200 किमी दूर चतरा से चल रहा है नेटवर्क:झारखंड जेल में बंद पिंटू दांगी गैंग के इशारे पर छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती

200 किमी दूर चतरा से चल रहा है नेटवर्क:झारखंड जेल में बंद पिंटू दांगी गैंग के इशारे पर छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती

छत्तीसगढ़ में लगातार अफीम के खेत मिल रहे हैं। यहां अफीम किसके इशारे पर लगाई जा रही है और कहां जाने वाली है, इनका जवाब खोजने भास्कर टीम दो दिन तक छत्तीसगढ़ से झारखंड तक गई। तब सामने आया छत्तीसगढ़ सीमा से 200 किमी दूर झारखंड का चतरा जिला। यह अफीम का गढ़ है और इसका मुख्य सरगना है पिंटू दांगी। पांच साल पहले पिंटू को 1.5 किलो अफीम के साथ पकड़ा गया था। उसे जेल भेज दिया गया। उसके इशारे पर चतरा के भूपेंद्र उरांव ने अपने साथियों के साथ छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती करने जमीन तलाशना शुरू किया। इन्हें बलरामपुर बार्डर पर कई जगह ऐसी मिली जहां दोनों तरफ से पहाड़ है। वहां खेत काटकर इन्होंने दिवाली के बाद अफीम बोयी। तीन किमी तक यहां कोई सड़क नहीं है, इसलिए न तो पुलिस आती है और ना ही प्रशासन। यहां से 50 मीटर की दूरी पर झारखंड है। भूपेंद्र ने रखवाली के लिए खेत में ही झोपड़ी बनाकर रहना शुरू कर दिया। भास्कर को पता चला कि 50% अफीम की खेप तो चतरा भेजी जा चुकी है। दुर्ग में जब कार्रवाई हुई तो भूपेंद्र वहां से भाग निकला। झारखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रोसेसिंग यूनिट झारखंड और बिहार में है। इसका सप्लाई नेटवर्क हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान तक है। यह इंटर स्टेट अफीम नेटवर्क 30 सालों से ऑपरेट हो रहा है, जिसे नक्सलियों ने संरक्षण दिया। लेकिन पिछले 10 सालों से अफीम की खेती और तस्करी लोकल नेटवर्क के द्वारा बड़े पैमाने पर हो रही है। इंवेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ में जिन लोगों की जमीन पर खेती हो रही है, उन्हें भी झारखंड में अफीम की खेती की ट्रेनिंग मिली है। भास्कर ने चतरा एसपी समित कुमार से बात की, तो उन्होंने कहा- अफीम तस्करों और खेती करने वालों पर कार्रवाई लगातार जारी है। गुलाबी अफीम की कीमत 3 गुना ज्यादा
अफीम की कीमत उसकी क्वालिटी पर निर्भर करती है। अ​च्छी क्वालिटी वाली अफीम 4 से 5 लाख रु. प्रति किलो तक बिकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 10 लाख रु. तक है। अवैध बाजार में 1 ग्राम अफीम 1000 रु. तक बिकती है। अफीम के पौधे की हर चीज का बाजार भाव है। बलरामपुर के तुर्रीपानी में सफेद फूल वाली अफीम की खेती हुई, जबकि त्रिपुरी में सफेद और गुलाबी फूल वाली मिक्स खेती। गुलाबी अफीम का बाजार भाव सफेद से 3 गुना तक अधिक है। किसान वाकिफ था
पहली प्राथमिकता उन मुख्य आरोपियों तक पहुंचने की है जिन्होंने खेती करवाई। उसके बाद कड़ियां जुड़ेंगी। जिनके खेत में खेती हो रही थी, वे इस फसल से पूरी तरह से वाकिफ थे। बिल्कुल, यह अंतरराज्यीय नेटवर्क है।
-वैभव बैंकर, पुलिस अधीक्षक, बलरामपुर
रास्ता नहीं, पगडंडी से पहुंची भास्कर टीम पहाड़ पर बसा तुर्रीपानी छत्तीसगढ़ सीमा का आखिरी गांव है। यहां से 2 किमी नीचे कच्चे रास्ते से पैदल होते हुए हम अफीम के खेत तक पहुंचे। यहां 1.47 एकड़ में खेती हो रही थी। यहां से झारखंड की सीमा 50 ​मीटर दूर है। आरोपी भूपेंद्र उरांव हमेशा जंगल से आना-जाना करता था। गिरफ्तार खेत मालिक बहादुर के भतीजे ने खुलासा किया कि चाचा ने उसे कार्रवाई के एक दिन पहले ही फोन किया और बताया कि भूपेंद्र 8 दिन के लिए गांव जा रहा है। भूपेंद्र को दुर्ग में अफीम को लेकर हो रही कार्रवाई की सूचना मिल चुकी थी, वो भागने में सफल रहा। गिरदावरी में- अक्टूबर में हुए सर्वे में यहां खेती होना नहीं बताया। अफीम के पौधे गिरदावरी के बाद लगाए गए। जंगल के रास्ते खेत तक आते थे दुर्ग के समोदा के बाद त्रिपुरी में अफीम की खेती का खुलासा हुआ। त्रिपुरी से 3 किमी अंदर पैदल पगडंडी पर चलकर खेतिहर जमीन तक पहुंचा। इस क्षेत्र में खेती करवाने वाला मुख्य आरोपी पैरू उर्फ राजेश सिंह गया (बिहार) का बताया जा रहा है, जो फरार है। इस मामले में भी चतरा और गया के आरोपी पकड़े गए हैं। गांववालों ने बताया कि आरोपी जंगल के रास्ते ही खेत तक आते थे और खेत के आस-पास कभी भी किसी को आने नहीं दिया जाता था। अच्छी अफीम को जंगल के रास्ते ही झारखंड ले जाया गया था। गिरदावरी में- अक्टूबर में हुए सर्वे में यहां कटी हुई फसल दिखाई गई थी। बाद में अफीम के पौधे लगाए गए। अफीम की खेती और तस्करी के 70% केस झारखंड के चतरा जिले में

