मैदान पर अंपायर ने उंगली उठाई, लेकिन DRS ने बदला फैसला, जानिए कैसे काम करती है ये तकनीक

मैदान पर अंपायर ने उंगली उठाई, लेकिन DRS ने बदला फैसला, जानिए कैसे काम करती है ये तकनीक

Drs In Cricket: क्रिकेट में कई बार ऐसा होता है जब अंपायर के फैसले से खिलाड़ी संतुष्ट नहीं होते हैं। ऐसे समय में एक सिस्टम मैदान पर उतरता है जिसे DRS (Decision Review System) कहते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर DRS काम कैसे करता है? Hawk-Eye और UltraEdge जैसी तकनीकें कैसे मिनटों में बता देती है कि बल्लेबाज आउट है या नहीं?

DRS Technology In Cricket: क्या है

DRS को International (अंतरराष्ट्रीय) क्रिकेट में पहली बार 2008 में प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था। इसको लाने के पीछे बड़ी वजह अंपायर के फैसलों में पारदर्शिता लाना था। आज टेस्ट, वनडे और टी20 जैसे बड़े टूर्नामेंट में इसका इस्तेमाल होता है। जब कोई टीम अंपायर के फैसले से असहमत होती है, तो वह DRS ले सकती है।

Hawk-Eye Technology: गेंद का डिजिटल सफर

क्रिकेट मैच के अंदर LBW के फैसलों में सबसे अहम भूमिका Hawk-Eye निभाता है। मैदान में कई सारे हाई-स्पीड कैमरे लगाए जाते हैं, जो बॉल किस लाइन में जा रही है इस पर नजर रखते हैं। इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर गेंद की 3D ट्रैजेक्टरी बनाता है और अनुमान लगाता है कि गेंद आगे जाकर स्टंप्स से टकराएगी या नहीं।
Hawk-Eye पूरी तरह वास्तविक नहीं बल्कि एक प्रेडिक्शन मॉडल पर आधारित होता है। इसी वजह से Umpire’s Call का नियम रखा गया है। अगर गेंद का बहुत छोटा हिस्सा स्टंप्स को छूता हुआ दिखे, तो मैदान पर दिया गया अंपायर का फैसला ही अंतिम माना जाता है।

UltraEdge Working Process: हल्की सी आवाज भी पकड़ लेता है

कई बार अंपायर या खिलाड़ी इस उलझन में फंस जाते है कि गेंद बल्ले से लगी या पैड से? यहीं पर UltraEdge काम आता है। स्टंप्स के पास बहुत Sensitive (संवेदनशील) माइक लगाए जाते हैं, जो छोटी से छोटी आवाज रिकॉर्ड कर लेते हैं। जब बॉल बैट से टकराती है, तो ऑडियो ग्राफ में उछाल दिखाई देता है। यह सिस्टम पुराने Snickometer का अपडेटेड वर्जन माना जाता है।

Cricket AI Technology: क्या DRS में AI का इस्तेमाल होता है?

Hawk-Eye का सिस्टम फिजिक्स और डेटा मॉडलिंग पर आधारित है। यह हजारों डिलीवरी के डेटा से तैयार Algorithm (एल्गोरिदम) का उपयोग करता है। हालांकि यह पूरी तरह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) नहीं है, लेकिन यह मशीन से की गई गणना और अनुमान पर चलता है। DRS एक तकनीकी सहायता प्रणाली है, लेकिन यह 100% सटीक होने का दावा नहीं करता। कैमरा एंगल, पिच की स्थिति और अनुमानित प्रोजेक्शन पर इसका परिणाम निर्भर करता है। इसलिए क्रिकेट में अंतिम निर्णय में अंपायर की भूमिका अब भी अहम रहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *