एम्स का मेडिकल बोर्ड देगा एक्सपर्ट ओपिनियन, साक्ष्य सौंपे मुन्नाचक के शंभू गर्ल्स हाॅस्टल में रहकर नीट की तैयारी करने वाली छात्रा की मौत के मामले में चित्रगुप्तनगर थाने की थानेदार रौशनी कुमारी की भूमिका संदिग्ध है। छात्रा के परिजन लगातार सवाल उठा रहे हैं। परिजनों ने कहा-सबसे पहले उनकी बच्ची को हॉस्टल के पास सहज सर्जरी में भर्ती कराया गया। वहां से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां के एक जूनियर डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ ने हमें बताया कि पीड़िता के कपड़े पर खून लगा था। जब हमने बच्ची का कपड़ा मांगा तो डॉक्टर ने थानेदार और हॉस्टल संचालक की मौजूदगी में कहा-फेंक दिया हूं।
डॉक्टर ने कहा-तुम्हें बच्ची को बचाना है या उसका कपड़ा रखना है? अगर परिजनों का आरोप सही है और पीड़िता का कपड़ा फेंका गया तो थानेदार ने इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को क्यों नहीं दी? परिजनों ने कहा-उनकी बच्ची 6 जनवरी को बेहोश ही रही। 7 जनवरी को उसे होश आया। मां ने पूछा-बेटी क्या हुआ तो वह रोने लगी। कुछ कहने लगी तभी एक परिजन ने वीडियो बनाने के लिए मोबाइल निकाला। तभी वहां मौजूद डॉक्टर और अन्य स्टाफ ने परिजनों को वार्ड से निकाल दिया। मां और मामा ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और हॉस्टल संचालक मिले हुए हैं। हमारी बच्ची कुछ कहना चाह रही थी, लेकिन बात करने नहीं दिया गया। आईजी ने एसआईटी के साथ देखा घटनास्थल, वैज्ञानिक तरीके अनुसंधान का आदेश
आराेप : हॉस्टल संचालक ने 10 लाख का ऑॅफर दिया था
छात्रा की मां और मामा ने कहा कि जब बच्ची कोमा में चली गई तब हॉस्टल संचालक ने कहा-10 लाख रुपए ले लो और मामले को रफा-दफा कर दो। इसके बाद हमारा शक गहरा गया। हम थाने गए और मामले की जानकारी पुलिस को दी। इस मामले में पुलिस मकान मालिक मनीष रंजन को जेल भेज चुकी है।
सवाल : मकान मालिक को जेल भेजा, हॉस्टल संचालक से सिर्फ पूछताछ क्याें
मकान मालिक मनीष रंजन को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस का तर्क है कि ऐसी आशंका है कि मकान मालिक साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। जबकि हॉस्टल संचालक से सिर्फ पूछताछ की गई है। मकान मालिक और हॉस्टल संचालक दोनों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। छात्रा 26 दिसंबर को पटना से अपने गांव चली गई थी। वह 5 जनवरी को दिन के 3:26 बजे हॉस्टल पहुंची। 6 जनवरी को वह अपने कमरे में बेहोश मिली। परिजनों का आरोप है कि बिना पुलिस को सूचना दिए उनकी बच्ची के कमरे का दरवाजा तोड़कर उसे निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी को छात्रा की मौत हो गई। डीजीपी ने एसआईटी संग बैठक की, तीनों अस्पताल के डॉक्टरों का बयान होगा दर्ज
शुनिवार की देर शाम पुलिस मुख्यालय में डीजीपी ने एसआईटी के साथ डेढ़ घंटा तक बैठक की। इस दौरान उन्होंने एसआईटी को कई निर्देश दिए। अब एसआईटी मामले में शुरुआत से अनुसंधान कर रही है। छात्रा का इलाज तीन अस्पतालों में हुआ। एसआईटी तीनों अस्पतालाें के डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ से पूछताछ करेगी। छात्रा 26 दिसंबर से 5 जनवरी तक जहानाबाद में रही। इस दौरान वह किस-किस से मिली और फोन पर किस-किस से बातचीत हुई, सभी का रिकार्ड एसआईटी खंगाल रही है। एसआईटी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान करें। छात्रा को 7 जनवरी को होश आया… मां ने पूछा-बेटी क्या हुआ तो वह रोने लगी। मां और मामा ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और हॉस्टल संचालक मिले हुए हैं। हमारी बच्ची कुछ कहना चाह रही थी, लेकिन वार्ड से निकाल दिया। दाे माह से अधिक नहीं टिकती थीं लड़कियां
अपनी छात्राओं काे शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने नहीं भेजते थे पास के काेचिंग वाले
