निशांत की कुंडली में मुख्यमंत्री बनने का योग नहीं:पार्टी में लोग करेंगे परेशान, नीतीश की विरासत आगे बढ़ाने में बड़ी चुनौती, क्या कहते हैं ग्रह-नक्षत्र

निशांत की कुंडली में मुख्यमंत्री बनने का योग नहीं:पार्टी में लोग करेंगे परेशान, नीतीश की विरासत आगे बढ़ाने में बड़ी चुनौती, क्या कहते हैं ग्रह-नक्षत्र

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे। उनके बेटे निशांत कुमार ने जदयू पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। निशांत कुमार के ग्रह नक्षत्र के अनुसार, उनकी कुंडली में उपमुख्यमंत्री बनने के योग हैं। निशांत को पिता नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। अभी से लेकर मई 2027 तक उनके जीवन में उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। साल 2030 में विरोधी परेशान कर सकते हैं। अभी निशांत की कुंडली में राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है, जिस कारण वह कूटनीति का भी शिकार बन सकते हैं। उन्हें खास सावधानी बरतने की जरूरत है।…पढ़िए निशांत कुमार की कुंडली में क्या संयोग बन रहे हैं… निशांत कुमार के जदयू जॉइनिंग का मुहूर्त निशांत कुमार ने रविवार को 1:32 पर जेडीयू ज्वाइन किया था। उस वक्त चैत्र कृष्ण पंचमी में विशाखा नक्षत्र, चर मुहूर्त, लग्न की चन्द्रमा, मिथुन राशि की उपस्थिति थी। इस ग्रह-नक्षत्र और योग को ज्योतिष शास्त्र में स्थिर लग्न और शुभ मुहूर्त माना गया है। ऐसे संयोग में कोई भी शुभ कार्य करने से उसकी महत्ता और प्रतिफल अधिक समय तक मिलता है। इस मुहूर्त के दौरान किए गए काम में सफलता के आसार बढ़ जाते हैं। निशांत अपनी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ ही जनता के दिलों में अपने काम के बदौलत अमिट छाप छोड़ने में सफल रहेंगे। राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा, कूटनीति के बन सकते शिकार आचार्य राकेश झा ने बताया, ‘निशांत कुमार की कुंडली में वर्तमान में राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है। राहु इनके कुंडली में बारहवें भाव में स्थित है, जो इन्हें कूटनीति का शिकार बना सकता है। निशांत को अपने आसपास के लोगों से विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है’। उपमुख्यमंत्री का पद मिलना तय ‘मई 2027 तक इनको विशेष सावधानी रखनी होगी। इसके बाद गुरु की अंतर्दशा आएगा। ज्योतिष शास्त्र के विद्वान आचार्य राकेश झा ने इनके कुंडली के विश्लेषण कर बताया कि उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद मिलना तय है। वो इस पद की गरिमा और अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वाहन करेंगे। हालांकि, जब 2030 में चुनाव रहेगा तब राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा रहेगी। उस दौरान निशांत के चुनाव लड़ने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मगर फिर भी वह राजनीति में बने रहेंगे। निशांत की कुंडली धनु राशि की है, धनु राशि के स्वामी गुरु होते हैं। निशांत की कुंडली अपने पिता नीतीश कुमार से काफी मेल खाती है। निशांत की कुंडली में भी नीतीश की तरह ही राहु की महादशा चल रही है। निशांत के लग्न में चंद्रमा होने से यह धार्मिक रहा पर भी चलते हैं’। मार्च 2026 में निशांत के लम्बी यात्रा की भी प्रबल संभावना आचार्य राकेश झा ने बताया, निशांत को मित्र और हितैषियों का पूरा सहयोग रहेगा। इस अवधि में लम्बी यात्रा की भी प्रबल संभावना है। सामाजिक क्षेत्र में प्रचुर प्रतिष्ठा और सम्मान मिलेगा। मई महीने में लग्न कुंडली में, सूर्य भाव 10 में स्थित रहेगा। इससे निशांत के काफी व्यस्त रहने की संभावनाएं बन रही है। सब लिहाज से यह समय काफी संतोषप्रद सिद्ध होगा। जून में कुंडली चन्द्र ग्रह से प्रभावित रहेगी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती है। 