राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने तेलंगाना के कंदकुर्ति में ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का उद्घाटन किया। यह स्मारक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की स्मृति और उनके विचारों से प्रेरणा लेने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इस मौके पर भागवत ने कहा कि भारत माता को दास्य भाव से मुक्त करवाने के लिए संघ की स्थापना हुई। कंदकुर्ति स्थान से भी माता को दास्य भाव से मुक्त करवाने की कथा जुड़ी है।
मोहन भागवत ने पौराणिक कथा का जिक्र किया
RSS प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने कहा कि कंदकुर्ति प्रेरणा की भूमि है, जहां से डॉ. हेडगेवार के जीवन और उनके राष्ट्रनिर्माण के संकल्प की स्फूर्ति जुड़ी है। लगभग 32 वर्ष पहले इस स्मारक के निर्माण का संकल्प लिया गया था, जो अब साकार रूप ले रहा है। भागवत ने पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए गरुड़ और उनकी माता विनता की कथा को राष्ट्रसेवा के आदर्श से जोड़ा।
मोहन भागवत ने कहा कि जिस प्रकार कंदकुर्ति में ही गरुड़ ने अपनी माता की मुक्ति के लिए अमृत प्राप्त करके भी उसका त्याग किया, उसी प्रकार डॉ. हेडगेवार का जीवन भी पूर्णतः निस्वार्थ राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा और वह भारत माता की मुक्ति के लिए व्याकुल रहे। भागवत ने कहा कि डॉक्टर हेडगेवार के मन में यह दृढ़ था कि हिंदुत्व को आधार बनाकर हिंदू समाज को एकजुट करना, उसे निर्भय, बल संपन्न, शील संपन्न और ध्येय निष्ठ बनाना ही वह मूल काम है, जिसे यदि नहीं किया गया तो हमें स्वतंत्रता के लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ेगा। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई, जो आज अपने शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य किसी के विरोध में नहीं
मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का कार्य किसी के विरोध में नहीं, बल्कि समाज को एकजुट कर राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए है। नवनिर्मित ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक सजीव प्रेरणा केंद्र है। यहां आने वाले लोग देशभक्ति, निस्वार्थ सेवा और समाज के प्रति कर्तव्यबोध की प्रेरणा लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य करेंगे। समारोह में संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, स्वयंसेवक और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