शनिवार, दोपहर दो बजे। मुन्नाचक का शंभू गर्ल्स हॉस्टल। हॉस्टल के बाहर लोगों का तांता लगा है। इस हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ दरिंदगी की बात जानने के बाद लोगों में गुस्सा और गम दोनों है। सबके मुंह से बद्दुआ ही निकल रही है-दरिंदाें काे फांसी से कम सजा न हो। लड़की बहुत मासूम थी। उसके साथ बहुत गलत किया। भला लाेग अब अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए शहर कैसे भेजेंगे? यहां लाइन से चार-पांच गर्ल्स हॉस्टल हैं। सभी निजी मकानों में संचालित हैं। लेकिन, सभी हॉस्टल बाहर से बंद दिख रहे हैं। इस हॉस्टल के आसपास नीट और जेईई की तैयारी कराने वाले चार बड़े कोचिंग संस्थान हैं। यहां के तीन बड़े कोचिंग संस्थान ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल को ब्लैकलिस्टेड कर रखा था। अपने यहां पढ़ने वाली छात्राओं काे वहां रहने नहीं भेजते थे। जहां लड़कियां वहां रहती थीं, वाे हॉस्टल की संदिग्ध गतिविधियों के कारण एक-दो महीने में ही दूसरी जगह चली जाती थीं। दो महीने पहले हॉस्टल बदलने वाली छात्रा ने कहा-यहां बालकनी नहीं है। खिड़कियां ऊपर होने के बाद भी मोटी जाली लगी है। बिना लाइट के रूम में अंधेरा रहता था। आने-जाने का एक ही रास्ता था। छात्राओं को रात में कमरे से निकलने में दिक्कत होती थी। स्थानीय लोगों ने कहा-मकान मालिक की गतिविधियां संदिग्ध
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हॉस्टल शुरू से ही संदिग्ध है। ढाई साल में पांच मंजिला मकान खड़ा कर लिया। चार मंजिला हॉस्टल में मकान मालिक खुद त्रिपाल डालकर शीशे का कमरा बनाकर रहता था। इस हॉस्टल के लिए कोई वेंडर नहीं, बल्कि सीधे एजेंसी से गैस सिलेंडर की सप्लाई होती थी। देर रात तक महंगी गाड़ियां आती थीं। गाड़ियां कभी बाहर नहीं रुकती थीं, सीधे हॉस्टल में घुसती थीं। अन्य गर्ल्स हॉस्टल के मुकाबले यहां कम पैसे में कमरा मिल जाता था। इसलिए छात्राएं शंभू गर्ल्स हॉस्टल में आ जाती थीं। ये क्या बात हुई… एम्स के निदेशक पटना लाैटेंगे तब जांच के लिए बनेगा मेडिकल बाेर्ड
इस मामले में अब पुलिस को एम्स के डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर एक्सपर्ट मान रहे हैं कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ। उसके शरीर पर कई जगह नाखून और चोट के निशान हैं। प्राइवेट पार्ट पर भी जख्म मिले हैं। पोस्टमार्टम से जुड़े सभी साक्ष्य एम्स प्रशासन को सौंप दिए गए हैं। एम्स के निदेशक अभी पटना से बाहर हैं, इसलिए मेडिकल बोर्ड नहीं बना है। इधर, आईजी जितेंद्र राणा ने एसएसपी कार्तिकेय शर्मा, एसपी पूर्वी परिचय कुमार, एसडीपीओ सदर वन अभिनव और एसआईटी के साथ मुन्नाचक स्थित शंभु हाॅस्टल का निरीक्षण किया। आईजी ने कहा-टीम को वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान करने को कहा गया है। हॉस्टल के सीसीटीवी कैमराें और डंप डेटा से संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच करने को कहा। आईजी ने हॉस्टल की छात्राओं से भी बात की। एसआईटी को आईजी ही लीड कर रहे हैं। वे जांच की प्रगति की राेज समीक्षा करेंगे। एसआईटी ने करीब 25 लोगों की लिस्ट बनाई है, जिनसे पूछताछ हाेगी। शनिवार को हॉस्टल की जांच के बाद एक स्थानीय नेता के हवाले हॉस्टल को कर दिया गया है। पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है। हॉस्टल में किसी भी अज्ञात के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते याैन हिंसा के विराेध में प्रदर्शन
