‘मर जाने का ख्याल आता है, जिंदा रहकर क्या करूंगी’:बाप-बेटे 8 दिनों तक मेरे साथ दरिंदगी करते रहे, 10वीं की छात्रा की आपबीती

‘मर जाने का ख्याल आता है, जिंदा रहकर क्या करूंगी’:बाप-बेटे 8 दिनों तक मेरे साथ दरिंदगी करते रहे, 10वीं की छात्रा की आपबीती

‘मैं पढ़-लिखकर टीचर बनना चाहती थी, ताकि मैं अपनी जैसी गरीब बच्चियों को पढ़ा सकूं, उनका सपना पूरा कर सकूं। ये सपना सिर्फ मेरा नहीं था, मेरे पिताजी का भी था। दिनभर मेहनत कर एक-एक रुपए जोड़कर उन्होंने मेरे लिए मैट्रिक परीक्षा का टारगेट पेपर खरीदा था। लेकिन मेरे साथ जो कुछ हुआ है, उससे मैं शायद राह भटक जाऊं, दरिंदों ने मुझसे मेरा आत्मविश्वास ही छीन लिया। अब तो जीने का भी मन नहीं करता।’ धनगाई थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 10वीं की छात्रा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। छात्रा 10वीं के एग्जाम की तैयारी कर रही है। दरअसल, छात्रा को उसके पड़ोसी पिता-पुत्र ने बंदूक की नोक पर 19 जनवरी की शाम को अगवा किया। पीड़िता 8 दिनों तक आरोपियों के चंगुल में फंसी रही। 27 जनवरी को मौका देखकर वो अपने घर भाग गई। 27 जनवरी को ही पीड़िता को लेकर उसके पिता धनगाईं थाना पहुंचे और मामले की शिकायत की। फिलहाल, आरोपी मनजी चौधरी उर्फ रमेश चौधरी (55) और मिथुन (27) दोनों फरार हैं। हालांकि, पुलिस ने मुख्य आरोपी मिथुन चौधरी की मां को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन उसके बाद उसे छोड़ दिया। नाबालिग 8 दिनों तक दरिंदों के चंगुल में किस हाल में रही, आखिर कैसे आरोपियों के चंगुल से भागकर घर पहुंची, 8 दिनों तक माता-पिता नाबालिग को कहां-कहां तलाशते रहे? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए, नाबालिग ने अपनी आपबीती में क्या कहा? नाबालिग ने बताया कि 19 जनवरी की शाम हम आरोपियों के घर के आगे टॉयलेट के लिए गए थे। गांव की अधिकतर महिलाएं और लड़कियां उधर से ही आती-जाती हैं। मैं घर लौट रही थी। इसी दौरान उन्होंने मुझे पकड़ लिया और खंडहरनुमा मकान में ले जाकर बंद कर दिया। गंदा काम करने के बाद मुझे खाने के लिए समोसा और चाउमीन देते थे। मैं घर जाने की गुहार लगाती थी, लेकिन उन्हें तरस नहीं आता था। पीड़िता के मुताबिक, मैं शोर मचाती थी, लेकिन कोई मेरी आवाज नहीं सुन पाता था। इसकी वजह था कि आरोपी मेरा हाथ-पैर और मुंह बांध देते थे। जिस घर में मुझे रखा गया था, उसमें चार से पांच कमरे थे, लेकिन किसी में खिड़की नहीं थी। सिर्फ एक टीन का गेट था। घर में एक गुलाबी रंग का बल्ब था, जो ज्यादा रोशनी भी नहीं करता था। ‘पिता वारदात को अंजाम देता था, तो बेटा वहीं खड़ा रहता था’ छात्रा ने बताया कि बाप-बेटा दोनों दरिंदगी करने एक साथ आते थे। अगर पिता मेरे साथ गंदा काम करता था तो बेटा खड़ा होकर देखता था, जब बेटा ऐसा करता था तो पिता वहीं खड़ा रहता था। मिथुन जब दरिंदगी करता था तो गंदी बातें भी करता था। शुरुआत में ही जब मैंने विरोध किया तो उसने मेरा सिर दीवार से टकरा दिया था। मैं डर गई थी। इसके बाद मैंने चुप रहने में ही भलाई समझी। जब मुझे टॉयलेट जाना होता था, तब आरोपी बंदूक की नोंक पर बाहर ले जाते थे और वापस आने पर गमछे से हाथ और पैरों को बांध दिया जाता था। ’26 जनवरी को मिथुन नहीं आया, 27 की सुबह मैं भाग निकली’ छात्रा ने बताया कि 26 जनवरी को मिथुन नहीं आया था। 