व्यवस्था खुद आईसीयू में:ब्लड प्रेशर, पल्स व ईसीजी बताने वाली 96 में 80 मशीनें खराब

व्यवस्था खुद आईसीयू में:ब्लड प्रेशर, पल्स व ईसीजी बताने वाली 96 में 80 मशीनें खराब

रिम्स के मेडिसिन-सर्जरी विभाग के आईसीयू में मरीज की मॉनिटरिंग में लगे सिस्टम किसी काम के नहीं, जैसे-तैसे हो रही देखभाल
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में मरीजों को इलाज तो मिल रहा है, लेकिन गंभीर मरीजों की निगरानी के लिए जरूरी आधुनिक व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। रिम्स के मेडिसिन और सर्जरी विभाग के आईसीयू में लगे 80 से अधिक डिस्प्ले मॉनिटर लंबे समय से बंद पड़े हैं। इन मॉनिटरों के बंद होने से मरीजों की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए इन मॉनिटरों का उपयोग किया जाता है। मेडिसिन और सर्जरी दोनों विभागों के आईसीयू में 48-48 बेड हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 96 बेड की क्षमता है। लेकिन इनमें लगे अधिकतर मॉनिटर बंद पड़े हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखना डॉक्टरों और नर्सों के लिए चुनौती बन गई है। मॉनिटर बंद रहने से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मरीजों की स्थिति जानने के लिए वैकल्पिक तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। कई डॉक्टरों को अपनी जेब में पल्स ऑक्सीमीटर लेकर मरीजों की जांच करनी पड़ रही है। इसमें समय भी अधिक लग रहा है और लगातार निगरानी की सुविधा भी प्रभावित हो रही है। मॉनिटर के माध्यम से मरीजों का ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, रेस्पिरेटरी रेट और ईसीजी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मिलती हैं। एक्सेसरीज खराब होने से मॉनिटर ठप
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मॉनिटर खराब नहीं हैं, बल्कि इनमें लगने वाली एक्सेसरीज खराब हो गई हैं। इन एक्सेसरीज के अभाव में मॉनिटर में रीडिंग नहीं आ रही है। तकनीकी रूप से छोटी समस्या होने के बावजूद लंबे समय से इन्हें ठीक नहीं कराया जा सका है, जिससे मरीजों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ठीक कराने की प्रक्रिया जारी है
मेडिसिन विभाग में थोड़ी दिक्कत तो है, सर्जरी से अबतक ऐसी शिकायत मेरे संज्ञान में ताे नहीं आई है। हालांकि, इन्हें ठीक कराने की प्रक्रिया जारी है। जल्द सभी को दुरुस्त करा दिया जाएगा। – डॉ. शैलेश त्रिपाठी, अपर चिकित्सा अधीक्षक, रिम्स। रिम्स के मेडिसिन-सर्जरी विभाग के आईसीयू में मरीज की मॉनिटरिंग में लगे सिस्टम किसी काम के नहीं, जैसे-तैसे हो रही देखभाल
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में मरीजों को इलाज तो मिल रहा है, लेकिन गंभीर मरीजों की निगरानी के लिए जरूरी आधुनिक व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। रिम्स के मेडिसिन और सर्जरी विभाग के आईसीयू में लगे 80 से अधिक डिस्प्ले मॉनिटर लंबे समय से बंद पड़े हैं। इन मॉनिटरों के बंद होने से मरीजों की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए इन मॉनिटरों का उपयोग किया जाता है। मेडिसिन और सर्जरी दोनों विभागों के आईसीयू में 48-48 बेड हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 96 बेड की क्षमता है। लेकिन इनमें लगे अधिकतर मॉनिटर बंद पड़े हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखना डॉक्टरों और नर्सों के लिए चुनौती बन गई है। मॉनिटर बंद रहने से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मरीजों की स्थिति जानने के लिए वैकल्पिक तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। कई डॉक्टरों को अपनी जेब में पल्स ऑक्सीमीटर लेकर मरीजों की जांच करनी पड़ रही है। इसमें समय भी अधिक लग रहा है और लगातार निगरानी की सुविधा भी प्रभावित हो रही है। मॉनिटर के माध्यम से मरीजों का ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, रेस्पिरेटरी रेट और ईसीजी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मिलती हैं। एक्सेसरीज खराब होने से मॉनिटर ठप
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मॉनिटर खराब नहीं हैं, बल्कि इनमें लगने वाली एक्सेसरीज खराब हो गई हैं। इन एक्सेसरीज के अभाव में मॉनिटर में रीडिंग नहीं आ रही है। तकनीकी रूप से छोटी समस्या होने के बावजूद लंबे समय से इन्हें ठीक नहीं कराया जा सका है, जिससे मरीजों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ठीक कराने की प्रक्रिया जारी है
मेडिसिन विभाग में थोड़ी दिक्कत तो है, सर्जरी से अबतक ऐसी शिकायत मेरे संज्ञान में ताे नहीं आई है। हालांकि, इन्हें ठीक कराने की प्रक्रिया जारी है। जल्द सभी को दुरुस्त करा दिया जाएगा। – डॉ. शैलेश त्रिपाठी, अपर चिकित्सा अधीक्षक, रिम्स।  

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