आईटी सेक्टर में नौकरियों पर लगा ब्रेक, पिछले नौ महिनों में हुई मात्र 17 नई भर्तियां

आईटी सेक्टर में नौकरियों पर लगा ब्रेक, पिछले नौ महिनों में हुई मात्र 17 नई भर्तियां

पिछले दो दशकों से भारत का आईटी सेक्टर रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन रहा है। लेकिन क्लाइंट खर्च में कटौती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिलीवरी मॉडल ने इस तस्वीर को बदलना शुरू कर दिया है। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में देश की शीर्ष पांच आईटी कंपनियों ने नेट 17 कर्मचारी ही हायर किए हैं, जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की भारी छंटनी ने निर्णायक भूमिका निभाई है।

टीसीएस की छंटनी और सीधा असर

भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में लगभग 25,833 कर्मचारियों की छंटनी की। कंपनी ने पहले ही संकेत दिया था कि वह अपने कुल वर्कफोर्स का करीब 2 प्रतिशत घटाएगी। मिड लेवल और सीनियर लेवल पर हुई इस छंटनी ने पूरे सेक्टर के कुल कर्मचारियों के आंकड़ों को नकारात्मक दिशा में धकेल दिया है। टीसीएस की इस रणनीति ने यह साफ कर दिया कि अब ग्रोथ केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी में सुधार से हासिल की जाएगी।

5 बड़ी आईटी कंपनियों की स्थिति

टीसीएस के अलावा इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा ने मिलकर नौ महीनों में कुल 17 नई भर्तियां कीं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 17,764 थी। वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती तीन तिमाहियों में इंफोसिस ने करीब 13,456, एचसीएल ने 1,885, टेक महिंद्रा ने 752 और विप्रो ने 9,740 कर्मचारियों को जोड़ा, जो कुल मिलाकर 25,833 हुए। लेकिन टीसीएस की 25,816 कर्मचारियों की बड़ी कटौती से कुल आंकड़े 17 पर पहुंच गए, जिससे फ्रेशर्स और इंजीनियरिंग छात्रों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

एआई का प्रभाव

आईटी इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट किसी समय-समय पर आने वाली मंदी साइक्लिकल मंदी से ज्यादा एक बुनियादी बदलाव को दर्शाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डेटा आधारित टूल्स ने कम लोगों में ज्यादा काम संभव कर दिया है। क्लाइंट अब कम लागत और ज्यादा आउटपुट की मांग कर रहे हैं, जिससे कंपनियां हायरिंग के बजाय रीस्ट्रक्चरिंग पर जोर दे रही हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आईटी सेक्टर में भर्ती केवल स्किल के आधार पर होगी।

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