रांची को राजधानी बने 25 वर्ष हो गए। इस दौरान तीन बार शहर की सरकार को शहर की सूरत बदलने का मौका मिला। तीन मेयर बने और पार्षदों को हरेक क्षेत्र में काम करने का मौका मिला। योजनाएं बनीं, घोषणाएं हुईं, बजट पास हुए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी अधूरे वादों और बुनियादी समस्याओं से जूझती नजर आती है। जनता नेताओं से पूछ रही है कि हर साल पहली ही बारिश में कॉलोनियां झील क्यों डूब जाती हैं। सड़कें वर्षों से जर्जर क्यों हैं। अबतक हर घर में सप्लाई वाटर क्यों नहीं पहुंच पाया है। जनता के इन तीखे सवालों का नेताओं के पास कोई जवाब नहीं है। पर निकल पड़े हैं गली-मोहल्लों में अपने लिए वोट मांगने।
इस बार भी नगर निगम चुनाव में 11 मेयर प्रत्याशी और 364 पार्षद प्रत्याशी रांची को महानगर की तर्ज पर विकसित करने का दावा कर रहे हैं। इन सबके बीच दैनिक भास्कर की टीम ने रांची के 100 लोगों से शहर के मुद्दे पर बात की। इसमें 80% लोगों ने कहा कि शहर की सरकार जो भी बनाएं वो पुराने वादों को ही पूरा कर दें तो रांची के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसमें खुले नालों और जलजमाव दूर करने सीवरेज-ड्रेनेज बनाने, मुहल्लों को रोशन करने और वेंडरों के लिए जगह तय करने, निगम में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की मांग उठी। पेश है इस बार भी शहर की सरकार से जनता की उम्मीदें क्या है… हर घर को मिले पानी, कोई प्यासा न रहे रांची नगर निगम क्षेत्र में 2.25 लाख से अधिक घर हैं। लेकिन अभी भी करीब 60 हजार घरों को ही पाइपलाइन से पानी मिलता है। नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको की ओर से पिछले 5 वर्षों से शहर के विभिन्न जोन में पाइप बिछाई गई है। 30 हजार से अधिक घरों में पाइप से कनेक्शन दे दिया गया, लेकिन पिछले ढाई वर्षों से लोगों को पानी का इंतजार है। आज भी शहर के 150 से अधिक मुहल्ले निगम के टैंकर के पानी पर निर्भर है। पानी के लिए रतजगा करना पड़ता है। खुली नाली और जलजमाव से मिले मुक्ति शहर में करीब 1400 किमी लंबी नाली नगर निगम की है। इसके अलावा पथ निर्माण विभाग और एनएचएआई की नाली है। लेकिन नगर निगम की नालियां जानलेवा है। क्योंकि, अधिकतर नालियां खुली हुई है। खुले नाले में डूबने से पिछले 7 सालों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे बड़ी बात है कि 90% नालियां एकदूसरे से नहीं जुड़ी हैं। नतीजा है कि हल्की बारिश में भी करीब 40 वार्डों में जलजमाव हो जाता है। कहने को रोड, सड़क का पता नहीं तीन बड़े मुद्दे जिनपर राजनीति चुप, सवालों पर मेयर व वार्ड प्रत्याशी परेशान धुर्वा आदर्श नगर में पानी की किल्ल्त शहर के 53 वार्डों में निगम की करीब 1600 किमी सड़क है। लेकिन अधिकतर सड़कों की हालत खराब है। जर्जर सड़कों से रोजाना हिचकोले खाते हुए लोगों को गुजरना पड़ता है। निगम हरेक साल सड़क निर्माण पर करीब 30 से 40 करोड़ रुपए खर्च करता है। इसके बावजूद मुहल्लों की सड़कें चलने लायक नहीं है। क्योंकि, सड़क के निर्माण में गुणवत्ता ही नहीं होती है। निगम के आंकड़े की मानें तो अभी भी 100 से अधिक मुहल्ले ऐसे हैं जहां कच्ची सड़कें है। नई सरकार से लोग सभी वार्डों में सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने और नई सड़क बनाने की उम्मीद कर रहे हैं। रांची