27 जनवरी की सुबह रमेश चौधरी मुझे टॉयलेट के लिए घर के बाहर ले गया था। इसी दौरान मैंने दो महिलाओं को देखा। महिलाओं को देखने के बाद मैंने चिल्लाना शुरू किया। यह देख रमेश चौधरी वहां से भाग गया। फिर मैं दौड़कर अपने घर पहुंची और माता-पिता को घटना की जानकारी दी। पिता बोले- चाहे जिंदा रहूं या मर जाऊं, बेटी को न्याय दिलवाऊंगा बच्ची के पिता ने बताया कि बेटी गायब हुई तो काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल रहा था। जब बच्ची वापस आई, उससे आपबीती बताई। इसके बाद थाना जाकर एफआईआर दर्ज कराई। पड़ोसी मिथुन चौधरी मेरी बेटी को उठाकर ले गया और बाप-बेटा ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। मैं पुलिस और सरकार से न्याय की मांग करता हूं। आरोपी मिथुन चौधरी के पिता रिश्ते में मेरा भतीजा लगेगा, जबकि आरोपी मेरा पोता लगेगा। हम लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि बेटी के साथ इस तरह की घटना होगी।
अब जानिए, 8 दिनों तक नाबालिग के माता-पिता ने क्या किया? पीड़िता के पिता के मुताबिक, मेरी बेटी 19 जनवरी को गायब हुई तो मैंने अपने रिश्तेदार, बेटी की सहेलियों के घर और गांव में खोजबीन की। लेकिन उसके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया। इतने दिन में मैं ‎पुलिस के पास इसलिए नहीं गया और केस इसलिए नहीं किया कि‎ समाज में बदनामी होगी। ‘मैं पढ़-लिखकर टीचर बनना चाहती थी, ताकि मैं अपनी जैसी गरीब बच्चियों को पढ़ा सकूं, उनका सपना पूरा कर सकूं। ये सपना सिर्फ मेरा नहीं था, मेरे पिताजी का भी था। दिनभर मेहनत कर एक-एक रुपए जोड़कर उन्होंने मेरे लिए मैट्रिक परीक्षा का टारगेट पेपर खरीदा था। लेकिन मेरे साथ जो कुछ हुआ है, उससे मैं शायद राह भटक जाऊं, दरिंदों ने मुझसे मेरा आत्मविश्वास ही छीन लिया। अब तो जीने का भी मन नहीं करता।’ धनगाई थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 10वीं की छात्रा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। छात्रा 10वीं के एग्जाम की तैयारी कर रही है। दरअसल, छात्रा को उसके पड़ोसी पिता-पुत्र ने बंदूक की नोक पर 19 जनवरी की शाम को अगवा किया। पीड़िता 8 दिनों तक आरोपियों के चंगुल में फंसी रही। 27 जनवरी को मौका देखकर वो अपने घर भाग गई। 27 जनवरी को ही पीड़िता को लेकर उसके पिता धनगाईं थाना पहुंचे और मामले की शिकायत की। फिलहाल, आरोपी मनजी चौधरी उर्फ रमेश चौधरी (55) और मिथुन (27) दोनों फरार हैं। हालांकि, पुलिस ने मुख्य आरोपी मिथुन चौधरी की मां को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन उसके बाद उसे छोड़ दिया। नाबालिग 8 दिनों तक दरिंदों के चंगुल में किस हाल में रही, आखिर कैसे आरोपियों के चंगुल से भागकर घर पहुंची, 8 दिनों तक माता-पिता नाबालिग को कहां-कहां तलाशते रहे? