‘खिड़ते रहिण गुलाब’ नाटक से दिखाई गदर आंदोलन की वीरांगना की दास्तां

‘खिड़ते रहिण गुलाब’ नाटक से दिखाई गदर आंदोलन की वीरांगना की दास्तां

भास्कर न्यूज | अमृतसर मंच-रंगमंच अमृतसर की ओर से आयोजित 26वें राष्ट्रीय रंगमंच उत्सव के चौथे दिन गदर आंदोलन की महान वीरांगना बीबी गुलाब कौर के संघर्ष ने दर्शकों को झकझोर दिया। विरसा विहार के श्री करतार सिंह दुग्गल ऑडिटोरियम में पंजाबी नाटक ‘खिड़े रहिण गुलाब’ का सफल मंचन किया गया। स्वर्गीय नाटककार जतिंदर बराड़ की स्मृति में चल रहे इस 10 दिवसीय उत्सव में शनिवार की शाम इतिहास, देशभक्ति और वर्तमान व्यवस्था पर तीखे प्रहार के नाम रही। शबदीश द्वारा लिखित और अनीता शबदीश के निर्देशन में तैयार यह नाटक बीबी गुलाब कौर की 100वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष रूप से तैयार किया गया है। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार फिलीपींस (मनीला) में रहने वाली गुलाब कौर अपने पति मान सिंह के साथ गदर पार्टी से जुड़ीं। जब वतन की आजादी के लिए भारत लौटने का आह्वान हुआ और पति ने कदम पीछे खींच लिए, तो गुलाब कौर ने वैवाहिक सुख के बजाय देश सेवा को चुना और अकेले ही गदरियों के जत्थे के साथ भारत लौट आईं। नाटक की पटकथा में एक अनोखा प्रयोग किया गया, गुलाब कौर अपनी मृत्यु के 100 साल बाद आज के ‘आजाद भारत’ में लौटती हैं और वर्तमान स्थितियों को देख अपनी गाथा सुनाती हैं। मंचन के दौरान डॉ. हरभजन सिंह भाटिया, रमेश यादव, विशाल ब्यास, तरलोचन सिंह, जरमनजीत सिंह, राजीव रंधावा, जसविंदर ढिल्लों, हरिंदर रियाड़, डॉ. करमजीत सिंह गिल, सुमित सिंह और भूपिंदर सिंह संधू मौजूद थे।

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