पटना में छात्रा की संदिग्ध मौत और पूर्णिया जिले में महिला के साथ यौन हिंसा की घटनाओं के खिलाफ महिलाओं ने विरेाध प्रदर्शन किया। एआईएसएफ ने भी विरोध मार्च निकाला। मामले में जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एसएसपी से मुलाकात की। उनके साथ पीड़िता के पिता, मामा, मामी, चाचा और भाई भी थे। राजद महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष अनीता भारती के नेतृत्व में छह सदस्यीय शिष्टमंडल भी एसएसपी से मिला। एम्स का मेडिकल बोर्ड देगा एक्सपर्ट ओपिनियन, साक्ष्य सौंपे मुन्नाचक के शंभू गर्ल्स हाॅस्टल में रहकर नीट की तैयारी करने वाली छात्रा की मौत के मामले में चित्रगुप्तनगर थाने की थानेदार रौशनी कुमारी की भूमिका संदिग्ध है। छात्रा के परिजन लगातार सवाल उठा रहे हैं। परिजनों ने कहा-सबसे पहले उनकी बच्ची को हॉस्टल के पास सहज सर्जरी में भर्ती कराया गया। वहां से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां के एक जूनियर डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ ने हमें बताया कि पीड़िता के कपड़े पर खून लगा था। जब हमने बच्ची का कपड़ा मांगा तो डॉक्टर ने थानेदार और हॉस्टल संचालक की मौजूदगी में कहा-फेंक दिया हूं।
डॉक्टर ने कहा-तुम्हें बच्ची को बचाना है या उसका कपड़ा रखना है? अगर परिजनों का आरोप सही है और पीड़िता का कपड़ा फेंका गया तो थानेदार ने इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को क्यों नहीं दी? परिजनों ने कहा-उनकी बच्ची 6 जनवरी को बेहोश ही रही। 7 जनवरी को उसे होश आया। मां ने पूछा-बेटी क्या हुआ तो वह रोने लगी। कुछ कहने लगी तभी एक परिजन ने वीडियो बनाने के लिए मोबाइल निकाला। तभी वहां मौजूद डॉक्टर और अन्य स्टाफ ने परिजनों को वार्ड से निकाल दिया। मां और मामा ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और हॉस्टल संचालक मिले हुए हैं। हमारी बच्ची कुछ कहना चाह रही थी, लेकिन बात करने नहीं दिया गया। आईजी ने एसआईटी के साथ देखा घटनास्थल, वैज्ञानिक तरीके अनुसंधान का आदेश
आराेप : हॉस्टल संचालक ने 10 लाख का ऑॅफर दिया था
छात्रा की मां और मामा ने कहा कि जब बच्ची कोमा में चली गई तब हॉस्टल संचालक ने कहा-10 लाख रुपए ले लो और मामले को रफा-दफा कर दो। इसके बाद हमारा शक गहरा गया। हम थाने गए और मामले की जानकारी पुलिस को दी। इस मामले में पुलिस मकान मालिक मनीष रंजन को जेल भेज चुकी है।
सवाल : मकान मालिक को जेल भेजा, हॉस्टल संचालक से सिर्फ पूछताछ क्याें
मकान मालिक मनीष रंजन को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस का तर्क है कि ऐसी आशंका है कि मकान मालिक साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। जबकि हॉस्टल संचालक से सिर्फ पूछताछ की गई है। मकान मालिक और हॉस्टल संचालक दोनों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। छात्रा 26 दिसंबर को पटना से अपने गांव चली गई थी। वह 5 जनवरी को दिन के 3:26 बजे हॉस्टल पहुंची। 6 जनवरी को वह अपने कमरे में बेहोश मिली। परिजनों का आरोप है कि बिना पुलिस को सूचना दिए उनकी बच्ची के कमरे का दरवाजा तोड़कर उसे निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी को छात्रा की मौत हो गई। डीजीपी ने एसआईटी संग बैठक की, तीनों अस्पताल के डॉक्टरों का बयान होगा दर्ज
शुनिवार की देर शाम पुलिस मुख्यालय में डीजीपी ने एसआईटी के साथ डेढ़ घंटा तक बैठक की। इस दौरान उन्होंने एसआईटी को कई निर्देश दिए। अब एसआईटी मामले में शुरुआत से अनुसंधान कर रही है। छात्रा का इलाज तीन अस्पतालों में हुआ। एसआईटी तीनों अस्पतालाें के डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ से पूछताछ करेगी। छात्रा 26 दिसंबर से 5 जनवरी तक जहानाबाद में रही। इस दौरान वह किस-किस से मिली और फोन पर किस-किस से बातचीत हुई, सभी का रिकार्ड एसआईटी खंगाल रही है। एसआईटी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान करें। छात्रा को 7 जनवरी को होश आया… मां ने पूछा-बेटी क्या हुआ तो वह रोने लगी। मां और मामा ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और हॉस्टल संचालक मिले हुए हैं। हमारी बच्ची कुछ कहना चाह रही थी, लेकिन वार्ड से निकाल दिया। दाे माह से अधिक नहीं टिकती थीं लड़कियां
अपनी छात्राओं काे शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने नहीं भेजते थे पास के काेचिंग वाले
