दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग शनिवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार के गोपालगंज पहुंच गया है। गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड के बल्थरी चेक पोस्ट के पास शिवलिंग को विशेष ट्रक से लाया गया है। बिहार पहुंचने में 45 दिन का समय लगा। इसके लिए 21 नवंबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण के लिए रवाना किया गया था। ये तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार के गोपालगंज पहुंचा है। बिहार के पूर्वी चंपारण के चकिया में विराट रामायण मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसी मंदिर में महाबलीपुरम से लाए गए दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग को स्थापित किया जाएगा। दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की देखिए झलक… विशालकाय शिवलिंग को देखने के लिए उमड़ा सैलाब विशालकाय शिवलिंग जैसे ही गोपालगंज पर पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई अपने मोबाइल में इस विशाल शिवलिंग को कैद करना चाहता था। जगह-जगह लोग शिवलिंग का स्वागत और पूजा अर्चना के लिए खड़े रहे। शहर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सभी ने भक्ति भाव से शिवलिंग का स्वागत किया। भक्तों ने तिलक लगाकर आरती उतारी और अक्षत-फूल से पूजा अर्चना की। 5 जनवरी को पूर्वी चंपारण के लिए रवाना होगा काफिला आज यानी रविवार को गोपालगंज में रुकने के बाद कल सोमवार यानी 5 जनवरी को शिवलिंग गोपालगंज के बलथरी के लिए रवाना होगा। जहां से शिवलिंग को पूर्वी चंपारण स्थित कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया के विराट रामायण मंदिर ले जाया जाएगा। सबसे पहले बलथरी में सुबह 11 बजे भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर विशेष तैयारी की गई है। प्रवेश द्वार भी बनाया गया है। यहां पर शिवलिंग का पूजा-अर्चना, आरती की व्यवस्था की गई है। चैनपट्टी में भी शिवलिंग का स्वागत किया जाएगा। यहां काफी संख्या में भक्त स्वागत के लिए जुटेंगे। एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बना शिवलिंग शिवलिंग निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक विनायक वेंकटरमण के अनुसार, इस शिवलिंग के निर्माण पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यह विशाल शिवलिंग एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में बीते 10 साल से विशाल शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा था। शिवलिंग के मुख्य शिल्पकार लोकनाथ हैं, उनकी टीम ने इसे तराशा है। सड़क मार्ग से इसे 21 नवंबर को महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया था। शिवलिंग को रवाना करने के पहले पूजा-पाठ की गई थी, जिसमें स्थानीय गांव के लोग भी शामिल हुए थे। 17 जनवरी को मंदिर में स्थापित होगा शिवलिंग गोपालगंज से शिवलिंग खजुरिया, हुसैनी होते हुए केसरिया पहुंचेगा, जहां 17 जनवरी को इसे स्थापित करने की तैयारी चल रही है। उस दिन शिवलिंग की पीठ पूजा होगी। हालांकि, शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा बाद में होगी। विराट रामायण मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ललन सिंह के मुताबिक, जनवरी-फरवरी 2026 में शिवलिंग को विधिवत स्थापित किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 33 फीट का यह शिवलिंग विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर की भव्यता को और बढ़ाएगा। अंतिम चरण में मंदिर का निर्माण कार्य रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। विराट रामायण मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग, गर्भ गृह का पाइलिंग, आदि का काम पूरा हो गया है। आकार में यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी। निर्धारित समय में निर्माण पूरा करने की तैयारी बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद और महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सचिव सायन कुणाल के मुताबिक, मंदिर निर्माण काम को समय पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं, ताकि बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर स्थापित हो सके। साल 2023 के 20 जून को शिलान्यास के बाद विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। पटना से इस मंदिर की दूरी लगभग में 120 किलोमीटर है। विराट रामायण मंदिर में चार आश्रम होंगे। चकिया का विराट रामायण मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण हो जाने पर यह विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर