भागलपुर में जर्जर सामुदायिक भवन की छत सोमवार को गिर गई। हादसे में 3 बच्चे सहित 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायलों की पहचान प्रेम लता देवी, 12 वर्षीय फूल कुमारी, 2 वर्षीय शिवम कुमार और मुन्नी कुमारी के रूप में हुई है। ये सभी हरिजन टोला के निवासी हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। छत गिरने से तेज आवाज हुई और लोग मलबे के नीचे दब गए। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। घटना नाथनगर प्रखंड नूरपुर पंचायत के हरिजन टोला में हुई है। मरम्मत के लिए कई बार कहा गया था, पर एक्शन नहीं ग्रामीण क्रांति दास ने जानकारी दी कि यह सामुदायिक भवन काफी पुराना और जर्जर हालत में था। ग्रामीणों ने इसकी मरम्मत के लिए कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रखंड कार्यालय में शिकायतें की थीं। हालांकि, इन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार को मौसम बदलने के बाद धूप निकली थी। कई ग्रामीण अपने बच्चों के साथ सामुदायिक भवन के चौपाल पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जोरदार आवाज के साथ भवन की छत ढह गई। ग्रामीणों की तत्परता से घायलों को मलबे से समय रहते बाहर निकाल लिया। भागलपुर में जर्जर सामुदायिक भवन की छत सोमवार को गिर गई। हादसे में 3 बच्चे सहित 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायलों की पहचान प्रेम लता देवी, 12 वर्षीय फूल कुमारी, 2 वर्षीय शिवम कुमार और मुन्नी कुमारी के रूप में हुई है। ये सभी हरिजन टोला के निवासी हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। छत गिरने से तेज आवाज हुई और लोग मलबे के नीचे दब गए। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। घटना नाथनगर प्रखंड नूरपुर पंचायत के हरिजन टोला में हुई है। मरम्मत के लिए कई बार कहा गया था, पर एक्शन नहीं ग्रामीण क्रांति दास ने जानकारी दी कि यह सामुदायिक भवन काफी पुराना और जर्जर हालत में था। ग्रामीणों ने इसकी मरम्मत के लिए कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रखंड कार्यालय में शिकायतें की थीं। हालांकि, इन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार को मौसम बदलने के बाद धूप निकली थी। कई ग्रामीण अपने बच्चों के साथ सामुदायिक भवन के चौपाल पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जोरदार आवाज के साथ भवन की छत ढह गई। ग्रामीणों की तत्परता से घायलों को मलबे से समय रहते बाहर निकाल लिया।


