कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान को लेकर नईदिल्ली में अहम बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को 15 से 30 दिन के भीतर सभी नियुक्तियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में बताया गया कि अभियान के तहत 14 राज्यों में 525 नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी की जा चुकी है। वहीं, 6 अन्य राज्यों में भी इस प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा कर दी गई है, जिसे संगठनात्मक मजबूती के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। एआईसीसी ने पीसीसी इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 15 दिन के अंदर जिला कमेटियों, 30 दिन में ब्लॉक कमेटियों और 60 दिन के अंदर मंडल, ग्राम पंचायत व बूथ स्तर की समितियों का गठन पूरा किया जाए। यह भी कहा गया कि संगठन में एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए आलाकमान से जो दिशा-निर्देश मिले हैं, उन्हें प्रदेश में पूरी गंभीरता से लागू किया जाएगा। निष्क्रिय पदाधिकारी हटाए जाएंगे और काम करने वाले विजनरी लोगों को नई टीम में जगह दी जाएगी। धान खरीदी पर 30 को चक्काजाम, मनरेगा पर 31 से कलेक्टोरेट में प्रदर्शन इधर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने धान खरीदी की तारीख बढ़ाने और मनरेगा का नाम बदले जाने के विरोध में धरना-प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। धान खरीदी की तारीख नहीं बढ़ाने के विरोध में कांग्रेस 30 जनवरी को चक्काजाम करेगी वहीं मनरेगा का नाम बदले जाने के विरोध में 31 जनवरी से 7 फरवरी तक सभी जिलों के कलेक्टोरेट में प्रदर्शन की योजना तैयार की गई है। मंगलवार को राजीव भवन में मनरेगा बचाओ संग्राम के लिए गठित प्रदेश स्तरीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत जिला, ब्लाक, मंडल स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि राज्य सरकार धान खरीदी की अंतिम तारीख 31 जनवरी रखी गई है, लेकिन 10 दिन पहले से ही टोकन जारी करना बंद कर दिया गया है। जिन किसानों को टोकन जारी हुआ है उनका धान भी नहीं खरीदा जा रहा है। बैठक में डॉ. चरणदास महंत, भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू, उमेश पटेल, मलकीत सिहं गैदू आदि उपस्थित थे। वहीं मनरेगा का नाम बदले जाने के विरोध में युकां 12 फरवरी को प्रदेश में युवा महापंचायत का आयोजन करने जा रही है। नाम के साथ गारंटी को भी खत्म करने का हो रहा विरोध
दरअसल केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (जी राम जी)’ (वीबी-जीरामजी) कर दिया है। इसमें महात्मा गांधी का नाम हटाने और योजना की कानूनी गारंटी कम होने के डर को लेकर विपक्ष विरोध कर रहा है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि नई योजना ग्रामीण रोजगार की बजाय राजनीतिक ब्रांडिंग पर केंद्रित है। विपक्ष इसे गांधीजी की विरासत को मिटाने का प्रयास मान रहा है, जबकि सरकार इसे आधुनिक और ग्रामीण विकास के लिए जरूरी बता रही है। विपक्ष का मानना है कि यह गांधीजी की ग्राम स्वराज की विचारधारा को व्यवस्थित रूप से हटाने की कोशिश है। रोजगार की कानूनी गारंटी और मजदूरी भुगतान की समयबद्धता कमजोर हो सकती है। नई व्यवस्था में केंद्र द्वारा फंडिंग कम की जा रही है, जिससे राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और काम प्रभावित होगा।


