बांका के ऐतिहासिक मंदार पर्वत की तलहटी में आयोजित पूर्वी बिहार के सबसे बड़े मंदार महोत्सव सह बौंसी मेला के सांस्कृतिक कार्यक्रम में गुरुवार की रात भक्तिरस और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिला। मशहूर भजन गायिका अनुराधा पौडवाल की बेटी एवं प्रख्यात गायिका कविता पौडवाल ने अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज से ऐसा समां बांधा कि हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंजता रहा। “मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा” से हुई कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत कविता पौडवाल ने अपनी मां अनुराधा पौडवाल के सुप्रसिद्ध भक्ति गीत “मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा” से की। जैसे ही यह गीत मंच से गूंजा, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रोता भाव-विभोर हो गए और कई दर्शक भक्ति में लीन नजर आए। इस गीत ने न सिर्फ कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई, बल्कि मंदार पर्वत की धार्मिक आस्था को भी जीवंत कर दिया। भक्ति गीतों से लेकर बॉलीवुड हिट्स तक का सफर इसके बाद कविता पौडवाल ने भक्ति और बॉलीवुड गीतों की शानदार श्रृंखला प्रस्तुत की। जय जय नारायण नारायण हरि हरि, कौन कहता है भगवान आते नहीं जैसे भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे। वहीं जैसे ही उन्होंने फिल्मी गीतों की ओर रुख किया, दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया। धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना, तुम्हें अपना बनाने की कसम खाई है, नजर के सामने जिगर के पास, दिल है कि मानता नहीं जैसे सदाबहार गीतों ने माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। हर गीत के बाद तालियों की गूंज कलाकारों का उत्साह बढ़ाती रही। लोकप्रिय गीतों पर झूमे दर्शक कविता पौडवाल ने तू मेरी जिंदगी है, मन क्यों बहका आधी रात को, बहुत प्यार करते हैं सनम, जिए तो जिए कैसे बिन आपके, मुझे नींद न आए और छोटी छोटी रातें लंबी हो जाती हैं जैसे लोकप्रिय गीत गाकर दर्शकों से खूब वाहवाही बटोरी। वहीं हुस्न है सुहाना, जूली आई लव यू, मिर्च मसाला, दिल दीवाने का डोला जैसे तेज और मस्ती भरे गीतों पर दर्शक अपनी जगह पर ही झूमने को मजबूर हो गए। ठंड के मौसम में भी दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ। सावन सांवरे की प्रस्तुति ने भी जीता दिल कार्यक्रम में गायक सावन सांवरे ने भी अपनी दमदार आवाज से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने नीले-नीले अम्बर पर, सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं सहित कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर कविता पौडवाल और सावन सांवरे ने संयुक्त रूप से नजर के सामने जिगर के पास और धक धक करने लगा जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पंडाल झूम उठा। मंदार पर्वत पर गायन को बताया सौभाग्य कार्यक्रम के दौरान कविता पौडवाल ने कहा कि उन्होंने मंदार पर्वत की महत्ता के बारे में शास्त्रों में पढ़ा था और आज इस पावन धरती पर गाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने दर्शकों के प्रेम और उत्साह के लिए आभार जताया। मेले में उमड़ा जनसैलाब मंदार महोत्सव सह बौंसी मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ मेले का भी खास आकर्षण देखने को मिला। दूर-दराज के इलाकों से आए लोग इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने। देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर हजारों की भीड़ मौजूद रही और मंदार महोत्सव एक यादगार सांस्कृतिक संध्या के रूप में लोगों के दिलों में बस गया। बांका के ऐतिहासिक मंदार पर्वत की तलहटी में आयोजित पूर्वी बिहार के सबसे बड़े मंदार महोत्सव सह बौंसी मेला के सांस्कृतिक कार्यक्रम में गुरुवार की रात भक्तिरस और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिला। मशहूर भजन गायिका अनुराधा पौडवाल की बेटी एवं प्रख्यात गायिका कविता पौडवाल ने अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज से ऐसा समां बांधा कि हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंजता रहा। “मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा” से हुई कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत कविता पौडवाल ने अपनी मां अनुराधा पौडवाल के सुप्रसिद्ध भक्ति गीत “मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा” से की। जैसे ही यह गीत मंच से गूंजा, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रोता भाव-विभोर हो गए और कई दर्शक भक्ति में लीन नजर आए। इस गीत ने न सिर्फ कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई, बल्कि मंदार पर्वत की धार्मिक आस्था को भी जीवंत कर दिया। भक्ति गीतों से लेकर बॉलीवुड हिट्स तक का सफर इसके बाद कविता पौडवाल ने भक्ति और बॉलीवुड गीतों की शानदार श्रृंखला प्रस्तुत की। जय जय नारायण नारायण हरि हरि, कौन कहता है भगवान आते नहीं जैसे भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे। वहीं जैसे ही उन्होंने फिल्मी गीतों की ओर रुख किया, दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया। धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना, तुम्हें अपना बनाने की कसम खाई है, नजर के सामने जिगर के पास, दिल है कि मानता नहीं जैसे सदाबहार गीतों ने माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। हर गीत के बाद तालियों की गूंज कलाकारों का उत्साह बढ़ाती रही। लोकप्रिय गीतों पर झूमे दर्शक कविता पौडवाल ने तू मेरी जिंदगी है, मन क्यों बहका आधी रात को, बहुत प्यार करते हैं सनम, जिए तो जिए कैसे बिन आपके, मुझे नींद न आए और छोटी छोटी रातें लंबी हो जाती हैं जैसे लोकप्रिय गीत गाकर दर्शकों से खूब वाहवाही बटोरी। वहीं हुस्न है सुहाना, जूली आई लव यू, मिर्च मसाला, दिल दीवाने का डोला जैसे तेज और मस्ती भरे गीतों पर दर्शक अपनी जगह पर ही झूमने को मजबूर हो गए। ठंड के मौसम में भी दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ। सावन सांवरे की प्रस्तुति ने भी जीता दिल कार्यक्रम में गायक सावन सांवरे ने भी अपनी दमदार आवाज से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने नीले-नीले अम्बर पर, सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं सहित कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर कविता पौडवाल और सावन सांवरे ने संयुक्त रूप से नजर के सामने जिगर के पास और धक धक करने लगा जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पंडाल झूम उठा। मंदार पर्वत पर गायन को बताया सौभाग्य कार्यक्रम के दौरान कविता पौडवाल ने कहा कि उन्होंने मंदार पर्वत की महत्ता के बारे में शास्त्रों में पढ़ा था और आज इस पावन धरती पर गाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने दर्शकों के प्रेम और उत्साह के लिए आभार जताया। मेले में उमड़ा जनसैलाब मंदार महोत्सव सह बौंसी मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ मेले का भी खास आकर्षण देखने को मिला। दूर-दराज के इलाकों से आए लोग इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने। देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर हजारों की भीड़ मौजूद रही और मंदार महोत्सव एक यादगार सांस्कृतिक संध्या के रूप में लोगों के दिलों में बस गया।


