गोपालगंज के मॉडल अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मंडल कारा से इलाज के लिए लाए गए एक बंदी ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान बंदी ने न केवल अस्पताल प्रशासन को परेशान किया, बल्कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के भी पसीने छुड़ा दिए। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने इस घटना का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह कैदी किसी मामले में जेल में बंद था। उसकी तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उसे इलाज के लिए मॉडल अस्पताल भेजा था। अस्पताल पहुंचने के बाद बीमार हालत में लाए गए इस कैदी ने अचानक उग्र रूप धारण कर लिया। भागने की कोशिश कर पुलिसकर्मियों से उलझा वह काफी बेचैन था और कई बार अपने हाथ में लगी हथकड़ी को सरका कर निकालने का प्रयास करता रहा। उसने भागने की भी कोशिश की और पुलिसकर्मियों से उलझने लगा। बंदी ने शोर-शराबा किया और इलाज में सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया। बंदी का व्यवहार इतना हिंसक और अनियंत्रित हो गया था कि उसे संभालना मुश्किल हो रहा था। वह बेड से कूदने और खुद को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। अस्पताल में मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन इस हंगामे को देखकर दहशत में आ गए। सुरक्षाकर्मियों ने हाथ-पैर को बेड से बांधा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे शांत कराने की कई कोशिशें कीं। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और बंदी की जान बचाने के लिए कोई और विकल्प नहीं बचा, तो सुरक्षाकर्मियों ने उसके हाथ और पैर को बेड से बांध दिया। रस्सी और पट्टियों से जकड़े जाने के बाद ही डॉक्टर उसका चेकअप कर पाए और उसे जरूरी दवाइयां व इंजेक्शन दिए जा सके। घंटों तक चले इस ड्रामे के बाद जब दवा का असर हुआ, तब जाकर बंदी शांत हुआ। डॉक्टर शिवशंकर के मुताबित शुगर लेवल काफी काम होने के कारण उसकी तबियत बिगड़ी थी। गोपालगंज के मॉडल अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मंडल कारा से इलाज के लिए लाए गए एक बंदी ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान बंदी ने न केवल अस्पताल प्रशासन को परेशान किया, बल्कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के भी पसीने छुड़ा दिए। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने इस घटना का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह कैदी किसी मामले में जेल में बंद था। उसकी तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उसे इलाज के लिए मॉडल अस्पताल भेजा था। अस्पताल पहुंचने के बाद बीमार हालत में लाए गए इस कैदी ने अचानक उग्र रूप धारण कर लिया। भागने की कोशिश कर पुलिसकर्मियों से उलझा वह काफी बेचैन था और कई बार अपने हाथ में लगी हथकड़ी को सरका कर निकालने का प्रयास करता रहा। उसने भागने की भी कोशिश की और पुलिसकर्मियों से उलझने लगा। बंदी ने शोर-शराबा किया और इलाज में सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया। बंदी का व्यवहार इतना हिंसक और अनियंत्रित हो गया था कि उसे संभालना मुश्किल हो रहा था। वह बेड से कूदने और खुद को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। अस्पताल में मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन इस हंगामे को देखकर दहशत में आ गए। सुरक्षाकर्मियों ने हाथ-पैर को बेड से बांधा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे शांत कराने की कई कोशिशें कीं। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और बंदी की जान बचाने के लिए कोई और विकल्प नहीं बचा, तो सुरक्षाकर्मियों ने उसके हाथ और पैर को बेड से बांध दिया। रस्सी और पट्टियों से जकड़े जाने के बाद ही डॉक्टर उसका चेकअप कर पाए और उसे जरूरी दवाइयां व इंजेक्शन दिए जा सके। घंटों तक चले इस ड्रामे के बाद जब दवा का असर हुआ, तब जाकर बंदी शांत हुआ। डॉक्टर शिवशंकर के मुताबित शुगर लेवल काफी काम होने के कारण उसकी तबियत बिगड़ी थी।


