बिहार ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर एसोसिएशन ने BSEB की मौजूदा परीक्षा नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के करीब 200 निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। बोरिंग रोड स्थित एक होटल में आयोजित पीसी में एसोसिएशन के अध्यक्ष कन्हैया सिंह ने कहा कि वर्तमान नीति छोटे और मध्यम स्तर के परीक्षा केंद्रों को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। PPP मोड के केंद्रों को तरजीह, स्थानीय केंद्रों की अनदेखी कन्हैया सिंह ने बताया कि बिहार सरकार और BSEB द्वारा बनाए गए बापू परीक्षा केंद्र और आदर्श परीक्षा केंद्र पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों में अब तक करीब 11,500 कंप्यूटर नोड्स लगाए जा चुके हैं, जबकि हाल ही में 10,000 नए कंप्यूटर लगाने के लिए निविदा भी जारी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नाम से चल रहे ये केंद्र वास्तव में बड़ी निजी कंपनियों द्वारा संचालित हैं, जबकि वर्षों से कार्यरत स्थानीय निजी परीक्षा केंद्रों को परीक्षा आयोजन का कोई अवसर नहीं दिया जा रहा। 14-15 वर्षों से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का सफल संचालन एसोसिएशन ने बताया कि बिहार में लगभग 250 निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र हैं, जिनके पास करीब 15,000 कंप्यूटर नोड्स उपलब्ध हैं। ये केंद्र वर्ष 2010-11 से लगातार IBPS, JEE (मेन व एडवांस्ड), SSC, रेलवे, NEET, GATE, DRDO, PG सहित देश की प्रतिष्ठित कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का सफलतापूर्वक आयोजन करते आ रहे हैं। निजी केंद्रों ने तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के सभी मानकों पर खरा उतरते हुए लाखों अभ्यर्थियों को सुविधा दी है। 50 हजार से अधिक लोगों की रोजी-रोटी पर संकट एसोसिएशन के अनुसार निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों से सीधे तौर पर 50,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। कई संचालकों ने जमीन बेचकर, कर्ज लेकर और जीवनभर की पूंजी लगाकर ये केंद्र खड़े किए हैं। अब यदि परीक्षाएं इन केंद्रों को नहीं मिलेंगी तो संचालकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इसका असर उनके बच्चों की शिक्षा और पूरे परिवार के भविष्य पर पड़ेगा। सरकारी परीक्षाएं निजी केंद्रों से पूरी तरह बंद प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि वर्तमान में बिहार सरकार की कोई भी परीक्षा निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों को नहीं दी जा रही है। एसोसिएशन का आरोप है कि यह निर्णय योजनाबद्ध तरीके से छोटे और मध्यम परीक्षा केंद्रों को समाप्त करने की मंशा को दर्शाता है। मुख्यमंत्री से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि जिस तरह पीपीपी मोड पर बड़ी निजी कंपनियों को अवसर दिया गया है, उसी तरह स्थानीय, योग्य और प्रमाणित निजी परीक्षा केंद्रों को भी समान अवसर मिलना चाहिए। कन्हैया सिंह ने कहा, यह कोई बाहरी उद्योग नहीं है, बल्कि बिहार के लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा क्षेत्र है। यदि यह सेक्टर बंद हुआ तो हजारों परिवार बेरोजगार हो जाएंगे। बिहार ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर एसोसिएशन ने BSEB की मौजूदा परीक्षा नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के करीब 200 निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। बोरिंग रोड स्थित एक होटल में आयोजित पीसी में एसोसिएशन के अध्यक्ष कन्हैया सिंह ने कहा कि वर्तमान नीति छोटे और मध्यम स्तर के परीक्षा केंद्रों को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। PPP मोड के केंद्रों को तरजीह, स्थानीय केंद्रों की अनदेखी कन्हैया सिंह ने बताया कि बिहार सरकार और BSEB द्वारा बनाए गए बापू परीक्षा केंद्र और आदर्श परीक्षा केंद्र पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों में अब तक करीब 11,500 कंप्यूटर नोड्स लगाए जा चुके हैं, जबकि हाल ही में 10,000 नए कंप्यूटर लगाने के लिए निविदा भी जारी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नाम से चल रहे ये केंद्र वास्तव में बड़ी निजी कंपनियों द्वारा संचालित हैं, जबकि वर्षों से कार्यरत स्थानीय निजी परीक्षा केंद्रों को परीक्षा आयोजन का कोई अवसर नहीं दिया जा रहा। 14-15 वर्षों से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का सफल संचालन एसोसिएशन ने बताया कि बिहार में लगभग 250 निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र हैं, जिनके पास करीब 15,000 कंप्यूटर नोड्स उपलब्ध हैं। ये केंद्र वर्ष 2010-11 से लगातार IBPS, JEE (मेन व एडवांस्ड), SSC, रेलवे, NEET, GATE, DRDO, PG सहित देश की प्रतिष्ठित कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का सफलतापूर्वक आयोजन करते आ रहे हैं। निजी केंद्रों ने तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के सभी मानकों पर खरा उतरते हुए लाखों अभ्यर्थियों को सुविधा दी है। 50 हजार से अधिक लोगों की रोजी-रोटी पर संकट एसोसिएशन के अनुसार निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों से सीधे तौर पर 50,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। कई संचालकों ने जमीन बेचकर, कर्ज लेकर और जीवनभर की पूंजी लगाकर ये केंद्र खड़े किए हैं। अब यदि परीक्षाएं इन केंद्रों को नहीं मिलेंगी तो संचालकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इसका असर उनके बच्चों की शिक्षा और पूरे परिवार के भविष्य पर पड़ेगा। सरकारी परीक्षाएं निजी केंद्रों से पूरी तरह बंद प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि वर्तमान में बिहार सरकार की कोई भी परीक्षा निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों को नहीं दी जा रही है। एसोसिएशन का आरोप है कि यह निर्णय योजनाबद्ध तरीके से छोटे और मध्यम परीक्षा केंद्रों को समाप्त करने की मंशा को दर्शाता है। मुख्यमंत्री से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि जिस तरह पीपीपी मोड पर बड़ी निजी कंपनियों को अवसर दिया गया है, उसी तरह स्थानीय, योग्य और प्रमाणित निजी परीक्षा केंद्रों को भी समान अवसर मिलना चाहिए। कन्हैया सिंह ने कहा, यह कोई बाहरी उद्योग नहीं है, बल्कि बिहार के लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा क्षेत्र है। यदि यह सेक्टर बंद हुआ तो हजारों परिवार बेरोजगार हो जाएंगे।


