अलवर. दीवान जी का बाग की जमीन पर जारी 11 पट्टों के निरस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई है। नगर निगम ने नगरपालिका अधिनियम की धारा 73बी के तहत पट्टाधारकों को नोटिस देकर सात दिन में जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पट्टा निरस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही, पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग को भी निगम ने पत्र लिखा है कि बाग की जमीन के दूसरे भूखंडों की रजिस्ट्री नहीं करें। उधर, तहसीलदार को भू-रूपांतरण निरस्त के लिए संभागीय आयुक्त के पास अपील करनी होगी। यह बाग स्कीम नंबर 10 बी में है। जमीन मास्टर प्लान में ग्रीनबेल्ट में दर्ज है, जिसका खसरा संख्या 1254 से 1259 तक है।
राजस्थान पत्रिका ने मुद्दा उठाया तो हरकत में आया प्रशासन
राजस्थान पत्रिका ने मामले को उजागर किया। इसके बाद प्रशासन ने एडीएम सिटी बीना महावर की अध्यक्षता में संयुक्त जांच टीम बनाई। टीम ने जांच की तो सामाने आया कि बाग के भू-रूपांतरण में एक भी नियम का पालन नहीं पाया गया। प्रशासन ने निगम को कार्रवाई के आदेश दिए थे, जिसके बाद निगम ने यह नोटिस जारी किए हैं। अब निगम को जवाब का इंतजार है, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके।
विधानसभा में भी गूंजा था मामला
यह मामला प्रदेशस्तर पर पहुंच चुका है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक इंदिरा ने यह मामला उठाया था। गौरतलब है कि वर्ष 1980 में यूआइटी स्कीम नंबर 10बी धरातल पर लाने के लिए दीवान जी का बाग भी अधिग्रहित कर लिया, लेकिन इस जमीन के खातेदार शांतिस्वरूप जैन सरकार के पास पहुंचकर बाग को बचाया। उनके निधन के बाद इस बाग को उजाड़ने से लेकर भू रूपांतरण कराने व प्लॉटिंग कराने का खेल शुरू हो गया।
तहसीलदार को करनी होगी संभागीय आयुक्त के पास अपील
तहसीलदार अलवर को दीवान जी का बाग की जमीन का भू रूपांतरण निरस्त करवाने के लिए संभागीय आयुक्त के यहां अपील करनी होगी। सरकारी वकील रहे अशोक कुद्दल के मुताबिक, लैंड रेवेन्यू एक्ट के अनुसार 90ए (9) का अधिकार नगर निगम के पास है, लेकिन उसके निरस्तीकरण के अधिकार संभागीय आयुक्त के पास हैं। लैंड होल्डर तहसीलदार अलवर हैं। ऐसे में उन्हें संभागीय आयुक्त के यहां अपील करनी होगी।


