खाड़ी क्षेत्र में ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच गोंडा जिले के कई लोग प्रभावित इलाकों में फंसे हुए हैं। परिजन लगातार वीडियो कॉल के जरिए उनका हाल-चाल ले रहे हैं और भारत सरकार से सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं। सायरन बजते ही बंकरों में छिप रहे नवाबगंज थाना क्षेत्र के लिदेहना ग्रंट गांव निवासी राम सुरेश निषाद 14 महीने पहले इज़राइल काम के सिलसिले में गए थे। वे प्लास्टर ऑफ पेरिस का काम करते हैं और होली पर घर आने की योजना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण वहीं फंसे हुए हैं। राम सुरेश की पत्नी मीना देवी और मां फूला देवी ने रविवार को वीडियो कॉल पर उनसे बात की। राम सुरेश ने बताया कि उनके ठिकाने से करीब पांच किलोमीटर दूर हमलों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। सायरन बजते ही वे लोग बंकरों में जाकर शरण लेते हैं। फिलहाल वे सुरक्षित स्थान पर हैं, लेकिन हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। एयरपोर्ट से लौटाए गए दिनेश छपिया थाना क्षेत्र के सैजलपुर गांव निवासी दिनेश वर्मा दुबई में फंसे हैं। उन्हें 1 मार्च को भारत लौटना था, लेकिन एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उन्हें वापस कमरे पर भेज दिया गया। परिजनों के अनुसार उड़ान संचालन प्रभावित होने के कारण वे वापस नहीं आ सके। उनके भाई राम शुभवन वर्मा ने वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। तेहरान में भी फंसा परिवार गोंडा नगर कोतवाली क्षेत्र के शास्त्री नगर मोहल्ला निवासी फसाहत और उनका परिवार तेहरान में फंसे हुए हैं। इंटरनेट सेवा चालू होने पर ही वे परिजनों से संपर्क कर पा रहे हैं। परिवार के लोग लगातार सुरक्षित वापसी की दुआ और मांग कर रहे हैं। परिजनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल सभी लोग सायरन की आवाज सुनते ही सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेकर अपनी जान बचा रहे हैं।


