Shahid Kapoor की लीन बॉडी का सीक्रेट है सुबह जल्दी उठना और वेज डाइट, इन टिप्स से आप भी 40+ में रह सकते हैं फिट

Shahid Kapoor की लीन बॉडी का सीक्रेट है सुबह जल्दी उठना और वेज डाइट, इन टिप्स से आप भी 40+ में रह सकते हैं फिट

Shahid Kapoor Fitness Tips: ​बॉलीवुड में जब भी सबसे फिट और स्टाइलिश एक्टर्स की बात होती है, तो शाहिद कपूर का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 40+ की उम्र पार करने के बाद भी शाहिद इतने लीन और टोन्ड कैसे दिखते हैं? अक्सर लोग उनकी फिटनेस का श्रेय केवल वर्कआउट को देते हैं, लेकिन असल कहानी उनके सुबह जल्दी उठने से लेकर शुद्ध शाकाहारी डाइट में छिपी है। आइए जानते हैं शाहिद कपूर के उस डेली रूटीन के बारे में, जो उन्हें स्क्रीन पर और असल जिंदगी में एक ‘फिटनेस आइकन’ बनाता है।

सूरज उगने से पहले का रूटीन

शाहिद कपूर का मानना है कि दिन की सही शुरुआत ही आपकी पूरे दिन की एनर्जी तय करती है। जब वे शूटिंग कर रहे होते हैं, तो उनका शेड्यूल काफी कड़ा होता है। शाहिद बताते हैं कि वे सेट पर जाने से लगभग साढ़े तीन घंटे पहले उठ जाते हैं। उठते ही वे सबसे पहले सांस लेने की कुछ खास तकनीक (Breathing Exercises) अपनाते हैं, जिससे मन शांत और बॉडी एक्टिव हो जाता है। वे अक्सर सुबह खाली पेट ट्रेनिंग करना पसंद करते हैं ताकि बॉडी एनर्जेटिक बनी रहें। बिजी शेड्यूल के बावजूद वे सुबह का कुछ समय अपनी फैमिली के साथ बिताते हैं, जो उन्हें मेंटली फिट रखता है।

डाइट का फंडा: न वेट मशीन, न ही कोई सख्त पाबंदी

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Shahid Kapoor Handsome Look | (फोटो सोर्स- shahidkapoor/ Instagram)

आजकल जहां सेलिब्रिटीज अपना खाना तौलकर (Weighed meals) खाते हैं, वहीं शाहिद इस मामले में थोड़े पुराने ख्यालों के हैं। वे पूरी तरह से शाकाहारी (Vegetarian) हैं। उनकी डाइट में दालें, हरी सब्जियां और फ्रूट्स शामिल होते हैं। शाहिद कहते हैं, ‘मैं अपना खाना तौलकर नहीं खाता, लेकिन मैं यह जानता हूं कि क्या खाना है और कब खाना है।’ शाहिद कपूर बताते हैं कि वे दिन में हैवी खाने की जगह थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाते हैं। वे भारी और जंक फूड से पूरी तरह परहेज करते हैं। देर रात खाना खाने से वे बचते हैं ताकि उनके डाइजेशन और एनर्जी लेवल पर बुरा असर न पड़े।

सिर्फ डोले-शोले नहीं, मोबिलिटी पर फोकस

शाहिद के लिए वर्कआउट का मतलब सिर्फ मसल्स बनाना नहीं है। उनके रूटीन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ-साथ फंक्शनल ट्रेनिंग और मोबिलिटी वर्क शामिल होता है। वे इसे बोरियत से बचने के लिए कभी-कभी कार्डियो या कोई खेल (Sports) भी खेलते हैं। उनका गोल एक ऐसी बॉडी पाना है जो न केवल दिखने में अच्छी हो, बल्कि चोट मुक्त (Injury free) और लचीली (flexible) भी हो।

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