3 करोड़ की अवैध संपत्ति बनाने वाले इंजीनियर की कहानी:मां-बाप के पास फीस के पैसे नहीं थे, 85 हजार लोन लेकर पढ़ाई, नौकरी लगते ही रिश्वत लेने लगा

3 करोड़ की अवैध संपत्ति बनाने वाले इंजीनियर की कहानी:मां-बाप के पास फीस के पैसे नहीं थे, 85 हजार लोन लेकर पढ़ाई, नौकरी लगते ही रिश्वत लेने लगा

पहले इस शख्स को गौर से देखिए, जो साधारण व्यक्ति की तरह नजर आ रहा है। पिंक कलर की शर्ट, ग्रे कलर का पैंट पहने और चश्मा लगाए हुए। ऐसा लग रहा है कि अपनी दोनों आंखें बंद कर भगवान को याद कर रहा है। पर ऐसा है नहीं। मनोज कुमार रजक नाम का यह व्यक्ति बेहद शातिर है। इसने जो कांड किए हैं, उसकी पोल खोलने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी के माध्यम से बिहार की एजेंसी इंटरपोल की मदद लेगी। मनोज रजक पहले गरीब था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए 85 हजार रुपए कर्ज लिया। आज बिहार, बंगाल के साथ नेपाल में इसने करोड़ों रुपए की संपत्ति बना ली है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए गरीब घर से आने वाले मनोज रजक ने किस तरह करोड़ों रुपए की संपत्ति जुटाई? EOU ने इसके बारे में क्या पता किया है? 2009 में लगी सरकारी नौकरी, 17 साल में जुटाई करोड़ों की संपत्ति मनोज रजक नॉर्थ बिहार पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के इलेक्ट्रिक सप्लाई डिविजन में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (कार्यपालक अभियंता) है। वर्तमान में इसकी पोस्टिंग मधुबनी जिले के जयनगर में है। मनोज बेहद गरीब परिवार से है। इसके पास इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। 85 हजार रुपए कर्ज लेना पड़ा था। 2009 में सरकारी नौकरी लगने के बाद पैसे चुकाए। नौकरी के करीब 17 साल में ही इसने करोड़ों रुपए की काली कमाई कर ली। जांच से पता चला है कि मनोज ने सरकार को दी जानकारी में अपनी असली संपत्ति छिपाई है। EOU ने बिजली विभाग से मनोज के कामकाज का पूरा ब्योरा मांगा है। पूछा है कि हाल के दिनों कौन से बड़े फैसले किए हैं। अब तक के करियर में कहां और किस पद पर काम किया। पत्नी के नाम पर खुलवा रहा था पेट्रोल पंप, सिलीगुड़ी में खरीदा चाय बागान आज मनोज रजक करोड़पति है। बिहार पुलिस की एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इसकी संपत्ति की जांच कर रही है। सिर्फ बिहार में अब तक 17 प्रॉपर्टी मिली है। मनोज के पास गैस एजेंसी है। वह पत्नी के नाम पर पेट्रोल पंप खुलवा रहा था। मनोज ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में चाय बागान खरीद रखा है। नेपाल की राजधानी काठमांडू में कीमती प्रॉपर्टी खरीदी है। नेपाल के सुनसरी जिले के हरिपुर गांव में अपनी गर्लफ्रेंड के लिए घर बनवा रहा था। इसके लिए बिहार से कारीगरों को भेज रहा था। नेपाल में मनोज की संपत्ति पता करने के लिए EOU ले रही इंटरपोल की मदद EOU को मनोज रजक की काली कमाई के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद ADG नैयर हसनैन खान ने एक टीम बनाकर इंटरनल तरीके से मनोज की पूरी डिटेल निकलवाई। सूत्रों के जरिए मिली जानकारी को पुख्ता कराया। बात सही निकली तो पटना में EOU ने 16 मार्च को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत FIR (नंबर 02/2026) दर्ज की। EOU ने 17 मार्च को मनोज के 7 ठिकानों पर छापेमारी की। दरभंगा, मधुबनी में जयनगर स्थित ऑफिस, सुपौल में निर्मली और करजाइन स्थित घर व दूसरे ठिकानों को खंगाला