2027 में केतु ग्रह के विराजमान होने से मन धार्मिक क्रियाकलापों की ओर झुका रहेगा इस साल के जुलाई से सितंबर तक निशांत की कुंडली में गुरू ग्रह भाव 7 में होगा। इससे अच्छी संभावनाएं बन रही है। बहु प्रतीक्षित यात्रा के आसार हैं। इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति होगी। मगर नवंबर-दिसम्बर में बुध ग्रह का प्रभाव पड़ेगा। निशांत के विरोधी प्रतिष्ठा बिगाड़ने की चेष्टा करेंगे। जनवरी 2027 में केतु ग्रह के विराजमान होने से मन धार्मिक क्रियाकलापों की ओर झुका रहेगा। तीर्थाटन पर जा सकते हैं। 10 साल तक निशांत की कुंडली में राहु की महादशा 2030 में इनके कुंडली में राहु में शनि विराजमान रहेगा। निशांत अपने पिता के अनुसरण पर चलेंगे। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए किसी भी तरह के चुनाव लड़ने का योग नहीं दिख रहा है। अभी से 10 साल तक निशांत की कुंडली में राहु की महादशा है। स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखेंगे तो समस्यायें उठ खड़ी होंगी। वरिष्ठ या सत्तावान व्यक्तियों के साथ संबंधों में सुधार आएगा। मंगल-गुरु की युति से मिलेगी प्रसिद्धि ज्योतिष शास्त्र में गुरु और मंगल की युति को अत्यंत शुभ, मंगलकारी और राजयोग के समान माना जाता है। जो साहस, ज्ञान और ऊर्जा का मिलन है। निशांत कुमार के कुंडली में यह संयोग उन्हें धार्मिक, सकारात्मक, कर्मठ, वैभवशाली और जनप्रिय बनाता है। गुरु का ज्ञान व मंगल का पराक्रम उन्हें उत्तम नेतृत्वकर्त्ता का योग बनाता हैं। इस युति की वजह से उन्हें राजनीति में प्रसिद्धि हासिल होगी। चन्द्रमा के प्रभाव से सादगी और भवनात्मक ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया, निशांत कुमार के जन्म कुंडली में लग्न भाव में चन्द्रमा विराजमान है, जो उनके जीवन को सादगी, भावनात्मक स्थिरता, सरलता पर प्रभावी है। चन्द्रमा मन का कारक ग्रह है। इसलिए निशांत कुमार में सकारात्मक सोच, सफलता और मनमौजी की भावना भी समाहित है। वहीं, अष्टम भाव का सूर्य इनको गहन रहस्यवादी, अपने कार्य में निपुणता, आध्यात्मिक जीवन और पिता के विरासत को संभालने वाला बनाता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे। उनके बेटे निशांत कुमार ने जदयू पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। निशांत कुमार के ग्रह नक्षत्र के अनुसार, उनकी कुंडली में उपमुख्यमंत्री बनने के योग हैं। निशांत को पिता नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। अभी से लेकर मई 2027 तक उनके जीवन में उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। साल 2030 में विरोधी परेशान कर सकते हैं। अभी निशांत की कुंडली में राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है, जिस कारण वह कूटनीति का भी शिकार बन सकते हैं। उन्हें खास सावधानी बरतने की जरूरत है।…पढ़िए निशांत कुमार की कुंडली में क्या संयोग बन रहे हैं… निशांत कुमार के जदयू जॉइनिंग का मुहूर्त निशांत कुमार ने रविवार को 1:32 पर जेडीयू ज्वाइन किया था। उस वक्त चैत्र कृष्ण पंचमी में विशाखा नक्षत्र, चर मुहूर्त, लग्न की चन्द्रमा, मिथुन राशि की उपस्थिति थी। इस ग्रह-नक्षत्र और योग को ज्योतिष शास्त्र में स्थिर लग्न और शुभ मुहूर्त माना गया है। ऐसे संयोग में कोई भी शुभ कार्य करने से उसकी महत्ता और प्रतिफल अधिक समय तक मिलता है। इस मुहूर्त के दौरान किए गए काम में सफलता के आसार बढ़ जाते हैं। निशांत अपनी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ ही जनता के दिलों में अपने काम के बदौलत अमिट छाप छोड़ने में सफल रहेंगे। राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा, कूटनीति के बन सकते शिकार आचार्य राकेश झा ने बताया, ‘निशांत कुमार की कुंडली में वर्तमान में राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है। राहु इनके कुंडली में बारहवें भाव में स्थित है, जो इन्हें कूटनीति का शिकार बना सकता है। निशांत