औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सभागार में मंगलवार को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजीव रंजन कुमार ने की। उन्होंने 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली वर्ष की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में मीडिया प्रतिनिधियों को विस्तृत जानकारी दी। प्रधान जिला जज ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य सुलहनीय वादों का त्वरित और आपसी सहमति से निस्तारण करना है, जिससे लोगों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के सफल आयोजन और इसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूर्व में आयोजित लोक अदालतों के प्रचार-प्रसार में सहयोग देने के लिए सभी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का आभार भी व्यक्त किया। पक्षकारों को भेजा गया है सुलहनीय वादों से संबंधित नोटिस उन्होंने बताया कि 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए न्यायालय में लंबित सभी प्रकार के सुलहनीय वादों से संबंधित नोटिस विभिन्न थानों के माध्यम से पक्षकारों तक पहुंचाए गए हैं। इसके अलावा तामिला प्रतिवेदन में प्राप्त मोबाइल नंबर के आधार पर भी संबंधित पक्षकारों को फोन कर लोक अदालत के दिन उपस्थित रहने की सूचना दी जा रही है। प्रधान जिला जज ने बताया कि इस लोक अदालत को सफल बनाने के लिए जिला के विभिन्न विभागों और न्यायिक अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें की गई हैं। सभी विभागों को अपने-अपने विभाग से जुड़े सुलहनीय वादों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है ताकि अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण संभव हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मीडिया के सहयोग से इस बार भी लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन होगा। प्री लिटिगेशन से जुड़े 5610 मामले किए गए हैं चिन्हित इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने वादों से संबंधित आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक स्तर पर अब तक न्यायालय में लंबित 3560 सुलहनीय वादों की पहचान की गई है। इनमें से 70 मामलों में पक्षकारों की सहमति बन चुकी है। इसके साथ ही इस लोक अदालत में लगभग 600 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्री-लिटिगेशन के तहत बैंक ऋण से जुड़े 5610 से अधिक मामलों में पक्षकारों को नोटिस भेजे गए हैं। इनमें से करीब 1500 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और आगे भी मामलों की संख्या बढ़ने की संभावना है। बिजली बिल और यातायात चालान माफी से संबंधित अफवाहों पर न दे ध्यान प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधान जिला जज और सचिव ने संयुक्त रूप से जिलावासियों से अपील की कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से कराएं। प्रधान जिला जज ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर बिजली बिल माफी और यातायात चालान माफी से संबंधित कई भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। 12 बेंच का किया गया है गठन सचिव तान्या पटेल ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद और अनुमंडलीय न्यायालय दाउदनगर को मिलाकर कुल 12 बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों के माध्यम से पारिवारिक मामले, भरण-पोषण वाद, मोटर दुर्घटना मामले, बैंक ऋण, आपराधिक सुलहनीय मामले, श्रम, खनिज, वन, विद्युत तथा मापतौल से जुड़े मामलों का निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न बेंचों में अलग-अलग न्यायालयों से संबंधित मामलों का निष्पादन किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक मामलों का त्वरित समाधान संभव हो सके। बेंचों से संबंधित विस्तृत जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सूचना-पट्ट पर भी उपलब्ध करा दी गई है, जिससे न्यायालय आने वाले लोगों को जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद पत्रकारों ने भी राष्ट्रीय लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का भरोसा दिया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से बड़ी संख्या में मामलों का समाधान होगा और लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में तेजी से राहत मिल सकेगी। औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सभागार में मंगलवार को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजीव रंजन कुमार ने की। उन्होंने 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली वर्ष की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में मीडिया प्रतिनिधियों को विस्तृत जानकारी दी। प्रधान जिला जज ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य सुलहनीय वादों का त्वरित और आपसी सहमति से निस्तारण करना है, जिससे लोगों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के सफल आयोजन और इसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूर्व में आयोजित लोक अदालतों के प्रचार-प्रसार में सहयोग देने के लिए सभी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का आभार भी व्यक्त किया। पक्षकारों को भेजा गया है सुलहनीय वादों से संबंधित नोटिस उन्होंने बताया कि 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए न्यायालय में लंबित सभी प्रकार के सुलहनीय वादों से संबंधित नोटिस विभिन्न थानों के माध्यम से पक्षकारों तक पहुंचाए गए हैं। इसके अलावा तामिला प्रतिवेदन में प्राप्त मोबाइल नंबर के आधार पर भी संबंधित पक्षकारों को फोन कर लोक अदालत के दिन उपस्थित रहने की सूचना दी जा रही है। प्रधान जिला जज ने बताया कि इस लोक अदालत को सफल बनाने के लिए जिला के विभिन्न विभागों और न्यायिक अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें की गई हैं। सभी विभागों को अपने-अपने विभाग से जुड़े सुलहनीय वादों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है ताकि अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण संभव हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मीडिया के सहयोग से इस बार भी लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन होगा। प्री लिटिगेशन से जुड़े 5610 मामले किए गए हैं चिन्हित इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने वादों से संबंधित आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक स्तर पर अब तक न्यायालय में लंबित 3560 सुलहनीय वादों की पहचान की गई है। इनमें से 70 मामलों में पक्षकारों की सहमति बन चुकी है। इसके साथ ही इस लोक अदालत में लगभग 600 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्री-लिटिगेशन के तहत बैंक ऋण से जुड़े 5610 से अधिक मामलों में पक्षकारों को नोटिस भेजे गए हैं। इनमें से करीब 1500 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और आगे भी मामलों की संख्या बढ़ने की संभावना है। बिजली बिल और यातायात चालान माफी से संबंधित अफवाहों पर न दे ध्यान प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधान जिला जज और सचिव ने संयुक्त रूप से जिलावासियों से अपील की कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से कराएं। प्रधान जिला जज ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर बिजली बिल माफी और यातायात चालान माफी से संबंधित कई भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। 12 बेंच का किया गया है गठन सचिव तान्या पटेल ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद और अनुमंडलीय न्यायालय दाउदनगर को मिलाकर कुल 12 बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों के माध्यम से पारिवारिक मामले, भरण-पोषण वाद, मोटर दुर्घटना मामले, बैंक ऋण, आपराधिक सुलहनीय मामले, श्रम, खनिज, वन, विद्युत तथा मापतौल से जुड़े मामलों का निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न बेंचों में अलग-अलग न्यायालयों से संबंधित मामलों का निष्पादन किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक मामलों का त्वरित समाधान संभव हो सके। बेंचों से संबंधित विस्तृत जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सूचना-पट्ट पर भी उपलब्ध करा दी गई है, जिससे न्यायालय आने वाले लोगों को जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद पत्रकारों ने भी राष्ट्रीय लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का भरोसा दिया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से बड़ी संख्या में मामलों का समाधान होगा और लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में तेजी से राहत मिल सकेगी।


