बूंदी जिले के गेंडोली थाना क्षेत्र स्थित भैंस खेड़ा गांव के एक सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा टल गया। बुधवार को स्कूल का बरामदा अचानक ढह गया। गनीमत रही कि उस समय सभी बच्चे धूप सेंकने के लिए बाहर बैठे थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। ग्रामीणों और सरपंच ने बताया कि यदि बच्चे बरामदे में होते तो यह एक गंभीर हादसा हो सकता था। इस घटना ने स्कूल भवन की सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल की इमारत के दो कमरे पहले से ही जर्जर अवस्था में थे, जिससे खतरे का स्पष्ट संकेत मिल रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि कलेक्टर कार्यालय से मरम्मत के लिए 2 लाख रुपये की राशि जारी होने के बावजूद, मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया था। इसे एक गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है। अधिकारियों द्वारा इस जर्जर इमारत को खतरनाक घोषित न करना भी सवालों के घेरे में है। इसके अतिरिक्त, घटना के समय स्कूल में पांच शिक्षकों में से केवल दो शिक्षक की उपस्थिति ने शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस घटना के बाद उच्च अधिकारियों ने मौके का दौरा किया और जांच के आदेश दिए हैं। अब आवश्यकता है कि पूरे जिले के सभी सरकारी स्कूल भवनों की तत्काल सुरक्षा जांच की जाए। जर्जर इमारतों को तुरंत बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। मरम्मत राशि के दुरुपयोग और काम में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। यह घटना एक चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सिस्टम में सुधार और जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