को अपने आसपास के लोगों से विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है’। उपमुख्यमंत्री का पद मिलना तय ‘मई 2027 तक इनको विशेष सावधानी रखनी होगी। इसके बाद गुरु की अंतर्दशा आएगा। ज्योतिष शास्त्र के विद्वान आचार्य राकेश झा ने इनके कुंडली के विश्लेषण कर बताया कि उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद मिलना तय है। वो इस पद की गरिमा और अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वाहन करेंगे। हालांकि, जब 2030 में चुनाव रहेगा तब राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा रहेगी। उस दौरान निशांत के चुनाव लड़ने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मगर फिर भी वह राजनीति में बने रहेंगे। निशांत की कुंडली धनु राशि की है, धनु राशि के स्वामी गुरु होते हैं। निशांत की कुंडली अपने पिता नीतीश कुमार से काफी मेल खाती है। निशांत की कुंडली में भी नीतीश की तरह ही राहु की महादशा चल रही है। निशांत के लग्न में चंद्रमा होने से यह धार्मिक रहा पर भी चलते हैं’। मार्च 2026 में निशांत के लम्बी यात्रा की भी प्रबल संभावना आचार्य राकेश झा ने बताया, निशांत को मित्र और हितैषियों का पूरा सहयोग रहेगा। इस अवधि में लम्बी यात्रा की भी प्रबल संभावना है। सामाजिक क्षेत्र में प्रचुर प्रतिष्ठा और सम्मान मिलेगा। मई महीने में लग्न कुंडली में, सूर्य भाव 10 में स्थित रहेगा। इससे निशांत के काफी व्यस्त रहने की संभावनाएं बन रही है। सब लिहाज से यह समय काफी संतोषप्रद सिद्ध होगा। जून में कुंडली चन्द्र ग्रह से प्रभावित रहेगी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती है। 2027 में केतु ग्रह के विराजमान होने से मन धार्मिक क्रियाकलापों की ओर झुका रहेगा इस साल के जुलाई से सितंबर तक निशांत की कुंडली में गुरू ग्रह भाव 7 में होगा। इससे अच्छी संभावनाएं बन रही है। बहु प्रतीक्षित यात्रा के आसार हैं। इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति होगी। मगर नवंबर-दिसम्बर में बुध ग्रह का प्रभाव पड़ेगा। निशांत के विरोधी प्रतिष्ठा बिगाड़ने की चेष्टा करेंगे। जनवरी 2027 में केतु ग्रह के विराजमान होने से मन धार्मिक क्रियाकलापों की ओर झुका रहेगा। तीर्थाटन पर जा सकते हैं। 10 साल तक निशांत की कुंडली में राहु की महादशा 2030 में इनके कुंडली में राहु में शनि विराजमान रहेगा। निशांत अपने पिता के अनुसरण पर चलेंगे। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए किसी भी तरह के चुनाव लड़ने का योग नहीं दिख रहा है। अभी से 10 साल तक निशांत की कुंडली में राहु की महादशा है। स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखेंगे तो समस्यायें उठ खड़ी होंगी। वरिष्ठ या सत्तावान व्यक्तियों के साथ संबंधों में सुधार आएगा। मंगल-गुरु की युति से मिलेगी प्रसिद्धि ज्योतिष शास्त्र में गुरु और मंगल की युति को अत्यंत शुभ, मंगलकारी और राजयोग के समान माना जाता है। जो साहस, ज्ञान और ऊर्जा का मिलन है। निशांत कुमार के कुंडली में यह संयोग उन्हें धार्मिक, सकारात्मक, कर्मठ, वैभवशाली और जनप्रिय बनाता है। गुरु का ज्ञान व मंगल का पराक्रम उन्हें उत्तम नेतृत्वकर्त्ता का योग बनाता हैं। इस युति की वजह से उन्हें राजनीति में प्रसिद्धि हासिल होगी। चन्द्रमा के प्रभाव से सादगी और भवनात्मक ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया, निशांत कुमार के जन्म कुंडली में लग्न भाव में चन्द्रमा विराजमान है, जो उनके जीवन को सादगी, भावनात्मक स्थिरता, सरलता पर प्रभावी है। चन्द्रमा मन का कारक ग्रह है। इसलिए निशांत कुमार में सकारात्मक सोच, सफलता और मनमौजी की भावना भी समाहित है। वहीं, अष्टम भाव का सूर्य इनको गहन रहस्यवादी, अपने कार्य में निपुणता, आध्यात्मिक जीवन और पिता के विरासत को संभालने वाला बनाता है।  

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