गया। छापेमारी में मनोज की करीब 3 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला। कुल 21 प्रॉपर्टी के पेपर मिले। सिलीगुड़ी और नेपाल में प्रॉपर्टी खरीदने के सबूत मिले। नेपाल में मनोज ने कितनी संपत्ति बनाई, इसकी जांच के लिए EOU CBI के माध्यम से इंटरपोल की मदद ले रही है। EOU पता करना चाहती है कि मनोज द्वारा नेपाल में खरीदे गए प्रॉपर्टी की वैल्यू क्या है? इस मामले की गहराई से जांच के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और कंपनी अफेयर मिनिस्ट्री से भी संपर्क किया गया है। मनी लॉन्ड्रिंग का शक, ED कर सकती है जांच EOU को शक है कि काली कमाई करने और इसे खपाने में मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। इसे पुख्ता करने के लिए जांच टीम कई पॉइंट्स पर काम कर रही है। ठोस सबूत जुटाने की कोशिश की जा रही है। अगर मनी लॉन्ड्रिंग की बात साबित हुई तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो जाएगी। अलग से केस दर्ज कर ED जांच करेगी। जानिए मनोज रजक की काली कमाई का तरीका जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार सरकारी नौकरी में आने के बाद मनोज रजक ने तेजी से अपना नेटवर्क फैलाया। ठेकेदारों और बिचौलियों के बीच पैठ बनाई। भू माफियाओं और बिल्डर्स के साथ कनेक्शन जोड़ा। बिजली के मेंटेनेंस और पावर स्टेशन से जुड़े टेंडर में पहले अपना कमीशन तय करता था। इसके बाद चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलवाने के लिए दूसरों के टेंडर को रद्द कर देता था। जिस ठेकेदार के काम में कमी सामने आती उससे मोटी रकम लेता था। टेंडर का बिल पास कराने के नाम पर भी रिश्वतखोरी की। EOU इसके मोबाइल की जांच करेगी। कॉल डिटेल भी खंगाले जाएंगे। आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में मनोज से जल्द पूछताछ होगी। उसे नोटिस भेजकर बुलाया जाएगा। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की काली कमाई के 5 तरीके 1. नया बिजली कनेक्शन या लोड बढ़ाने में रिश्वत: सबसे आम और बड़ा स्रोत। आवेदन आता है तो JE फाइल हाथ में नहीं लेता जब तक “खर्चा-पानी” न तय हो। प्रति कनेक्शन या प्रति kW 5,000 से 50,000+ रुपए मांगे जाते हैं। दलाल (लाइनमैन, मीटर रीडर या मिस्त्री) पैसे लेते हैं और JE तक पहुंचाते हैं। रिश्वत न देने पर फाइल अटक जाती है या “तकनीकी समस्या” बता कर टाल दिया जाता है। 2. मीटर लगाने/बदलने/रीडिंग में घूस: मीटर खराब है या नया चाहिए? JE+लाइनमैन मिलकर 10-20 हजार लेते हैं। कभी-कभी पुराने मीटर को “टैम्पर” बताकर पेनल्टी माफ करने के नाम पर भी वसूली होती है। 3. एस्टीमेट (अनुमान) में 2-3 गुना वसूली: पोल शिफ्टिंग, ट्रांसफार्मर इंस्टॉल या लाइन वर्क का एस्टीमेट बनाते समय असल खर्च से ज्यादा दिखाकर बचा हुआ पैसा JE और ठेकेदार के बीच बंटता है। 4. बिल एडजस्टमेंट और चोरी नजरअंदाज: बकाया बिल कम करवाने, गलत रीडिंग डालने या बिना मीटर चोरी चलाने के लिए मासिक “कट” लिया जाता है। 5. धमकी का खेल: रिश्वत न देने पर बिजली काटने, छापा मारने या केस दर्ज करने की धमकी। कई केस में यही तरीका इस्तेमाल होता है। साजिश में साथ देना भाई संजय को पड़ा महंगा