होगा। दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग शनिवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार के गोपालगंज पहुंच गया है। गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड के बल्थरी चेक पोस्ट के पास शिवलिंग को विशेष ट्रक से लाया गया है। बिहार पहुंचने में 45 दिन का समय लगा। इसके लिए 21 नवंबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण के लिए रवाना किया गया था। ये तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार के गोपालगंज पहुंचा है। बिहार के पूर्वी चंपारण के चकिया में विराट रामायण मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसी मंदिर में महाबलीपुरम से लाए गए दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग को स्थापित किया जाएगा। दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की देखिए झलक… विशालकाय शिवलिंग को देखने के लिए उमड़ा सैलाब विशालकाय शिवलिंग जैसे ही गोपालगंज पर पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई अपने मोबाइल में इस विशाल शिवलिंग को कैद करना चाहता था। जगह-जगह लोग शिवलिंग का स्वागत और पूजा अर्चना के लिए खड़े रहे। शहर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सभी ने भक्ति भाव से शिवलिंग का स्वागत किया। भक्तों ने तिलक लगाकर आरती उतारी और अक्षत-फूल से पूजा अर्चना की। 5 जनवरी को पूर्वी चंपारण के लिए रवाना होगा काफिला आज यानी रविवार को गोपालगंज में रुकने के बाद कल सोमवार यानी 5 जनवरी को शिवलिंग गोपालगंज के बलथरी के लिए रवाना होगा। जहां से शिवलिंग को पूर्वी चंपारण स्थित कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया के विराट रामायण मंदिर ले जाया जाएगा। सबसे पहले बलथरी में सुबह 11 बजे भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर विशेष तैयारी की गई है। प्रवेश द्वार भी बनाया गया है। यहां पर शिवलिंग का पूजा-अर्चना, आरती की व्यवस्था की गई है। चैनपट्टी में भी शिवलिंग का स्वागत किया जाएगा। यहां काफी संख्या में भक्त स्वागत के लिए जुटेंगे। एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बना शिवलिंग शिवलिंग निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक विनायक वेंकटरमण के अनुसार, इस शिवलिंग के निर्माण पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यह विशाल शिवलिंग एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में बीते 10 साल से विशाल शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा था। शिवलिंग के मुख्य शिल्पकार लोकनाथ हैं, उनकी टीम ने इसे तराशा है। सड़क मार्ग से इसे 21 नवंबर को महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया था। शिवलिंग को रवाना करने के पहले पूजा-पाठ की गई थी, जिसमें स्थानीय गांव के लोग भी शामिल हुए थे। 17 जनवरी को मंदिर में स्थापित होगा शिवलिंग गोपालगंज से शिवलिंग खजुरिया, हुसैनी होते हुए केसरिया पहुंचेगा, जहां 17 जनवरी को इसे स्थापित करने की तैयारी चल रही है। उस दिन शिवलिंग की पीठ पूजा होगी। हालांकि, शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा बाद में होगी। विराट रामायण मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ललन सिंह के मुताबिक, जनवरी-फरवरी 2026 में शिवलिंग को विधिवत स्थापित किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 33 फीट का यह शिवलिंग विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर की भव्यता को और बढ़ाएगा। अंतिम चरण में मंदिर का निर्माण कार्य रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। विराट रामायण मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग, गर्भ गृह का पाइलिंग, आदि का काम पूरा हो गया है। आकार में यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी। निर्धारित समय में निर्माण पूरा करने की तैयारी बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद और महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सचिव सायन कुणाल के मुताबिक, मंदिर निर्माण काम को समय पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं, ताकि बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर स्थापित हो सके। साल 2023 के 20 जून को शिलान्यास के बाद विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। पटना से इस मंदिर की दूरी लगभग में 120 किलोमीटर है। विराट रामायण मंदिर में चार आश्रम होंगे। चकिया का विराट रामायण मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण हो जाने पर यह विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर होगा।