अफीम की खेती और तस्करी के 70% केस में झारखंड के चतरा जिले का नाम सामने आया है। इसमें भी पिंटू दांगी और उसकी गैंग का नाम उजागर हुआ है। इसके अलावा लातेहार, पलामू, हजारीबाग जिले भी इसमें प्रमुखता से शामिल हैं। साल 2024-25 में झारखंड पुलिस ने 27,000 एकड़ की फसल नष्ट करवाई। हर महीने इन जिलों में कहीं न कहीं अफीम की खेती या तस्कर पकड़ा रहे हैं। चतरा में फरवरी और मार्च 2026 में 137 एकड़ अफीम की खेती नष्ट करवाई गई। जुलाई 2025 में 23.40 किलो, अगस्त 2025 में 40.1 किलो, नवंबर 2025 में 5.47 किलो, दिसंबर 2025 में 3 किलो बरामद की गई। वहीं 11 मार्च 2026 को सरकारी जमीन पर 25.5 एकड़ अफीम की खेती नष्ट की गई। दुर्ग: 7.88 करोड़ की अफीम के पौधों को पुलिस करेगी नष्ट
जेवरा सिरसा पुलिस 7.88 करोड़ कीमत के 14 लाख अफीम के पौधों को नष्ट करने के लिए कोर्ट के बाद केंद्रीय एक्साइज और अफीम बोर्ड की अनुमति का इंतजार कर रही है। आदेश के बाद पुलिस डीडीसी (ड्रग डिस्पोजल कमेटी) के सामने अफीम के पौधों को नष्ट करेगी। विनष्टीकरण के पहले पुलिस को कमेटी के समक्ष एफआईआर की कॉपी, जब्ती, गिरफ्तारी, एफएसएल और मजिस्ट्रियल सैंपल रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगा। सभी रिपोर्ट के आधार पर राजपत्रित अधिकारी अफीम के पौधों का भौतिक सत्यापन करेंगे। इसके बाद कमेटी औद्योगिक प्लांट में पौधों का विनष्टीकरण करने का आदेश जारी करेगी। पुलिस ने अफीम के खेत से जब्त फसल का कुछ हिस्सा जेवरा चौकी में रखा है। बाकी की फसल को पुलिस लाइन स्थित केंद्रीय ड्रग्स मालखाने में रखकर सील कर दी गई है। विनष्टीकरण की तारीख तय होने के बाद डीडीसी की अनुमति के बाद मालखाने से अफीम की फसल निकालकर नष्ट किया जाएगा। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में पदस्थ एक टीआई का मानना है कि विनष्टीकरण मौके पर एनडीपीएस की धारा 48 के तहत नष्ट किया जा सकता है। वहीं गीली फसल पर रोटा वेटर चलाकर भी नष्ट किया जा सकता है। विनष्टीकरण के बाद नियम 25 के तहत विनष्टीकरण का प्रमाण पत्र जारी होता है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक नष्टीकरण की प्रक्रिया जल्दी ही पूरी कर ली जाएगी। वहीं प्रकरण में फरार आरोपी श्रवण विश्नोई और आचला राम जाट की तलाश की जा रही है। अब तक उक्त मामले में पुलिस बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार,विकास विश्नोई, मनीष ठाकुर और छोटू राम को गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है। जांच में पता चला है कि विनायक और उसके बाकी आरोपियों के बीच सामान्य ट्रांजेक्शन मिला है। इससे शंका है कि अफीम​ तस्करी के पैसों का लेनदेन कैश में​ किया गया होगा।

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