मनोज रजक के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने FIR दर्ज की है। इसके अनुसार सरकारी नौकरी में आने के बाद मनोज पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूब गया। जब जहां पोस्टिंग हुई, वहीं बड़े स्तर पर काली कमाई की। किसी को शक न हो, इसलिए उसने सगे भाई संजय कुमार रजक को अपने साथ मिलाया। ब्लैक मनी को व्हाइट करने में भाई ने पूरी मदद की। जांच के दौरान इस बात के दो ठोस सबूत मिले हैं। इसी वजह से जांच एजेंसी ने FIR में संजय कुमार रजक को भी नामजद अभियुक्त बनाया है। फैमिली ट्री बना रही है EOU मनोज रजक के परिवार में कौन हैं? इनके पास कितनी संपत्ति है? क्या करते हैं? इसकी पूरी डिटेल निकाली जा रही है। EOU मनोज की फैमिली ट्री तैयार करने में जुटी है। पता कर रही है कि मनोज ने परिवार के किस सदस्य के नाम पर कितनी चल-अचल संपत्ति जुटाई। इसके परिवार के सभी सदस्यों की कमाई, संपत्ति, बैंक अकाउंट में हुई लेन-देन और दूसरी जानकारी की जांच की जा रही है। एजेंसी ने संभावना जताई है कि जब उसकी जांच आगे बढ़ेगी तो कई और खुलासे हो सकते हैं। पत्नी से संबंध सही नहीं, पर खुलवा रहा था पेट्रोल पंप मनोज रजक की पत्नी का नाम वीणा श्री भारती है। इन दोनों के दो बच्चे हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि पति-पत्नी के बीच रिश्ता सही नहीं है। EOU की पूछताछ में पत्नी ने यह बात कबूल की है। इसके बाद भी मनोज अपनी पत्नी के नाम से दरभंगा में स्टेट हाइवे पर एक पेट्रोल पंप खुलवा रहा था। लीज पर जमीन भी ले चुका है। नेपाल की लड़की से अफेयर, बनवा रहा घर

चौंकाने वाली बात यह है कि मनोज का अफेयर नेपाल की एक लड़की से चल रहा है। यह लड़की उनकी एक रिश्तेदार की बेटी है। मनोज इससे दूसरी शादी करना चाहता था। इसके लिए नेपाल में अपने खर्चे से घर बनवा रहा था। मनोज घर बनवाने के लिए अपने गांव से मजदूरों को भेजता था। खुद के नाम से 12 प्लॉट, 5 लाख की स्टाम्प ड्यूटी भरी मनोज रजक ने 2009 में सरकारी नौकरी जॉइन की। तब इनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। शुरुआत के 3-4 साल में ही इसने खूब कमाई शुरू कर दी। 2013 में पहली जमीन अपनी पत्नी वीणा भारती के नाम से सुपौल में खरीदी थी। इसके बाद 12 प्लॉट अपने नाम से खरीदे। जमीन के प्लॉट खरीदने के दौरान 5 लाख रुपए की स्टाम्प ड्यूटी भरी। सबसे अधिक सुपौल जिले में 7, दरभंगा में 4 और अररिया जिले में जमीन के 2 प्लॉट मनोज ने खरीदे। मनोज रजक के 3 बैंक अकाउंट मिले अभी तक की जांच में मनोज कुमार रजक के 3 बैंक अकाउंट का पता चला है। तीनों अकाउंट भारतीय स्टेट बैंक में हैं। एक में 53 हजार रुपए, दूसरे में 3.20 हजार रुपए और तीसरे अकाउंट में 400 रुपए मिले हैं। मनोज ने निर्मली में चल रहे ‘इंजीनियर्स एचपी ग्रामीण वितरक’ नाम की गैस एजेंसी लेने के लिए 10 लाख रुपए खर्च किए। इसने SBI और रिलायंस लाइफ की पॉलिसी खरीद रखी है। इस पर 8 लाख रुपए खर्च किए हैं। मनोज ने अपने नाम से 7 लाख रुपए की स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी है। 60 हजार रुपए खर्च कर एक पिस्टल भी ली है। मनोज ने सीमांचल और मिथिलांचल में गुजार दिए 17 साल सूत्र बताते हैं कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मनोज कुमार सेटिंग करने में भी माहिर है। विभाग के अंदर अपनी ऐसी पकड़ बना ली कि हमेशा मनचाही पोस्टिंग मिल जाती है। मनोज ने अपनी नौकरी के 17 साल सीमांचल और मिथिलांचल इलाके में गुजार दिए। दोनों नेपाल बॉर्डर से सटे इलाके हैं। मनोज की पोस्टिंग किशनगंज, कटिहार, अररिया, सुपौल, दरभंगा और मधुबनी में रही है। 