जूलॉजी के एक मात्र शिक्षक का पीजी में तबादला, जहां पहले से हैं 6 शिक्षक

जूलॉजी के एक मात्र शिक्षक का पीजी में तबादला, जहां पहले से हैं 6 शिक्षक

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एक ओर बहुविषयक, शोध-उन्मुख और कौशल आधारित उच्च शिक्षा की नई इबारत लिखने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी ओर राजधानी के प्रतिष्ठित वीमेंस कॉलेज का जूलॉजी विभाग शिक्षक विहीन हो गया है। कॉलेज की एकमात्र स्थायी शिक्षक कुमारी स्वर्णिम का तबादला मोरहाबादी कैंपस स्थित रांची यूनिवर्सिटी के पीजी जूलॉजी विभाग में कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के तबादले के इस एक आदेश ने वीमेंस कॉलेज के जूलॉजी विभाग की 459 छात्राओं को प्रशासनिक और शैक्षणिक अनिश्चितता में धकेल दिया है। अब जूलॉजी डिपार्टमेंट एक मात्र अनुबंध शिक्षक के भरोसे है। जबकि नियम के अनुसार विभाग के एचओडी सिर्फ परमानेंट शिक्षक हो सकते हैं। वीमेंस कॉलेज : यूजी-पीजी में कितनी छात्राएं
जूलॉजी में नामांकन स्नातकोत्तर (पीजी) सेशन 2023-25 38 सेशन 2024-26 36 स्नातक (यूजी) वर्ष 2022 118 वर्ष 2023 87 वर्ष 2024 90 वर्ष 2025 90 जूलॉजी में शिक्षकों की भारी कमी जूलॉजी एक प्रायोगिक विषय है। स्लाइड प्रिपरेशन, माइक्रोस्कोपिक अध्ययन, जैव विविधता का फील्ड सर्वे और प्रायोगिक परीक्षाएं, इन सभी के लिए विशेषज्ञ की मॉनिटरिंग जरूरी है। एक अनुबंध शिक्षक के भरोसे यूजी- पीजी बैच की प्रैक्टिकल कक्षाएं संचालित करना बड़ी चुनौती है। बिना शिक्षक कैसे पूरी होगी एनईपी-2020 की जिम्मेदारी
नई शिक्षा नीति के तहत जूलॉजी जैसे विषय में अब केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जाता। अब शामिल हैं- मेजर और माइनर संरचना, ओपन इलेक्टिव और मल्टीडिस्पिलनरी कोर्स, रिसर्च प्रोजेक्ट व डिसर्टेशन, इंटर्नशिप व फील्ड स्टडी और सतत आंतरिक मूल्यांकन। नए सिलेबस में शिक्षक की भूमिका केवल अध्यापन तक सीमित नहीं, बल्कि अकादमिक मेंटर, शोध मार्गदर्शक और मूल्यांकनकर्ता की होती है। स्थायी शिक्षक के बिना इन सभी मॉड्यूल का प्रभावी संचालन कठिन है। शिक्षकों की कमी से क्वालिटी एजुकेशन पर सवाल मोरहाबादी स्थित पीजी जूलॉजी विभाग में पहले से ही आधा दर्जन शिक्षक सेवा दे रहे हैं। ऐसे में यह सवाल तेज हो गया है कि जहां पर्याप्त स्थायी शिक्षक मौजूद हैं, वहां और शिक्षक क्यों भेजना। जबकि जिस कॉलेज में एक ही स्थायी शिक्षक हैं, वहां से तबादला करना किस शैक्षणिक तर्क पर आधारित है? इससे स्पष्‍ट है कि आरयू प्रशासन क्वालिटी एजुकेशन को लेकर कितना गंभीर है। चुनाव आचार संहिता लागू है, तबादला कैसे हो गया शिक्षकों के बीच यह चर्चा भी है कि नगर निकाय चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू है। नियमानुसार ऐसी अवधि में स्थानांतरण पर रोक रहती है। ऐसे में आदेश की प्रक्रिया और समय-चयन पर भी सवाल उठ रहे हैं। जबकि पीजी विभाग में अभी तक शैक्षणिक सत्र 2025 में एडमिशन भी नहीं हुआ है। तबादले के बाद शिक्षक को कौन सा काम दिया