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए, नाबालिग ने अपनी आपबीती में क्या कहा? नाबालिग ने बताया कि 19 जनवरी की शाम हम आरोपियों के घर के आगे टॉयलेट के लिए गए थे। गांव की अधिकतर महिलाएं और लड़कियां उधर से ही आती-जाती हैं। मैं घर लौट रही थी। इसी दौरान उन्होंने मुझे पकड़ लिया और खंडहरनुमा मकान में ले जाकर बंद कर दिया। गंदा काम करने के बाद मुझे खाने के लिए समोसा और चाउमीन देते थे। मैं घर जाने की गुहार लगाती थी, लेकिन उन्हें तरस नहीं आता था। पीड़िता के मुताबिक, मैं शोर मचाती थी, लेकिन कोई मेरी आवाज नहीं सुन पाता था। इसकी वजह था कि आरोपी मेरा हाथ-पैर और मुंह बांध देते थे। जिस घर में मुझे रखा गया था, उसमें चार से पांच कमरे थे, लेकिन किसी में खिड़की नहीं थी। सिर्फ एक टीन का गेट था। घर में एक गुलाबी रंग का बल्ब था, जो ज्यादा रोशनी भी नहीं करता था। ‘पिता वारदात को अंजाम देता था, तो बेटा वहीं खड़ा रहता था’ छात्रा ने बताया कि बाप-बेटा दोनों दरिंदगी करने एक साथ आते थे। अगर पिता मेरे साथ गंदा काम करता था तो बेटा खड़ा होकर देखता था, जब बेटा ऐसा करता था तो पिता वहीं खड़ा रहता था। मिथुन जब दरिंदगी करता था तो गंदी बातें भी करता था। शुरुआत में ही जब मैंने विरोध किया तो उसने मेरा सिर दीवार से टकरा दिया था। मैं डर गई थी। इसके बाद मैंने चुप रहने में ही भलाई समझी। जब मुझे टॉयलेट जाना होता था, तब आरोपी बंदूक की नोंक पर बाहर ले जाते थे और वापस आने पर गमछे से हाथ और पैरों को बांध दिया जाता था। ’26 जनवरी को मिथुन नहीं आया, 27 की सुबह मैं भाग निकली’ छात्रा ने बताया कि 26 जनवरी को मिथुन नहीं आया था। 27 जनवरी की सुबह रमेश चौधरी मुझे टॉयलेट के लिए घर के बाहर ले गया था। इसी दौरान मैंने दो महिलाओं को देखा। महिलाओं को देखने के बाद मैंने चिल्लाना शुरू किया। यह देख रमेश चौधरी वहां से भाग गया। फिर मैं दौड़कर अपने घर पहुंची और माता-पिता को घटना की जानकारी दी। पिता बोले- चाहे जिंदा रहूं या मर जाऊं, बेटी को न्याय दिलवाऊंगा बच्ची के पिता ने बताया कि बेटी गायब हुई तो काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल रहा था। जब बच्ची वापस आई, उससे आपबीती बताई। इसके बाद थाना जाकर एफआईआर दर्ज कराई। पड़ोसी मिथुन चौधरी मेरी बेटी को उठाकर ले गया और बाप-बेटा ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। मैं पुलिस और सरकार से न्याय की मांग करता हूं। आरोपी मिथुन चौधरी के पिता रिश्ते में मेरा भतीजा लगेगा, जबकि आरोपी मेरा पोता लगेगा। हम लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि बेटी के साथ इस तरह की घटना होगी।
अब जानिए, 8 दिनों तक नाबालिग के माता-पिता ने क्या किया? पीड़िता के पिता के मुताबिक, मेरी बेटी 19 जनवरी को गायब हुई तो मैंने अपने रिश्तेदार, बेटी की सहेलियों के घर और गांव में खोजबीन की। लेकिन उसके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया। इतने दिन में मैं ‎पुलिस के पास इसलिए नहीं गया और केस इसलिए नहीं किया कि‎ समाज में बदनामी होगी।  

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