26 लाख के इन ट्रांजेक्शन की चल रही है जांच 2023 से लेकर अब तक, मनोज ने कई बड़े ट्रांजेक्शन किए। किसी के अकाउंट में लाखों रुपए भेजे तो किसी को चेक से पैसे दिए। EOU के अधिकारी पता लगा रहे हैं कि उसने किसे और क्यों पैसे दिए। मनोज ने इन 5 ट्रांजेक्शन में 26 लाख रुपए दिए… पहले इस शख्स को गौर से देखिए, जो साधारण व्यक्ति की तरह नजर आ रहा है। पिंक कलर की शर्ट, ग्रे कलर का पैंट पहने और चश्मा लगाए हुए। ऐसा लग रहा है कि अपनी दोनों आंखें बंद कर भगवान को याद कर रहा है। पर ऐसा है नहीं। मनोज कुमार रजक नाम का यह व्यक्ति बेहद शातिर है। इसने जो कांड किए हैं, उसकी पोल खोलने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी के माध्यम से बिहार की एजेंसी इंटरपोल की मदद लेगी। मनोज रजक पहले गरीब था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए 85 हजार रुपए कर्ज लिया। आज बिहार, बंगाल के साथ नेपाल में इसने करोड़ों रुपए की संपत्ति बना ली है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए गरीब घर से आने वाले मनोज रजक ने किस तरह करोड़ों रुपए की संपत्ति जुटाई? EOU ने इसके बारे में क्या पता किया है? 2009 में लगी सरकारी नौकरी, 17 साल में जुटाई करोड़ों की संपत्ति मनोज रजक नॉर्थ बिहार पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के इलेक्ट्रिक सप्लाई डिविजन में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (कार्यपालक अभियंता) है। वर्तमान में इसकी पोस्टिंग मधुबनी जिले के जयनगर में है। मनोज बेहद गरीब परिवार से है। इसके पास इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। 85 हजार रुपए कर्ज लेना पड़ा था। 2009 में सरकारी नौकरी लगने के बाद पैसे चुकाए। नौकरी के करीब 17 साल में ही इसने करोड़ों रुपए की काली कमाई कर ली। जांच से पता चला है कि मनोज ने सरकार को दी जानकारी में अपनी असली संपत्ति छिपाई है। EOU ने बिजली विभाग से मनोज के कामकाज का पूरा ब्योरा मांगा है। पूछा है कि हाल के दिनों कौन से बड़े फैसले किए हैं। अब तक के करियर में कहां और किस पद पर काम किया। पत्नी के नाम पर खुलवा रहा था पेट्रोल पंप, सिलीगुड़ी में खरीदा चाय बागान आज मनोज रजक करोड़पति है। बिहार पुलिस की एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इसकी संपत्ति की जांच कर रही है। सिर्फ बिहार में अब तक 17 प्रॉपर्टी मिली है। मनोज के पास गैस एजेंसी है। वह पत्नी के नाम पर पेट्रोल पंप खुलवा रहा था। मनोज ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में चाय बागान खरीद रखा है। नेपाल की राजधानी काठमांडू में कीमती प्रॉपर्टी खरीदी है। नेपाल के सुनसरी जिले के हरिपुर गांव में अपनी गर्लफ्रेंड के लिए घर बनवा रहा था। इसके लिए बिहार से कारीगरों को भेज रहा था। नेपाल में मनोज की संपत्ति पता करने के लिए EOU ले रही इंटरपोल की मदद EOU को मनोज रजक की काली कमाई के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद ADG नैयर हसनैन खान ने एक टीम बनाकर इंटरनल तरीके से मनोज की पूरी डिटेल निकलवाई। सूत्रों के जरिए मिली जानकारी को पुख्ता कराया। बात सही निकली तो पटना में EOU ने 16 मार्च को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत FIR (नंबर 02/2026) दर्ज की। EOU ने 17 मार्च को मनोज के 7 ठिकानों पर छापेमारी की। दरभंगा, मधुबनी में जयनगर स्थित ऑफिस, सुपौल में निर्मली और करजाइन स्थित घर व दूसरे ठिकानों को खंगाला गया। छापेमारी में मनोज की करीब 3 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला। कुल 21 प्रॉपर्टी के पेपर मिले। सिलीगुड़ी और नेपाल में प्रॉपर्टी खरीदने के सबूत मिले। नेपाल