संसद की लोकसभा में सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने एक चर्चा के दौरान सीकर सांसद और वरिष्ठ किसान नेता अमराराम का नाम लेकर उन पर तीखा हमला बोला। शाह ने साल 2010 की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना को याद दिलाते हुए पूछा कि क्या वामपंथी विचारधारा के लोग देशविरोधी कृत्यों का समर्थन करते हैं? गृह मंत्री शाह ने ये बातें बजट सत्र के नियम 193 के तहत ‘वामपंथी उग्रवाद के खात्मे’ से जुड़ी चर्चा का जवाब देते हुए कीं।
76 जवानों की शहादत और जेएनयू का वो ‘जश्न’
अमित शाह ने तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने एक साथ 76 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी, तब जेएनयू में इसका जश्न मनाया गया था। शाह ने अमराराम की ओर इशारा करते हुए कहा,
“उसी जेएनयू में एक उत्सव मनाया गया। वहाँ ऐसा नृत्य किया गया, जिसमें 76 पुलिसकर्मियों की मौत पर जश्न मनाया गया और नृत्य के दौरान जमीन पर भारत का तिरंगा बिछाकर उसे पैरों तले रौंदा गया। आखिर अमराराम जी जैसे लोग किसका महिमामंडन कर रहे हैं?”
VIDEO में देखें गृह मंत्री का वक्तव्य
VIDEO में देखें क्या कहा था सांसद अमराराम ने?
सीकर की राजनीति में ‘दिल्ली’ वाला धमाका
अमराराम राजस्थान के शेखावाटी अंचल के एक कद्दावर नेता हैं और पहली बार संसद पहुँचे हैं। उनके भाषण में जेएनयू की तारीफ और वामपंथी विचारधारा के पक्ष में दी गई दलीलों पर अमित शाह ने ‘काउंटर अटैक’ किया। शाह का यह बयान राजस्थान की स्थानीय राजनीति, विशेषकर सीकर और झुंझुनूं में बड़े ध्रुवीकरण का संकेत दे रहा है।
विचारधारा की जंग: राष्ट्रवाद बनाम वामपंथ
सदन में शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार उग्रवाद और इसे वैचारिक समर्थन देने वालों के खिलाफ सख्त है। उन्होंने अमराराम से सीधे सवाल किया कि तिरंगे के अपमान और जवानों की मौत पर नाचने वाली मानसिकता का समर्थन करना क्या उचित है? इधर गृह मंत्री के इस ताज़ा वक्तव्य पर सांसद अमराराम की प्रतिक्रिया आना बाक़ी है।
राजस्थान के शेखावाटी में सियासी उबाल
शेखावाटी का क्षेत्र वीरों और फौजियों की धरती माना जाता है। ऐसे में जवानों की शहादत पर जश्न मनाने वाले जेएनयू के किस्से को अमराराम से जोड़ना, उनकी राजनीतिक छवि के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
संसद में गूँजा ‘देशद्रोही नृत्य’ का मुद्दा
शाह ने सदन को याद दिलाया कि 2010 की वह घटना देश के इतिहास पर एक काला धब्बा है। उन्होंने कहा कि आज जब देश उग्रवाद से मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है, तब जिम्मेदार सांसदों को ऐसी संस्थाओं या विचारधाराओं का महिमामंडन करने से बचना चाहिए जो देश की अखंडता के खिलाफ खड़ी नजर आती हैं।