को राजधानी बने 25 वर्ष हो गए। इस दौरान तीन बार शहर की सरकार को शहर की सूरत बदलने का मौका मिला। तीन मेयर बने और पार्षदों को हरेक क्षेत्र में काम करने का मौका मिला। योजनाएं बनीं, घोषणाएं हुईं, बजट पास हुए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी अधूरे वादों और बुनियादी समस्याओं से जूझती नजर आती है। जनता नेताओं से पूछ रही है कि हर साल पहली ही बारिश में कॉलोनियां झील क्यों डूब जाती हैं। सड़कें वर्षों से जर्जर क्यों हैं। अबतक हर घर में सप्लाई वाटर क्यों नहीं पहुंच पाया है। जनता के इन तीखे सवालों का नेताओं के पास कोई जवाब नहीं है। पर निकल पड़े हैं गली-मोहल्लों में अपने लिए वोट मांगने।
इस बार भी नगर निगम चुनाव में 11 मेयर प्रत्याशी और 364 पार्षद प्रत्याशी रांची को महानगर की तर्ज पर विकसित करने का दावा कर रहे हैं। इन सबके बीच दैनिक भास्कर की टीम ने रांची के 100 लोगों से शहर के मुद्दे पर बात की। इसमें 80% लोगों ने कहा कि शहर की सरकार जो भी बनाएं वो पुराने वादों को ही पूरा कर दें तो रांची के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसमें खुले नालों और जलजमाव दूर करने सीवरेज-ड्रेनेज बनाने, मुहल्लों को रोशन करने और वेंडरों के लिए जगह तय करने, निगम में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की मांग उठी। पेश है इस बार भी शहर की सरकार से जनता की उम्मीदें क्या है… हर घर को मिले पानी, कोई प्यासा न रहे रांची नगर निगम क्षेत्र में 2.25 लाख से अधिक घर हैं। लेकिन अभी भी करीब 60 हजार घरों को ही पाइपलाइन से पानी मिलता है। नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको की ओर से पिछले 5 वर्षों से शहर के विभिन्न जोन में पाइप बिछाई गई है। 30 हजार से अधिक घरों में पाइप से कनेक्शन दे दिया गया, लेकिन पिछले ढाई वर्षों से लोगों को पानी का इंतजार है। आज भी शहर के 150 से अधिक मुहल्ले निगम के टैंकर के पानी पर निर्भर है। पानी के लिए रतजगा करना पड़ता है। खुली नाली और जलजमाव से मिले मुक्ति शहर में करीब 1400 किमी लंबी नाली नगर निगम की है। इसके अलावा पथ निर्माण विभाग और एनएचएआई की नाली है। लेकिन नगर निगम की नालियां जानलेवा है। क्योंकि, अधिकतर नालियां खुली हुई है। खुले नाले में डूबने से पिछले 7 सालों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे बड़ी बात है कि 90% नालियां एकदूसरे से नहीं जुड़ी हैं। नतीजा है कि हल्की बारिश में भी करीब 40 वार्डों में जलजमाव हो जाता है। कहने को रोड, सड़क का पता नहीं तीन बड़े मुद्दे जिनपर राजनीति चुप, सवालों पर मेयर व वार्ड प्रत्याशी परेशान धुर्वा आदर्श नगर में पानी की किल्ल्त शहर के 53 वार्डों में निगम की करीब 1600 किमी सड़क है। लेकिन अधिकतर सड़कों की हालत खराब है। जर्जर सड़कों से रोजाना हिचकोले खाते हुए लोगों को गुजरना पड़ता है। निगम हरेक साल सड़क निर्माण पर करीब 30 से 40 करोड़ रुपए खर्च करता है। इसके बावजूद मुहल्लों की सड़कें चलने लायक नहीं है। क्योंकि, सड़क के निर्माण में गुणवत्ता ही नहीं होती है। निगम के आंकड़े की मानें तो अभी भी 100 से अधिक मुहल्ले ऐसे हैं जहां कच्ची सड़कें है। नई सरकार से लोग सभी वार्डों में सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने और नई सड़क बनाने की उम्मीद कर रहे हैं।