में मनोज ने कितनी संपत्ति बनाई, इसकी जांच के लिए EOU CBI के माध्यम से इंटरपोल की मदद ले रही है। EOU पता करना चाहती है कि मनोज द्वारा नेपाल में खरीदे गए प्रॉपर्टी की वैल्यू क्या है? इस मामले की गहराई से जांच के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और कंपनी अफेयर मिनिस्ट्री से भी संपर्क किया गया है। मनी लॉन्ड्रिंग का शक, ED कर सकती है जांच EOU को शक है कि काली कमाई करने और इसे खपाने में मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। इसे पुख्ता करने के लिए जांच टीम कई पॉइंट्स पर काम कर रही है। ठोस सबूत जुटाने की कोशिश की जा रही है। अगर मनी लॉन्ड्रिंग की बात साबित हुई तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो जाएगी। अलग से केस दर्ज कर ED जांच करेगी। जानिए मनोज रजक की काली कमाई का तरीका जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार सरकारी नौकरी में आने के बाद मनोज रजक ने तेजी से अपना नेटवर्क फैलाया। ठेकेदारों और बिचौलियों के बीच पैठ बनाई। भू माफियाओं और बिल्डर्स के साथ कनेक्शन जोड़ा। बिजली के मेंटेनेंस और पावर स्टेशन से जुड़े टेंडर में पहले अपना कमीशन तय करता था। इसके बाद चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलवाने के लिए दूसरों के टेंडर को रद्द कर देता था। जिस ठेकेदार के काम में कमी सामने आती उससे मोटी रकम लेता था। टेंडर का बिल पास कराने के नाम पर भी रिश्वतखोरी की। EOU इसके मोबाइल की जांच करेगी। कॉल डिटेल भी खंगाले जाएंगे। आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में मनोज से जल्द पूछताछ होगी। उसे नोटिस भेजकर बुलाया जाएगा। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की काली कमाई के 5 तरीके 1. नया बिजली कनेक्शन या लोड बढ़ाने में रिश्वत: सबसे आम और बड़ा स्रोत। आवेदन आता है तो JE फाइल हाथ में नहीं लेता जब तक “खर्चा-पानी” न तय हो। प्रति कनेक्शन या प्रति kW 5,000 से 50,000+ रुपए मांगे जाते हैं। दलाल (लाइनमैन, मीटर रीडर या मिस्त्री) पैसे लेते हैं और JE तक पहुंचाते हैं। रिश्वत न देने पर फाइल अटक जाती है या “तकनीकी समस्या” बता कर टाल दिया जाता है। 2. मीटर लगाने/बदलने/रीडिंग में घूस: मीटर खराब है या नया चाहिए? JE+लाइनमैन मिलकर 10-20 हजार लेते हैं। कभी-कभी पुराने मीटर को “टैम्पर” बताकर पेनल्टी माफ करने के नाम पर भी वसूली होती है। 3. एस्टीमेट (अनुमान) में 2-3 गुना वसूली: पोल शिफ्टिंग, ट्रांसफार्मर इंस्टॉल या लाइन वर्क का एस्टीमेट बनाते समय असल खर्च से ज्यादा दिखाकर बचा हुआ पैसा JE और ठेकेदार के बीच बंटता है। 4. बिल एडजस्टमेंट और चोरी नजरअंदाज: बकाया बिल कम करवाने, गलत रीडिंग डालने या बिना मीटर चोरी चलाने के लिए मासिक “कट” लिया जाता है। 5. धमकी का खेल: रिश्वत न देने पर बिजली काटने, छापा मारने या केस दर्ज करने की धमकी। कई केस में यही तरीका इस्तेमाल होता है। साजिश में साथ देना भाई संजय को पड़ा महंगा

