का तेजी से विकास हो सके। सोमवार को भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की ओर से बिल्डरों के प्रोजेक्ट निबंधन विषय पर आयोजित कार्यशाला में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने बताया कि मंत्रिमंडल को इस बारे में अनुमोदन चला गया है। इस पर मुहर लगने के बाद सूचीबद्ध आर्किटेक्ट को 16 मीटर ऊंचाई वाले व्यावसायिक भवन बनाने की अनुमति मिलेगी। साथ ही सूचीबद्ध व निबंधित बिल्डरों का ही नक्शा पास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 11 सैटेलाइट शहरों को बसाने की घोषणा की है, जिस पर काम किया जा रहा है। अब पूरे साल होगा कंपनी का निबंधन नगर विकास एवं आवास विभाग से सूचीबद्ध आर्किटेक्ट ही पास करेंगे नक्शा। प्रधान सचिव ने बताया कि अब प्रमोटर अपनी कंपनी का निबंधन नगर विकास एवं आवास विभाग में पूरे साल करा सकेंगे। निबंधन के समय उनसे कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। सोमवार से ही इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन के तहत राज्य की सभी शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित सूचनाएं एवं सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगी। निबंधन के 100 से अधिक आवेदन रद्द बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट का निबंधन कराना अब अनिवार्य है। रेरा ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। रेरा ने 100 से अधिक निबंधन के आवेदनों को रद्द कर दिया है, क्योंकि आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज नहीं थे। इधर, रेरा के अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह ने बिल्डरों से आग्रह किया कि वे अपनी परियोजनाओं के निबंधन के लिए सभी जरूरी दस्तावेजों एवं सूचनाओं के साथ आवेदन जमा करें, ताकि उसे मंजूरी दी जा सके। फिल्टर सिस्टम लागू, आवेदन में कमियों का पता लगेगा रेरा अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह ने बताया कि बड़े राज्यों की तुलना में बिहार में निबंधित होने वाली परियोजनाओं की संख्या कम है। हालांकि, इसके लिए प्राधिकरण ने कई मौके दिए, पर आवेदन के दौरान जरूरी दस्तावेज नहीं दिए गए। इसलिए आवेदन रद्द हो गए। अब इस समस्या के समाधान के लिए प्राधिकरण ने फिल्टर सिस्टम लागू किया है। इससे बिल्डरों को आवेदन के दौरान कमियों का पता चल जाएगा, जिससे वे समय पर दस्तावेज जमा कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग के लिए बिल्डर उपस्थित नहीं होते हैं, यह गंभीर चिंता का विषय है। निकायों के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत
राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में अब व्यावसायिक प्रोजेक्ट व कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए नई सुविधा दी जाएगी। इसके तहत अब 16 मीटर तक ऊंचाई (5 से 6 मंजिला भवन) वाले व्यावसायिक प्रोजेक्ट के नक्शे को आर्किटेक्ट ही पास कर सकेंगे। ये आर्किटेक्ट नगर विकास एवं आवास विभाग से सूचीबद्ध होंगे। अब तक व्यावसायिक प्रोजेक्ट का नक्शा नगर निगम ही पास करता था। जल्द ही यह नई व्यवस्था लागू होगी। इसे लेकर राज्य सरकार महीने भर में नई गाइडलाइन जारी करेगी। यही नहीं, बिहार बिल्डिंग बायलॉज में भी बदलाव प्रस्तावित है, ताकि भू-संपदा प्रक्षेत्र का तेजी से विकास हो सके। सोमवार को भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की ओर से बिल्डरों के प्रोजेक्ट निबंधन विषय पर आयोजित कार्यशाला में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने बताया कि मंत्रिमंडल को इस बारे में अनुमोदन चला गया है। इस पर मुहर लगने के बाद सूचीबद्ध आर्किटेक्ट को 16 मीटर ऊंचाई वाले व्यावसायिक भवन बनाने की अनुमति मिलेगी। साथ ही सूचीबद्ध व निबंधित बिल्डरों का ही नक्शा पास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 11 सैटेलाइट शहरों को बसाने की घोषणा की है, जिस पर काम किया जा रहा है। अब पूरे साल होगा कंपनी का निबंधन नगर विकास एवं आवास विभाग से सूचीबद्ध आर्किटेक्ट ही पास करेंगे नक्शा। प्रधान सचिव ने बताया कि अब प्रमोटर अपनी कंपनी का निबंधन नगर विकास एवं आवास विभाग में पूरे साल करा सकेंगे। निबंधन के समय उनसे कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। सोमवार से ही इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन के तहत राज्य की सभी शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित सूचनाएं एवं सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगी। निबंधन के 100 से अधिक आवेदन रद्द बिल्डरों को अपने प्रोजेक्ट का निबंधन कराना अब अनिवार्य है। रेरा ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। रेरा ने 100 से अधिक निबंधन के आवेदनों को रद्द कर दिया है, क्योंकि आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज नहीं थे। इधर, रेरा के अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह ने बिल्डरों से आग्रह किया कि वे अपनी परियोजनाओं के निबंधन के लिए सभी जरूरी दस्तावेजों एवं सूचनाओं के साथ आवेदन जमा करें, ताकि उसे मंजूरी दी जा सके। फिल्टर सिस्टम लागू, आवेदन में कमियों का पता लगेगा रेरा अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह ने बताया कि बड़े राज्यों की तुलना में बिहार में निबंधित होने वाली परियोजनाओं की संख्या कम है। हालांकि, इसके लिए प्राधिकरण ने कई मौके दिए, पर आवेदन के दौरान जरूरी दस्तावेज नहीं दिए गए। इसलिए आवेदन रद्द हो गए। अब इस समस्या के समाधान के लिए प्राधिकरण ने फिल्टर सिस्टम लागू किया है। इससे बिल्डरों को आवेदन के दौरान कमियों का पता चल जाएगा, जिससे वे समय पर दस्तावेज जमा कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग के लिए बिल्डर उपस्थित नहीं होते हैं, यह गंभीर चिंता का विषय है।


