लक्ष्मीपुर गुरुद्वारा की अमूल्य धरोहर का होगी डिजिटलीकरण:कला एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने गुरु गोविंद सिंह जी के ऐतिहासिक हुकूमनामे का अवलोकन किया

लक्ष्मीपुर गुरुद्वारा की अमूल्य धरोहर का होगी डिजिटलीकरण:कला एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने गुरु गोविंद सिंह जी के ऐतिहासिक हुकूमनामे का अवलोकन किया

कला एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने कटिहार जिले के बरारी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक श्री गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा, लक्ष्मीपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों और धार्मिक ग्रंथों का गहन अवलोकन किया। अमूल्य धरोहरों के संरक्षण और डिजिटलीकरण पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज से संबंधित एक ऐतिहासिक हुकूमनामे का भी अवलोकन किया। उन्होंने इस दुर्लभ दस्तावेज को सिख इतिहास और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनमोल निधि बताया। अधिकारियों के अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। कला एवं संस्कृति विभाग की पदाधिकारी कुमारी रीना गुप्ता ने बताया कि गुरुद्वारा में संरक्षित सभी पांडुलिपियों और ग्रंथों का शीघ्र ही डिजिटलीकरण किया जाएगा। इससे ये बहुमूल्य दस्तावेज लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे और देश-विदेश के शोधकर्ताओं तथा भावी पीढ़ियों को भी इनका लाभ मिल सकेगा। उन्होंने विभाग की ओर से आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने विभाग की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव बीरेंद्र सिंह, सचिव गुलविंदर सिंह, निगरानी समिति के अध्यक्ष शनिंदर सिंह और प्रदीप सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस पहल से क्षेत्र में ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है। कला एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने कटिहार जिले के बरारी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक श्री गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा, लक्ष्मीपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों और धार्मिक ग्रंथों का गहन अवलोकन किया। अमूल्य धरोहरों के संरक्षण और डिजिटलीकरण पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज से संबंधित एक ऐतिहासिक हुकूमनामे का भी अवलोकन किया। उन्होंने इस दुर्लभ दस्तावेज को सिख इतिहास और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनमोल निधि बताया। अधिकारियों के अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। कला एवं संस्कृति विभाग की पदाधिकारी कुमारी रीना गुप्ता ने बताया कि गुरुद्वारा में संरक्षित सभी पांडुलिपियों और ग्रंथों का शीघ्र ही डिजिटलीकरण किया जाएगा। इससे ये बहुमूल्य दस्तावेज लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे और देश-विदेश के शोधकर्ताओं तथा भावी पीढ़ियों को भी इनका लाभ मिल सकेगा। उन्होंने विभाग की ओर से आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने विभाग की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव बीरेंद्र सिंह, सचिव गुलविंदर सिंह, निगरानी समिति के अध्यक्ष शनिंदर सिंह और प्रदीप सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस पहल से क्षेत्र में ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है।  

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