मनोज रजक के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने FIR दर्ज की है। इसके अनुसार सरकारी नौकरी में आने के बाद मनोज पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूब गया। जब जहां पोस्टिंग हुई, वहीं बड़े स्तर पर काली कमाई की। किसी को शक न हो, इसलिए उसने सगे भाई संजय कुमार रजक को अपने साथ मिलाया। ब्लैक मनी को व्हाइट करने में भाई ने पूरी मदद की। जांच के दौरान इस बात के दो ठोस सबूत मिले हैं। इसी वजह से जांच एजेंसी ने FIR में संजय कुमार रजक को भी नामजद अभियुक्त बनाया है। फैमिली ट्री बना रही है EOU मनोज रजक के परिवार में कौन हैं? इनके पास कितनी संपत्ति है? क्या करते हैं? इसकी पूरी डिटेल निकाली जा रही है। EOU मनोज की फैमिली ट्री तैयार करने में जुटी है। पता कर रही है कि मनोज ने परिवार के किस सदस्य के नाम पर कितनी चल-अचल संपत्ति जुटाई। इसके परिवार के सभी सदस्यों की कमाई, संपत्ति, बैंक अकाउंट में हुई लेन-देन और दूसरी जानकारी की जांच की जा रही है। एजेंसी ने संभावना जताई है कि जब उसकी जांच आगे बढ़ेगी तो कई और खुलासे हो सकते हैं। पत्नी से संबंध सही नहीं, पर खुलवा रहा था पेट्रोल पंप मनोज रजक की पत्नी का नाम वीणा श्री भारती है। इन दोनों के दो बच्चे हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि पति-पत्नी के बीच रिश्ता सही नहीं है। EOU की पूछताछ में पत्नी ने यह बात कबूल की है। इसके बाद भी मनोज अपनी पत्नी के नाम से दरभंगा में स्टेट हाइवे पर एक पेट्रोल पंप खुलवा रहा था। लीज पर जमीन भी ले चुका है। नेपाल की लड़की से अफेयर, बनवा रहा घर

चौंकाने वाली बात यह है कि मनोज का अफेयर नेपाल की एक लड़की से चल रहा है। यह लड़की उनकी एक रिश्तेदार की बेटी है। मनोज इससे दूसरी शादी करना चाहता था। इसके लिए नेपाल में अपने खर्चे से घर बनवा रहा था। मनोज घर बनवाने के लिए अपने गांव से मजदूरों को भेजता था। खुद के नाम से 12 प्लॉट, 5 लाख की स्टाम्प ड्यूटी भरी मनोज रजक ने 2009 में सरकारी नौकरी जॉइन की। तब इनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। शुरुआत के 3-4 साल में ही इसने खूब कमाई शुरू कर दी। 2013 में पहली जमीन अपनी पत्नी वीणा भारती के नाम से सुपौल में खरीदी थी। इसके बाद 12 प्लॉट अपने नाम से खरीदे। जमीन के प्लॉट खरीदने के दौरान 5 लाख रुपए की स्टाम्प ड्यूटी भरी। सबसे अधिक सुपौल जिले में 7, दरभंगा में 4 और अररिया जिले में जमीन के 2 प्लॉट मनोज ने खरीदे। मनोज रजक के 3 बैंक अकाउंट मिले अभी तक की जांच में मनोज कुमार रजक के 3 बैंक अकाउंट का पता चला है। तीनों अकाउंट भारतीय स्टेट बैंक में हैं। एक में 53 हजार रुपए, दूसरे में 3.20 हजार रुपए और तीसरे अकाउंट में 400 रुपए मिले हैं। मनोज ने निर्मली में चल रहे ‘इंजीनियर्स एचपी ग्रामीण वितरक’ नाम की गैस एजेंसी लेने के लिए 10 लाख रुपए खर्च किए। इसने SBI और रिलायंस लाइफ की पॉलिसी खरीद रखी है। इस पर 8 लाख रुपए खर्च किए हैं। मनोज ने अपने नाम से 7 लाख रुपए की स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी है। 60 हजार रुपए खर्च कर एक पिस्टल भी ली है। मनोज ने सीमांचल और मिथिलांचल में गुजार दिए 17 साल सूत्र बताते हैं कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मनोज कुमार सेटिंग करने में भी माहिर है। विभाग के अंदर अपनी ऐसी पकड़ बना ली कि हमेशा मनचाही पोस्टिंग मिल जाती है। मनोज ने अपनी नौकरी के 17 साल सीमांचल और मिथिलांचल इलाके में गुजार दिए। दोनों नेपाल बॉर्डर से सटे इलाके हैं। मनोज की पोस्टिंग किशनगंज, कटिहार, अररिया, सुपौल, दरभंगा और मधुबनी में रही है। 26 लाख के इन ट्रांजेक्शन की चल रही है जांच 2023 से लेकर अब तक, मनोज ने कई बड़े ट्रांजेक्शन किए। किसी के अकाउंट में लाखों रुपए भेजे तो किसी को चेक से पैसे दिए। EOU के अधिकारी पता लगा रहे हैं कि उसने किसे और क्यों पैसे दिए। मनोज ने इन 5 ट्रांजेक्शन में 26 लाख रुपए दिए…  

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