“लंच का समय था। लोग खाना खाकर आराम करने के लिए इधर-उधर लेट गए थे। कुछ लोग बाहर भी चले गए थे। तभी अचानक ‘झर-झर’ की आवाज आने लगी, जैसे अमोनिया गैस लीक हो रही हो। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, अचानक तेज धमाका हुआ और मकान का पक्का हिस्सा भरभराकर गिर गया।” ये बातें प्रयागराज के आदर्श कोल्ड स्टोरेज में हुए हादसे के चश्मदीद नंदन कुमार ने बताईं। नंदन ने कहा, “जो अंदर थे, वे भाग नहीं पाए। उनके ऊपर मलबा गिर गया। चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया था। हम लोग किसी तरह जान बचाकर भागे।” प्रयागराज के कोल्ड स्टोरेज हादसे के बाद 600 किमी दूर सहरसा के एक छोटे से गांव में मातम पसरा है। घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम सहरसा मुख्यालय से 20 किमी दूर मृतकों के गांव पहुंची तो देखा गोद में बेटे को लेकर एक महिला अपने पति को मुखाग्नि दे रही थी। ग्रामीणों ने बताया, ज्योतिष 20 दिन पहले ही बेटे की छट्ठी करके कमाने निकला था पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले घटना से जुड़ी 4 तस्वीरें देखिए… एक महीने के बेटे-पत्नी ने दी मुखाग्नि दैनिक भास्कर की टीम बुधवार को हादसे में जान गंवाने वाले तीन मजदूरों ज्योतिष सादा (28), सनोज चौधरी (35) और मशीन्द्र सादा (20) के गांव पहुंची। तीनों का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। मृतक सलखुआ प्रखंड की गौरदहा पंचायत के बलियार मुसहरी, वार्ड नंबर सात के निवासी थे। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के 11 मजदूर अब भी घटना स्थल के आसपास के अस्पतालों में इलाजरत हैं। टीम सबसे पहले ज्योतिष सादा के घर पहुंची। उनकी पत्नी रीता देवी सफेद साड़ी पहने गोद में बेटे को गोद में लिए थीं। उनसे बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी। पति की मौत ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। इस हादसे का सबसे मार्मिक दृश्य ज्योतिष सादा के अंतिम संस्कार के दौरान देखने को मिला। रीता देवी ने अपने दूधमुंहे बेटे को गोद में लेकर पति को मुखाग्नि दे रही थीं। घर में कोई बड़ा पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था, इसलिए यह जिम्मेदारी भी उन्हें ही निभानी पड़ी। ज्योतिष की मामी उषा देवी ने बताया, “सिर्फ एक महीने का उनका बेटा, जिसे दुनिया की समझ तक नहीं है, उसी के हाथों पिता की चिता को मुखाग्नि दिलाई गई।” एक घंटे पहले हुई थी आखिरी बातचीत उषा देवी आगे बताती हैं, “हादसे से महज एक घंटे पहले ज्योतिष ने अपनी पत्नी रीता से फोन पर बात की थी। ज्योतिष ने कहा था कि बच्चे की तबीयत ठीक नहीं है, तुम उसे पास के क्लीनिक में दिखा दो। मैं डॉक्टर के नंबर पर पैसे भेज दूंगा।रीता बच्चे को डॉक्टर से दिखाकर घर लौटीं और पति को फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ आने लगा। कुछ ही देर बाद गांव में खबर पहुंची कि प्रयागराज में कोल्ड स्टोरेज की इमारत गिर गई है, जिसमें काम कर रहे कई मजदूर मलबे में दब गए हैं। कुछ देर बाद पता चला कि ज्योतिष अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह खबर सुनते ही रीता बेहोश हो गईं।” कर्ज चुकाने के लिए कमाने गया था उषा देवी बताती हैं, “ज्योतिष सादा की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। उसके माता-पिता की बहुत पहले मौत हो गई थी। अभी घर में सिर्फ पत्नी रीता देवी, ढाई साल की बेटी सोन परी और एक महीने का बेटा दीवान सादा है। दोनों बच्चों को लेकर महिला अकेले गांव में रहती थी। वहीं, पति मजदूरी कर घर चलाता था।” उन्होंने बताया, “रीता देवी प्रेग्नेंट थी तो बलवीर यादव से पैसे उधार लिए थे। उसने कहा था कि मजदूरी करके कर्ज चुका देगा। इसी उम्मीद में वह बेटे की छट्टी के बाद प्रयागराज कमाने गया था, जहां उसे महीने में 10 से 12 हजार रुपए मिलते थे, लेकिन किसे पता था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी होगा। अब उसके पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चे रह गए हैं।” सनोज चौधरी के तीन बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़ हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे मजदूर सनोज चौधरी के घर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। उनके परिवार के लोग बताते हैं, तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा 12 साल का शिवम है, दूसरा बेटा 6 साल का आयुष कुमार है और एक तीन साल की बेटी काजल है। बच्चे बार-बार पूछ रहे हैं कि पापा कब आएंगे, लेकिन किसी के पास जवाब नहीं है। परिवार के सामने अब बच्चों की पढ़ाई और परवरिश की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सनोज को आयुष ने मुखाग्नि दी थी। पहले पति गया, अब बेटा भी चला गया तीसरे मृतक मशीन्द्र सादा की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है। 20 साल का मशीन्द्र अपने 6 भाइयों में तीसरे नंबर पर था। परिवार की जिम्मेदारियां उसके कंधों पर थीं। उसकी मां फूलों देवी बताती हैं, उनके पति की मौत को अभी एक साल भी नहीं हुआ था और अब उनका बेटा भी उन्हें छोड़कर चला गया। फूलों देवी की आवाज भर्रा जाती है जब वह कहती हैं, मेरा बेटा ही घर चलाता था। अब मैं दूसरों के घर का बर्तन मांजकर बच्चों को पालूंगी। मेरे दोनों बड़े बेटे कुछ नहीं करते हैं। मशीन्द्र ही पूरा घर चलाता था। कांपते हाथों से छोटे भाई ने दी मुखाग्नि मशीन्द्र का अंतिम संस्कार उसके 10 साल के छोटे भाई सरोज ने किया। इतने छोटे बच्चे के लिए यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी। उसके कांपते हाथ और बहते आंसू वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर रहे थे। कोसी के कटाव से उजड़ा घर, आज तक नहीं मिला सहारा इन तीनों परिवारों की कहानी सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही बदहाली की कहानी है। साल 1987 में कोसी नदी के कटाव ने इनका गांव उजाड़ दिया था। इसके बाद ये लोग पूर्वी कोसी तटबंध के किनारे आकर बस गए। आज भी करीब 200 दलित परिवार वहां अस्थायी रूप से रह रहे हैं। उनके पास अपनी जमीन नहीं है, इसलिए वे तिरपाल और झोपड़ियों में जीवन यापन कर रहे हैं। बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उन्हें नसीब नहीं हैं। घर में नहीं है बुनियादी सुविधाएं, नहीं मिला सरकारी योजनाओं का लाभ इन परिवारों को अब तक सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। जमीन नहीं होने के कारण उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य योजनाओं का फायदा नहीं मिल सका। कई बार प्रशासन से जमीन देने की मांग की गई, लेकिन हर बार मामला टल गया। मजदूरी ही एकमात्र विकल्प रोजगार के अभाव में यहां के लोग दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। वे 3-4 महीने एक जगह काम करते हैं और फिर दूसरी जगह चले जाते हैं। महीने में 8 से 12 हजार रुपए कमाकर किसी तरह परिवार चलाते हैं। इसी मजबूरी में ये मजदूर प्रयागराज गए थे, जहां यह हादसा हो गया। कैसे हुआ हादसा, चश्मदीदों ने बताया भयावह मंजर 23 मार्च की दोपहर को आदर्श कोल्ड स्टोरेज में अचानक तेज धमाका हुआ और पूरी इमारत ढह गई। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि आवाज इतनी तेज थी मानो बम फट गया हो। चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और कुछ ही सेकंड में सब कुछ मलबे में तब्दील हो गया। लंच टाइम बना कई लोगों के लिए जीवनदान कोल्ड स्टोरेज में काम करने वाले इंदल का कहना है कि वहां करीब 110 लोग काम कर रहे थे। लंच हुआ तो बहुत से मजदूर इधर-उधर हो गए। तेज आवाज आई और फिर जैसे ही छत गिरी, अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग तो जान बचाकर भागने में सफल रहे। लेकिन, कई बदनसीब मलबे के नीचे ही दब गए। लंच का टाइम न होता तो बहुत लोग मरते। रेस्क्यू ऑपरेशन और गिरफ्तारियां हादसे के बाद तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। मलबे