लाड प्यार से बेटे को अमेरिका भेजा था:शव आया तो मां-बहनें छू भी नहीं सकी, पुस्तैनी जमीन तक बेच दी, इकलौते बेटे की मौत के बाद पिता अस्पताल में भर्ती रहे

लाड प्यार से बेटे को अमेरिका भेजा था:शव आया तो मां-बहनें छू भी नहीं सकी, पुस्तैनी जमीन तक बेच दी, इकलौते बेटे की मौत के बाद पिता अस्पताल में भर्ती रहे

डेढ़ साल पहले 20 लाख रुपए में पुस्तैनी जमीन बेचकर परिवार के सपने लेकर अमेरिका गए युवक का शव गांव आया तो हर आंख नम हो गई। मौत के 12 दिन बाद इकलौते बेटे का शव गांव आया तो मां, बहन, दादी बिलखने लगी।। 30 दिसंबर को साइलेंट अटैक आने के बाद खैरथल-तिजारा जिले के जाट बहरोड़ निवासी विपिन चौधरी (24) की मौत हो गई थी। उसके बाद शनिवार सुबह गांव में शव आया ताे भाई को देख बहन बिलखने लगी। दादी ने दूर से पौते के अंतिम दर्शन किए। मां पहले से विकलांग है। बेटे की मौत के बाद पिता हवा सिंह 4 दिन अस्पताल में भर्ती रहा है। परिवार का इकलौता बेटा ही मां-पिता, दादी व बहनों का सपना था। पहले उसकी मौत का पता लगा तो पूरा परिवार सदमें में आ गया था। फिर शव लाने के लिए गुहार लगाते रहे। पिता की तबीयत बिगड़ गई। मां पहले ही मानसिक रूप से कमाजोर थी। अब 12 दिन की मशक्कत के बाद शव आया तो पूरे गांव में शोक पसर गया। मास्क लगाकर आसपास जाना पड़ा गांव में शव आने पर पहले ही परिवार के लोगों को मास्क पहनाने पड़े। असल में कई दिन पुराना शव हो चुका था। इसलिए संक्रमण का डर था। दोनों बहनें बिलखते हुए भाई की तरफ बढ़ी। लेकिन उनको दूर से ही दर्शन करने दिए गए। वे अपने भाई को छू भी नहीं सकी। मां पहले से बेसुध है। दादी ने भी दूर से पौते के दर्शन किए। दादी को पौते की मौत का पता चलने के बाद से सो नहीं पा रही थी। जिसने पहले हाथ जोड़कर सरकार से जल्दी से जल्दी उसके बेटे को भारत लाने की गुहार लगाई थी। डेढ़ साल पहले नौकरी के लिए गया था अमेरिका विपिन चौधरी पुत्र हवा सिंह जून 2024 में नौकरी के लिए अमेरिका गया था। विपिन वहां एक शॉपिंग मॉल में बिलिंग का काम करता था। 29 दिसंबर की रात उसने परिवार से वीडियो कॉल पर बातचीत की थी। विपिन पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा था। अगली सुबह 30 दिसंबर को जब वह नहीं उठा तो साथ रहने वाले दोस्त ने अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव लाने के लिए 7 लाख रुपए होंगे खर्च परिजन के अनुसार विपिन का शव भारत लाने में इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (भारत सरकार) की ओर से करीब साढ़े 7 लाख रुपए का खर्च वहन किया गया है। इस प्रक्रिया में राजस्थान एसोसिएशन ऑफ़ नार्थ अमेरिका ( राना ) न्यू यॉर्क के अध्यक्ष प्रेम भंडारी की अहम भूमिका रही। इनके सहयोग से शव को भारत भेजने की व्यवस्था संभव हो सकी।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *