दरभंगा में दो दिवसीय मिथिला लोक उत्सव का समापन हो गया। रविवार दूसरे दिन भी देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भव्य आयोजन में लोक कलाकारों से लेकर बॉलीवुड और सूफी गायन तक की झलक देखने को मिली। लोक कलाकारों ने लोक गायन और लोक गाथा गायन की मनमोहक प्रस्तुतियां दी, जिसमें पारंपरिक मिथिला संस्कृति की छटा स्पष्ट रूप से झलकी। दरभंगा ऑडिटोरियम में प्रवीण सांस्कृतिक मंच की ओर से ‘वैजयंती’ नाटक का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। दर्शकों का दिल जीत लिया पीटीसी वॉयस ऑफ पंजाब सीजन-12 की सेमीफाइनलिस्ट हर्षप्रीत कौर ने संगीत संध्या की शुरुआत मां दुर्गा की स्तुति भजन ‘आई गिरी नंदिनी’ से की, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय हो उठा। इसके बाद उन्होंने मैथिली गीत ‘मिथिला मगन भयो आज’ प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। ‘तुम उठो सिया श्रृंगार करो’ और ‘राम-राम रटते-रटते’ जैसे भजनों ने आध्यात्मिक वातावरण को और भी गहरा कर दिया। बिहार की लोक परंपरा को समर्पित प्रस्तुति में ‘पनिया के जहाज’ जैसे लोकप्रिय गीत को भारत की स्वर कोकिला, पद्मविभूषण शारदा सिन्हा को समर्पित किया गया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। झूमते नजर आए दर्शक फागुन और होली के पारंपरिक गीत ‘रंग डालूंगी नंद के लालन कर पे’, ‘मेरे चुनर पे रंग बरसे’ और ‘मिथिला में राम खेले होली’ पर पूरा सभागार झूम उठा। कार्यक्रम के अंत में पंजाबी मेशअप ‘लंदन ठुमकदा’ की जोशीली प्रस्तुति ने हर उम्र के दर्शकों को खड़े होकर थिरकने पर मजबूर कर दिया। सूफियाना रंग में ‘रश्के कमर’ और ‘बुल्लेया’ के मेशअप ने युवा पीढ़ी को खासा आकर्षित किया। नई पीढ़ी अपनी सीटों पर ही झूमती नजर आई और पूरा परिसर संगीत की लय में डूब गया। हर्षप्रीत कौर राष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर चुकी हैं। तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन मिथिला की पावन धरती पर उनकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती। पंजाब की सुरों की बेटी ने अपनी गायकी से ऐसा रंग जमाया कि दर्शक देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन करते रहे। इस अवसर पर एडीएम आपदा प्रबंधन सलीम अख्तर, मनोज कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। दरभंगा में दो दिवसीय मिथिला लोक उत्सव का समापन हो गया। रविवार दूसरे दिन भी देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भव्य आयोजन में लोक कलाकारों से लेकर बॉलीवुड और सूफी गायन तक की झलक देखने को मिली। लोक कलाकारों ने लोक गायन और लोक गाथा गायन की मनमोहक प्रस्तुतियां दी, जिसमें पारंपरिक मिथिला संस्कृति की छटा स्पष्ट रूप से झलकी। दरभंगा ऑडिटोरियम में प्रवीण सांस्कृतिक मंच की ओर से ‘वैजयंती’ नाटक का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। दर्शकों का दिल जीत लिया पीटीसी वॉयस ऑफ पंजाब सीजन-12 की सेमीफाइनलिस्ट हर्षप्रीत कौर ने संगीत संध्या की शुरुआत मां दुर्गा की स्तुति भजन ‘आई गिरी नंदिनी’ से की, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय हो उठा। इसके बाद उन्होंने मैथिली गीत ‘मिथिला मगन भयो आज’ प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। ‘तुम उठो सिया श्रृंगार करो’ और ‘राम-राम रटते-रटते’ जैसे भजनों ने आध्यात्मिक वातावरण को और भी गहरा कर दिया। बिहार की लोक परंपरा को समर्पित प्रस्तुति में ‘पनिया के जहाज’ जैसे लोकप्रिय गीत को भारत की स्वर कोकिला, पद्मविभूषण शारदा सिन्हा को समर्पित किया गया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। झूमते नजर आए दर्शक फागुन और होली के पारंपरिक गीत ‘रंग डालूंगी नंद के लालन कर पे’, ‘मेरे चुनर पे रंग बरसे’ और ‘मिथिला में राम खेले होली’ पर पूरा सभागार झूम उठा। कार्यक्रम के अंत में पंजाबी मेशअप ‘लंदन ठुमकदा’ की जोशीली प्रस्तुति ने हर उम्र के दर्शकों को खड़े होकर थिरकने पर मजबूर कर दिया। सूफियाना रंग में ‘रश्के कमर’ और ‘बुल्लेया’ के मेशअप ने युवा पीढ़ी को खासा आकर्षित किया। नई पीढ़ी अपनी सीटों पर ही झूमती नजर आई और पूरा परिसर संगीत की लय में डूब गया। हर्षप्रीत कौर राष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर चुकी हैं। तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन मिथिला की पावन धरती पर उनकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती। पंजाब की सुरों की बेटी ने अपनी गायकी से ऐसा रंग जमाया कि दर्शक देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन करते रहे। इस अवसर पर एडीएम आपदा प्रबंधन सलीम अख्तर, मनोज कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।