शनिवार, दोपहर दो बजे। मुन्नाचक का शंभू गर्ल्स हॉस्टल। हॉस्टल के बाहर लोगों का तांता लगा है। इस हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ दरिंदगी की बात जानने के बाद लोगों में गुस्सा और गम दोनों है। सबके मुंह से बद्दुआ ही निकल रही है-दरिंदाें काे फांसी से कम सजा न हो। लड़की बहुत मासूम थी। उसके साथ बहुत गलत किया। भला लाेग अब अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए शहर कैसे भेजेंगे? यहां लाइन से चार-पांच गर्ल्स हॉस्टल हैं। सभी निजी मकानों में संचालित हैं। लेकिन, सभी हॉस्टल बाहर से बंद दिख रहे हैं। इस हॉस्टल के आसपास नीट और जेईई की तैयारी कराने वाले चार बड़े कोचिंग संस्थान हैं। यहां के तीन बड़े कोचिंग संस्थान ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल को ब्लैकलिस्टेड कर रखा था। अपने यहां पढ़ने वाली छात्राओं काे वहां रहने नहीं भेजते थे। जहां लड़कियां वहां रहती थीं, वाे हॉस्टल की संदिग्ध गतिविधियों के कारण एक-दो महीने में ही दूसरी जगह चली जाती थीं। दो महीने पहले हॉस्टल बदलने वाली छात्रा ने कहा-यहां बालकनी नहीं है। खिड़कियां ऊपर होने के बाद भी मोटी जाली लगी है। बिना लाइट के रूम में अंधेरा रहता था। आने-जाने का एक ही रास्ता था। छात्राओं को रात में कमरे से निकलने में दिक्कत होती थी। स्थानीय लोगों ने कहा-मकान मालिक की गतिविधियां संदिग्ध
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हॉस्टल शुरू से ही संदिग्ध है। ढाई साल में पांच मंजिला मकान खड़ा कर लिया। चार मंजिला हॉस्टल में मकान मालिक खुद त्रिपाल डालकर शीशे का कमरा बनाकर रहता था। इस हॉस्टल के लिए कोई वेंडर नहीं, बल्कि सीधे एजेंसी से गैस सिलेंडर की सप्लाई होती थी। देर रात तक महंगी गाड़ियां आती थीं। गाड़ियां कभी बाहर नहीं रुकती थीं, सीधे हॉस्टल में घुसती थीं। अन्य गर्ल्स हॉस्टल के मुकाबले यहां कम पैसे में कमरा मिल जाता था। इसलिए छात्राएं शंभू गर्ल्स हॉस्टल में आ जाती थीं। ये क्या बात हुई… एम्स के निदेशक पटना लाैटेंगे तब जांच के लिए बनेगा मेडिकल बाेर्ड
इस मामले में अब पुलिस को एम्स के डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर एक्सपर्ट मान रहे हैं कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ। उसके शरीर पर कई जगह नाखून और चोट के निशान हैं। प्राइवेट पार्ट पर भी जख्म मिले हैं। पोस्टमार्टम से जुड़े सभी साक्ष्य एम्स प्रशासन को सौंप दिए गए हैं। एम्स के निदेशक अभी पटना से बाहर हैं, इसलिए मेडिकल बोर्ड नहीं बना है। इधर, आईजी जितेंद्र राणा ने एसएसपी कार्तिकेय शर्मा, एसपी पूर्वी परिचय कुमार, एसडीपीओ सदर वन अभिनव और एसआईटी के साथ मुन्नाचक स्थित शंभु हाॅस्टल का निरीक्षण किया। आईजी ने कहा-टीम को वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान करने को कहा गया है। हॉस्टल के सीसीटीवी कैमराें और डंप डेटा से संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच करने को कहा। आईजी ने हॉस्टल की छात्राओं से भी बात की। एसआईटी को आईजी ही लीड कर रहे हैं। वे जांच की प्रगति की राेज समीक्षा करेंगे। एसआईटी ने करीब 25 लोगों की लिस्ट बनाई है, जिनसे पूछताछ हाेगी। शनिवार को हॉस्टल की जांच के बाद एक स्थानीय नेता के हवाले हॉस्टल को कर दिया गया है। पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है। हॉस्टल में किसी भी अज्ञात के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते याैन हिंसा के विराेध में प्रदर्शन
पटना में छात्रा की संदिग्ध मौत और पूर्णिया जिले में महिला के साथ यौन हिंसा की घटनाओं के खिलाफ महिलाओं ने विरेाध प्रदर्शन किया। एआईएसएफ ने भी विरोध मार्च निकाला। मामले में जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एसएसपी से मुलाकात की। उनके साथ पीड़िता के पिता, मामा, मामी, चाचा और भाई भी थे। राजद महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष अनीता भारती के नेतृत्व में छह सदस्यीय शिष्टमंडल भी एसएसपी से मिला।