को हटाकर कई लोगों को बाहर निकाला गया। अब तक चार लोगों के शव निकाले जा चुके हैं और 17 घायल अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने इस मामले में कोल्ड स्टोरेज के मालिक अंसार अहमद, उसके बेटे मंजर और भतीजे अलाउद्दीन को गिरफ्तार किया है। उनके पास से वाहन और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। सुल्तानपुर का ठेकेदार बिहार से लाता है मजदूर कोल्ड स्टोरेज में सुल्तानपुर का रहने वाला बलवंत सिंह उर्फ बलवीर ठेकेदार है। वही बिहार से मजदूर लाता है। पूर्व मंत्री अंसार पहलवान के कोल्ड स्टोरेज में भी ज्यादातर मजदूर बलवंत ही लाया था। पहलवान के दूसरे कोल्ड स्टोरेज में भी बलवंत ही मजदूरों की सप्लाई करता है। कोल्ड स्टोरेज में मैनेजर का काम राम मिलन देख रहा था। कोल्ड स्टोरेज मालिक सपा नेता अरेस्ट पुलिस ने कोल्ड स्टोरेज हादसे में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। कोल्ड स्टोरेज के मालिक अंसार अहमद, उसके बेटे मंजर और भतीजे अलाउद्दीन को गिरफ्तार किया गया है। मंजूर अहमद (32) और डॉ. मंसूर उर्फ मोटू। मंसूर अयोध्या में सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं। मंजूर और उसका चचेरा भाई उस्मान कोल्ड स्टोरेज का काम देखते हैं। वह साल- 2002 से 2007 और 2012 से 2017 तक सपा से विधायक रहे हैं। पहले नवाबगंज विधानसभा सीट से जीते परिसीमन आयोग ने नवाबगंज विधानसभा सीट 2008 में खत्म कर दी। इसके बाद फाफामऊ विधानसभा सीट से साल-2012 में जीते। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में पशुपालन मंत्री रह चुके हैं। 27 साल पुराने कोल्ड स्टोरेज में 3 बिल्डिंग अंसार अहमद की आदर्श कोल्ड स्टोरेज नाम से यह बिल्डिंग फाफामऊ इलाके में है। 27 साल पुराने इस कोल्ड स्टोरेज में 3 बिल्डिंग हैं। करीब 10 हजार स्क्वायर फीट की एक बिल्डिंग ढही है। पीएम मोदी और सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है। “लंच का समय था। लोग खाना खाकर आराम करने के लिए इधर-उधर लेट गए थे। कुछ लोग बाहर भी चले गए थे। तभी अचानक ‘झर-झर’ की आवाज आने लगी, जैसे अमोनिया गैस लीक हो रही हो। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, अचानक तेज धमाका हुआ और मकान का पक्का हिस्सा भरभराकर गिर गया।” ये बातें प्रयागराज के आदर्श कोल्ड स्टोरेज में हुए हादसे के चश्मदीद नंदन कुमार ने बताईं। नंदन ने कहा, “जो अंदर थे, वे भाग नहीं पाए। उनके ऊपर मलबा गिर गया। चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया था। हम लोग किसी तरह जान बचाकर भागे।” प्रयागराज के कोल्ड स्टोरेज हादसे के बाद 600 किमी दूर सहरसा के एक छोटे से गांव में मातम पसरा है। घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम सहरसा मुख्यालय से 20 किमी दूर मृतकों के गांव पहुंची तो देखा गोद में बेटे को लेकर एक महिला अपने पति को मुखाग्नि दे रही थी। ग्रामीणों ने बताया, ज्योतिष 20 दिन पहले ही बेटे की छट्ठी करके कमाने निकला था पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले घटना से जुड़ी 4 तस्वीरें देखिए… एक महीने के बेटे-पत्नी ने दी मुखाग्नि दैनिक भास्कर की टीम बुधवार को हादसे में जान गंवाने वाले तीन मजदूरों ज्योतिष सादा (28), सनोज चौधरी (35) और मशीन्द्र सादा (20) के गांव पहुंची। तीनों का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। मृतक सलखुआ प्रखंड की गौरदहा पंचायत के बलियार मुसहरी, वार्ड नंबर सात के निवासी थे। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के 11 मजदूर अब भी घटना स्थल के आसपास के अस्पतालों में इलाजरत हैं। टीम सबसे पहले ज्योतिष सादा के घर पहुंची। उनकी पत्नी रीता देवी सफेद साड़ी पहने गोद में बेटे को गोद में लिए थीं। उनसे बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी। पति की मौत ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। इस हादसे का सबसे मार्मिक दृश्य ज्योतिष सादा के अंतिम संस्कार के दौरान देखने को मिला। रीता देवी ने अपने दूधमुंहे बेटे को गोद में लेकर पति को मुखाग्नि दे रही थीं। घर में कोई बड़ा पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था, इसलिए यह जिम्मेदारी भी उन्हें ही निभानी पड़ी। ज्योतिष की मामी उषा देवी ने बताया, “सिर्फ एक महीने का उनका बेटा, जिसे दुनिया की समझ तक नहीं है, उसी के हाथों पिता की चिता को मुखाग्नि दिलाई गई।” एक घंटे पहले हुई थी आखिरी बातचीत उषा देवी आगे बताती हैं, “हादसे से महज एक घंटे पहले ज्योतिष ने अपनी पत्नी रीता से फोन पर बात की थी। ज्योतिष ने कहा था कि बच्चे की तबीयत ठीक नहीं है, तुम उसे पास के क्लीनिक में दिखा दो। मैं डॉक्टर के नंबर पर पैसे भेज दूंगा।रीता बच्चे को डॉक्टर से दिखाकर घर लौटीं और पति को फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ आने लगा। कुछ ही देर बाद गांव में खबर पहुंची कि प्रयागराज में कोल्ड स्टोरेज की इमारत गिर गई है, जिसमें काम कर रहे कई मजदूर मलबे में दब गए हैं। कुछ देर बाद पता चला कि ज्योतिष अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह खबर सुनते ही रीता बेहोश हो गईं।” कर्ज चुकाने के लिए कमाने गया था उषा देवी बताती हैं, “ज्योतिष सादा की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। उसके माता-पिता की बहुत पहले मौत हो गई थी। अभी घर में सिर्फ पत्नी रीता देवी, ढाई साल की बेटी सोन परी और एक महीने का बेटा दीवान सादा है। दोनों बच्चों को लेकर महिला अकेले गांव में रहती थी। वहीं, पति मजदूरी कर घर चलाता था।” उन्होंने बताया, “रीता देवी प्रेग्नेंट थी तो बलवीर यादव से पैसे उधार लिए थे। उसने कहा था कि मजदूरी करके कर्ज चुका देगा। इसी उम्मीद में वह बेटे की छट्टी के बाद प्रयागराज कमाने गया था, जहां उसे महीने में 10 से 12 हजार रुपए मिलते थे, लेकिन किसे पता था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी होगा। अब उसके पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चे रह गए हैं।” सनोज चौधरी के तीन बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़ हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे मजदूर सनोज चौधरी के घर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। उनके परिवार के लोग बताते हैं, तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा 12 साल का शिवम है, दूसरा बेटा 6 साल का आयुष कुमार है और एक तीन साल की बेटी काजल है। बच्चे बार-बार पूछ रहे हैं कि पापा कब आएंगे, लेकिन किसी के पास जवाब नहीं है। परिवार के सामने अब बच्चों की पढ़ाई और परवरिश की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सनोज को आयुष ने मुखाग्नि दी थी। पहले पति गया, अब बेटा भी चला गया तीसरे मृतक मशीन्द्र सादा की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है। 20 साल का मशीन्द्र अपने 6 भाइयों में तीसरे नंबर पर था। परिवार की जिम्मेदारियां उसके कंधों पर थीं। उसकी मां फूलों देवी बताती हैं, उनके पति की मौत को अभी एक साल भी नहीं हुआ था और अब उनका बेटा भी उन्हें छोड़कर चला गया। फूलों देवी की आवाज भर्रा जाती है जब वह कहती हैं, मेरा बेटा ही घर चलाता था। अब मैं दूसरों के घर का बर्तन मांजकर बच्चों को पालूंगी। मेरे दोनों बड़े बेटे कुछ नहीं करते हैं। मशीन्द्र ही पूरा घर चलाता था। कांपते हाथों से छोटे भाई ने दी मुखाग्नि मशीन्द्र का अंतिम संस्कार उसके 10 साल के छोटे भाई सरोज ने किया। इतने छोटे बच्चे के लिए यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी। उसके कांपते हाथ और बहते आंसू वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर रहे थे। कोसी के कटाव से उजड़ा घर, आज तक नहीं मिला सहारा इन तीनों परिवारों की कहानी सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही बदहाली की कहानी है। साल 1987 में कोसी नदी के कटाव ने इनका गांव उजाड़ दिया