जाएगा, जबकि पहले से यहां पर्याप्त शिक्षक हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एक ओर बहुविषयक, शोध-उन्मुख और कौशल आधारित उच्च शिक्षा की नई इबारत लिखने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी ओर राजधानी के प्रतिष्ठित वीमेंस कॉलेज का जूलॉजी विभाग शिक्षक विहीन हो गया है। कॉलेज की एकमात्र स्थायी शिक्षक कुमारी स्वर्णिम का तबादला मोरहाबादी कैंपस स्थित रांची यूनिवर्सिटी के पीजी जूलॉजी विभाग में कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के तबादले के इस एक आदेश ने वीमेंस कॉलेज के जूलॉजी विभाग की 459 छात्राओं को प्रशासनिक और शैक्षणिक अनिश्चितता में धकेल दिया है। अब जूलॉजी डिपार्टमेंट एक मात्र अनुबंध शिक्षक के भरोसे है। जबकि नियम के अनुसार विभाग के एचओडी सिर्फ परमानेंट शिक्षक हो सकते हैं। वीमेंस कॉलेज : यूजी-पीजी में कितनी छात्राएं
जूलॉजी में नामांकन स्नातकोत्तर (पीजी) सेशन 2023-25 38 सेशन 2024-26 36 स्नातक (यूजी) वर्ष 2022 118 वर्ष 2023 87 वर्ष 2024 90 वर्ष 2025 90 जूलॉजी में शिक्षकों की भारी कमी जूलॉजी एक प्रायोगिक विषय है। स्लाइड प्रिपरेशन, माइक्रोस्कोपिक अध्ययन, जैव विविधता का फील्ड सर्वे और प्रायोगिक परीक्षाएं, इन सभी के लिए विशेषज्ञ की मॉनिटरिंग जरूरी है। एक अनुबंध शिक्षक के भरोसे यूजी- पीजी बैच की प्रैक्टिकल कक्षाएं संचालित करना बड़ी चुनौती है। बिना शिक्षक कैसे पूरी होगी एनईपी-2020 की जिम्मेदारी
नई शिक्षा नीति के तहत जूलॉजी जैसे विषय में अब केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जाता। अब शामिल हैं- मेजर और माइनर संरचना, ओपन इलेक्टिव और मल्टीडिस्पिलनरी कोर्स, रिसर्च प्रोजेक्ट व डिसर्टेशन, इंटर्नशिप व फील्ड स्टडी और सतत आंतरिक मूल्यांकन। नए सिलेबस में शिक्षक की भूमिका केवल अध्यापन तक सीमित नहीं, बल्कि अकादमिक मेंटर, शोध मार्गदर्शक और मूल्यांकनकर्ता की होती है। स्थायी शिक्षक के बिना इन सभी मॉड्यूल का प्रभावी संचालन कठिन है। शिक्षकों की कमी से क्वालिटी एजुकेशन पर सवाल मोरहाबादी स्थित पीजी जूलॉजी विभाग में पहले से ही आधा दर्जन शिक्षक सेवा दे रहे हैं। ऐसे में यह सवाल तेज हो गया है कि जहां पर्याप्त स्थायी शिक्षक मौजूद हैं, वहां और शिक्षक क्यों भेजना। जबकि जिस कॉलेज में एक ही स्थायी शिक्षक हैं, वहां से तबादला करना किस शैक्षणिक तर्क पर आधारित है? इससे स्पष्‍ट है कि आरयू प्रशासन क्वालिटी एजुकेशन को लेकर कितना गंभीर है। चुनाव आचार संहिता लागू है, तबादला कैसे हो गया शिक्षकों के बीच यह चर्चा भी है कि नगर निकाय चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू है। नियमानुसार ऐसी अवधि में स्थानांतरण पर रोक रहती है। ऐसे में आदेश की प्रक्रिया और समय-चयन पर भी सवाल उठ रहे हैं। जबकि पीजी विभाग में अभी तक शैक्षणिक सत्र 2025 में एडमिशन भी नहीं हुआ है। तबादले के बाद शिक्षक को कौन सा काम दिया जाएगा, जबकि पहले से यहां पर्याप्त शिक्षक हैं।  

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