इंदौर में डेढ़ महीने पहले कर्नाटक की लेखिका को बच्चा चोर समझकर पीट दिया गया। लेखिका का कसूर सिर्फ इतना था कि वह ‘तीन तलाक’ पर किताब लिखने आई थी। पिटाई के बाद से लेखिका कर्नाटक से लगातार पुलिस को न्याय की गुहार लगा रही है, लेकिन अब तक उसे कुछ खास सफलता नहीं मिली। खजराना इलाके में 15 फरवरी को कर्नाटक की एक लेखिका परवीन के साथ हुई मारपीट के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। लेखिका का कहना है कि बच्चा चोर बताकर भीड़ ने उनकी पिटाई की थी और थाने में समझौता कराया गया। कर्नाटक लौटने के बाद से वह लगातार ऑनलाइन शिकायत कर रही हैं, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। भीड़ ने बच्चा चोर बताकर की थी मारपीट लेखिका परवीन के अनुसार, 15 फरवरी को सिकंदराबाद कॉलोनी में उनके साथ भीड़ ने मारपीट की। लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझकर घेर लिया और कपड़े खींचते हुए पीटा। घटना के बाद जब उन्होंने थाने में शिकायत की तो आरोपी पक्ष के लोगों ने एफआईआर दर्ज नहीं होने देने के लिए दबाव बनाया। आरोप है कि उनसे माफीनामा लिखवाया गया और मोबाइल से वीडियो डिलीट करवाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। 16 फरवरी को वह वापस कर्नाटक पहुंचीं और वहां से ऑनलाइन पुलिस से संपर्क किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ‘तीन तलाक’ पर किताब लिखने से जुड़ा विवाद
परवीन ने बताया कि नवंबर 2025 में शाहबानो से जुड़े चर्चित तीन तलाक प्रकरण की जानकारी उन्हें सोशल मीडिया से मिली थी। इस पर उन्होंने किताब लिखने का निर्णय लिया। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने शाहबानो के परिवार से संपर्क किया और करीब तीन माह तक बातचीत होती रही। इसके बाद 13 फरवरी को वह विमान से इंदौर आईं। 14 फरवरी को ओल्ड पलासिया में शाहबानो के परिवार के सदस्यों से मुलाकात हुई। आरोप है कि परिवार की जानकारी देने के लिए 25 लाख रुपए की मांग की गई। लेखिका ने मना किया तो व्हाट्सएप पर एक एग्रीमेंट भेजा गया, जिसमें 50 प्रतिशत मुनाफा देने की शर्त थी। इस पर लेखिका सहमत हो गईं। रिकॉर्डिंग के बाद शुरू हुआ विवाद 15 फरवरी को लेखिका परवीन शाहबानो के घर पहुंचीं और करीब दो घंटे बातचीत की रिकॉर्डिंग की। इसके बाद परिवार के लोगों ने एक एग्रीमेंट साइन करने को कहा। लेखिका का कहना है कि एग्रीमेंट पहले बताई गई शर्तों से अलग था, इसलिए उन्होंने साइन करने से इंकार कर दिया। इस पर वहां मौजूद एक युवक ने उनसे अपशब्द कहे और एग्रीमेंट फाड़कर उनके मुंह पर फेंक दिया। लेखिका के अनुसार, जब वह वहां से निकलकर ऑटो से जाने लगीं, तभी विवाद बढ़ गया और उनके साथ मारपीट की गई। इसी दौरान भीड़ ने उन्हें बच्चा चोर कहकर पीटना शुरू कर दिया। थाने में समझौते का आरोप लेखिका ने आरोप लगाया कि पुलिस मौके पर पहुंची और मेहमूद खान नामक पुलिसकर्मी उन्हें गाड़ी में बैठाकर थाने ले गए। वहां उनके दोनों मोबाइल अपने पास रख लिए गए। बाद में उन्हें परिवार से संपर्क करने दिया गया, जिसके बाद वकील आशीष दुबे थाने पहुंचे। लेखिका का आरोप है कि समझौते के एवज में 2 लाख रुपए की मांग की गई। इंकार करने पर बहस हुई और शाहबानो से की गई करीब दो घंटे की रिकॉर्डिंग डिलीट करवाई गई। इसके बाद उनसे लिखित माफीनामा लिया गया और आगे कोई कार्रवाई नहीं करने की बात लिखवाकर छोड़ दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद शिकायत लेखिका ने बताया कि अगले दिन कर्नाटक पहुंचने पर उन्हें पता चला कि मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है। इसके बाद उन्होंने खजराना पुलिस से संपर्क कर कार्रवाई की मांग की, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला। तब से वह लगातार इंदौर पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रही हैं। लेखिका ने बताया कि वह किताबें लिखने के साथ बच्चों को कोचिंग पढ़ाती हैं। उनके पिता सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हैं। उनका कहना है कि वह पिछले दो माह से लगातार पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर रही हैं, लेकिन मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