था। इसके बाद ये लोग पूर्वी कोसी तटबंध के किनारे आकर बस गए। आज भी करीब 200 दलित परिवार वहां अस्थायी रूप से रह रहे हैं। उनके पास अपनी जमीन नहीं है, इसलिए वे तिरपाल और झोपड़ियों में जीवन यापन कर रहे हैं। बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उन्हें नसीब नहीं हैं। घर में नहीं है बुनियादी सुविधाएं, नहीं मिला सरकारी योजनाओं का लाभ इन परिवारों को अब तक सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। जमीन नहीं होने के कारण उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य योजनाओं का फायदा नहीं मिल सका। कई बार प्रशासन से जमीन देने की मांग की गई, लेकिन हर बार मामला टल गया। मजदूरी ही एकमात्र विकल्प रोजगार के अभाव में यहां के लोग दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। वे 3-4 महीने एक जगह काम करते हैं और फिर दूसरी जगह चले जाते हैं। महीने में 8 से 12 हजार रुपए कमाकर किसी तरह परिवार चलाते हैं। इसी मजबूरी में ये मजदूर प्रयागराज गए थे, जहां यह हादसा हो गया। कैसे हुआ हादसा, चश्मदीदों ने बताया भयावह मंजर 23 मार्च की दोपहर को आदर्श कोल्ड स्टोरेज में अचानक तेज धमाका हुआ और पूरी इमारत ढह गई। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि आवाज इतनी तेज थी मानो बम फट गया हो। चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और कुछ ही सेकंड में सब कुछ मलबे में तब्दील हो गया। लंच टाइम बना कई लोगों के लिए जीवनदान कोल्ड स्टोरेज में काम करने वाले इंदल का कहना है कि वहां करीब 110 लोग काम कर रहे थे। लंच हुआ तो बहुत से मजदूर इधर-उधर हो गए। तेज आवाज आई और फिर जैसे ही छत गिरी, अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग तो जान बचाकर भागने में सफल रहे। लेकिन, कई बदनसीब मलबे के नीचे ही दब गए। लंच का टाइम न होता तो बहुत लोग मरते। रेस्क्यू ऑपरेशन और गिरफ्तारियां हादसे के बाद तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। मलबे को हटाकर कई लोगों को बाहर निकाला गया। अब तक चार लोगों के शव निकाले जा चुके हैं और 17 घायल अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने इस मामले में कोल्ड स्टोरेज के मालिक अंसार अहमद, उसके बेटे मंजर और भतीजे अलाउद्दीन को गिरफ्तार किया है। उनके पास से वाहन और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। सुल्तानपुर का ठेकेदार बिहार से लाता है मजदूर कोल्ड स्टोरेज में सुल्तानपुर का रहने वाला बलवंत सिंह उर्फ बलवीर ठेकेदार है। वही बिहार से मजदूर लाता है। पूर्व मंत्री अंसार पहलवान के कोल्ड स्टोरेज में भी ज्यादातर मजदूर बलवंत ही लाया था। पहलवान के दूसरे कोल्ड स्टोरेज में भी बलवंत ही मजदूरों की सप्लाई करता है। कोल्ड स्टोरेज में मैनेजर का काम राम मिलन देख रहा था। कोल्ड स्टोरेज मालिक सपा नेता अरेस्ट पुलिस ने कोल्ड स्टोरेज हादसे में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। कोल्ड स्टोरेज के मालिक अंसार अहमद, उसके बेटे मंजर और भतीजे अलाउद्दीन को गिरफ्तार किया गया है। मंजूर अहमद (32) और डॉ. मंसूर उर्फ मोटू। मंसूर अयोध्या में सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं। मंजूर और उसका चचेरा भाई उस्मान कोल्ड स्टोरेज का काम देखते हैं। वह साल- 2002 से 2007 और 2012 से 2017 तक सपा से विधायक रहे हैं। पहले नवाबगंज विधानसभा सीट से जीते परिसीमन आयोग ने नवाबगंज विधानसभा सीट 2008 में खत्म कर दी। इसके बाद फाफामऊ विधानसभा सीट से साल-2012 में जीते। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में पशुपालन मंत्री रह चुके हैं। 27 साल पुराने कोल्ड स्टोरेज में 3 बिल्डिंग अंसार अहमद की आदर्श कोल्ड स्टोरेज नाम से यह बिल्डिंग फाफामऊ इलाके में है। 27 साल पुराने इस कोल्ड स्टोरेज में 3 बिल्डिंग हैं। करीब 10 हजार स्क्वायर फीट की एक बिल्डिंग ढही है। पीएम मोदी और सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है।


