बालाघाट में बावनथड़ी नदी से गैरकानूनी तरीके से रेत निकालने के मामले में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने एक वकील की दरियादिली की खूब तारीफ की है। वकील नरेंद्र पाल सिंह ने इस केस में कोर्ट की मदद करने के बदले मिलने वाली 1 लाख रुपए की फीस लेने से मना कर दिया और कहा कि वे यह काम मुफ्त में करेंगे। जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच ने वकील के इस फैसले को सराहा। कोर्ट ने आदेश दिया कि अब यह 1 लाख रुपए वकील को देने के बजाय बावनथड़ी नदी को बचाने, उसकी सफाई करने और पर्यावरण को सुधारने के काम में लगाए जाएंगे। क्या है पूरा मामला? यह पूरा मामला बालाघाट की खैरलांजी तहसील के चिचोली गांव का है। यहां नदी से अवैध रेत खनन को लेकर शंकरलाल लखड़े और अन्य लोगों ने शिकायत की थी। कोर्ट ने कानूनी बारीकियों को समझने के लिए वकील नरेंद्र पाल सिंह को ‘अमीकस क्यूरी’ (कोर्ट का मददगार) बनाया था। फीस को लेकर खड़ा किया बड़ा सवाल फीस ठुकराने के साथ ही वकील ने एक जरूरी सवाल भी उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या पर्यावरण के नुकसान की भरपाई के लिए रखे गए पैसों का इस्तेमाल वकीलों की फीस भरने या कोर्ट के दूसरे खर्चों के लिए करना सही है? यह सवाल काफी अहम है, इसलिए अब एनजीटी के अध्यक्ष एक खास टीम (बेंच) बनाएंगे जो इस मुद्दे पर गहराई से विचार करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को होगी।


