बेटा बोला-पिता कर्ज की टेंशन में रात में रोते थे:मुझे मना कर खुद गेहूं बेचने चले गए, सदमे से मौत हो गई

बेटा बोला-पिता कर्ज की टेंशन में रात में रोते थे:मुझे मना कर खुद गेहूं बेचने चले गए, सदमे से मौत हो गई

‘पिता कर्ज से तनाव में थे। 10 दिन पहले रात में कमरे में अकेले रो रहे थे। गुस्से में मैंने उनका मोबाइल लेकर तोड़ दिया और पानी में डाल दिया। पिता से कहा था- आप मेरा मोबाइल रख लो, ताकि कर्ज मांगने वाले परेशान नहीं करेंगे। मुझे क्या पता था, कर्ज के सदमे से उनकी मौत हो जाएगी।’ यह दर्द है कोटा के झाड़आमली निवासी अजय वैष्णव का। अजय के पिता हंसराज वैष्णव (54) आठ अप्रैल को कोटा की भामाशाह मंडी में गेहूं की फसल बेचने आए थे। ओलावृष्टि से उनकी फसल खराब हो गई थी, इसलिए भाव कम लगा। नीलामी के दौरान उनकी अचानक से तबीयत बिगड़ी और हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई। खबर पढ़ें बेटा बोला- ब्याज चुकाना भी मुश्किल हो रहा अजय ने बताया- हमारे पास 2 बीघा खाते की जमीन है। घर में पिता, पत्नी, बेटी सहित कुल 4 सदस्य थे। अब पिता की मौत हो चुकी है। मां का 15 साल पहले देहांत हो चुका था। पिता ने जैसे-तैसे मेहनत-मजदूरी करके मुझे पढ़ाया। वे किराए (लीज) पर जमीन लेकर खेती करते थे। रिश्तेदारों, आढ़तियों, गांव वालों से कर्ज लेकर जैसे-तैसे परिवार चलाते थे। तीन साल पहले मेरी शादी के लिए 2.87 लाख का कर्ज लिया था। अजय ने बताया- इस बार भी 10 बीघा जमीन किराए पर लेकर गेहूं की फसल की थी। बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब हो गई। पिता इसे लेकर तनाव में थे। उन्होंने ये कभी नहीं बताया कि किस-किस से, कितना कर्ज ले रखा है। अक्सर उनके पास रुपए मांगने वालों के फोन आते थे। दो साल से फसल अच्छी नहीं हुई। ब्याज चुकाना भी मुश्किल हो रहा था। कर्ज देने वालों के फोन आते थे तो तोड़ दिया मोबाइल अजय ने बताया- 10 दिन पहले पिता रात को अपने कमरे में बैठे अकेले रो रहे थे। मुझसे उनका दुख देखा नहीं गया। मैंने गुस्से में उनका मोबाइल फोन लेकर तोड़ दिया और पानी में पटक दिया। उन्हें मेरा मोबाइल दे दिया। उन्हें कहा था- आप मेरा फोन इस्तेमाल करो। आपके पास किसी भी कर्ज देने वाले का फोन नहीं आएगा। लेकिन पिता ने मेरा फोन नहीं लिया, वापस मुझे दे दिया। मैंने बेचने के लिए कहा तो मना कर दिया अजय ने बताया- 8 अप्रैल को पिता ने तड़के उठकर पिकअप में गेहूं भरे। गेहूं से पिकअप पूरी नहीं भरी तो पिता की आंख में आंसू दिखे। मैंने उनसे गांव में रुकने को कहा। मैंने कहा- माल बेचने के लिए मैं कोटा की भामाशाह मंडी जाऊंगा, लेकिन पिता नहीं माने। वे खुद मंडी चले गए। इसके बाद सुबह 11 बजे के आसपास उनकी तबीयत खराब होने की सूचना मिली। मैं बाइक लेकर स्पीड से गांव से मंडी पहुंचा। जल्दबाजी में फोन घर पर ही भूल गया। मंडी में आने के बाद लोगों से पिता के बारे में पूछा, लेकिन किसी ने नहीं बताया। बात करने के लिए फोन मांगा, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। बाद में एक भैया ने फोन दिया, तब जाकर बात हुई। पता लगा पिता हॉस्पिटल में हैं। अजय ने बताया- इसी महीने आखातीज को कर्ज देने वालों का हिसाब करना था। चाचा के लड़के की शादी थी। पिता की मौत के बाद शादी की तारीख को आगे बढ़ाया है। 26 अप्रैल को मेरी बेटी का जन्मदिन है। मई में मेरी शादी की सालगिरह है। प्रकृति के कहर से मेरा सबकुछ बर्बाद हो गया। बेमौसम बारिश से फसलें हुईं खराब… कुछ इसी तरह का दर्द जिले के इटावा उपखंड के निमोला, बागली, कैथूदा, छापोल ग्राम पंचायत के गांवों के किसानों का है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों की गेहूं की फसल खेत में खड़ी-खड़ी बर्बाद हो गई। किसान बोले- पटवारी ने निरीक्षण किया, मदद नहीं मिली इटावा उपखंड के निमोला ग्राम पंचायत निवासी नन्हे खां ने बताया- गांव वालों से 1 लाख का कर्ज लिया, फिर 12 बीघा जमीन किराए (लीज) से लेकर गेहूं उगाए थे। इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी। सोचा था कि बेटे की शादी कर दूंगा। ओलावृष्टि से खेत में खड़ी फसल खराब हो गई। हम तीन-भाइयों के बीच 12 बीघा खाते की जमीन है। उसमें सरसों की फसल की थी। वो काट ली थी। घर में संयुक्त परिवार में 12 सदस्य रहते हैं। सब खेती पर निर्भर हैं। ओलावृष्टि से नुकसान लगा है। तहसीलदार पटवारी मौका निरीक्षण के लिए आए थे, लेकिन अभी तक मदद नहीं मिली। बेटे की शादी का विचार टाल दिया है। अब फिर कर्जा लेकर खेती करनी पड़ेगी। 8 बीघा में फसल पूरी खराब, तीन बोरी निकला गेहूं बागली ग्राम पंचायत के गुवाड़ी गांव निवासी सोभाग मीणा ने बताया- परिवार में माता-पिता, पत्नी, बच्चे, भाई-भाभी, भतीजी-भतीजे समेत 12 सदस्य हैं। कुल 25 बीघा जमीन है। इस बार 25 बीघा जमीन में गेहूं की फसल की थी। इसमें से 8 बीघा में पकी हुई फसल पूरी खराब हो गई। केवल तीन बोरी गेहूं निकला है। वहीं बाकी जमीन में एक बीघा में 3 बोरी गेहूं का हिसाब आया है। जबकि एक बीघा में 8-9 बोरी निकलने चाहिए थे। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान हो गया है। सोभाग मीणा ने बताया- पिछले साल भी 25 बीघा में सोयाबीन की फसल खराब हो गई थी। बैंक से 5-6 लाख की केसीसी का लोन है। 11 प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं। पिछली बार न मुआवजा मिला, न बीमा क्लेम मिला। इस बार अच्छी फसल होने की उम्मीद थी, लेकिन बारिश व ओलावृष्टि से उम्मीद खत्म हो गई। इस साल बड़े भाई की बेटी (भतीजी) की शादी करने का विचार था, जो कैंसिल कर दिया है।

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