सिटी रिपोर्टर| बेगूसराय इस्कॉन बेगूसराय के तत्वावधान में आयोजित श्री हरि कथा के अंतिम दिवस का कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं भक्ति-रस से परिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर जगदीश श्याम दास जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के षष्ठ स्कंध के तृतीय अध्याय पर आधारित दिव्य कथा का भावपूर्ण एवं सारगर्भित वर्णन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुमधुर हरिनाम संकीर्तन से हुआ, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति-भाव से भर दिया। कथा उपरांत आरती सम्पन्न हुई, जिसके बाद भक्तों ने उत्साहपूर्वक नृत्य युक्त संकीर्तन में भाग लिया और पूरा पंडाल हरिनाम के आनंद से गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को पूर्ण थाली महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसमें पुरी, सब्ज़ी, चटनी एवं खीर सम्मिलित थी। श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक महाप्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। इस अवसर पर जगदीश श्याम दास जी महाराज ने इस्कॉन बेगूसराय के बैनर तले इस तीन दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में लगे सभी सेवाभावी स्वयंसेवकों, आयोजकों एवं भक्तों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी की निस्वार्थ सेवा भावना की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ श्रीहरि सेवा में संलग्न रहने का आह्वान किया। सिटी रिपोर्टर| बेगूसराय इस्कॉन बेगूसराय के तत्वावधान में आयोजित श्री हरि कथा के अंतिम दिवस का कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं भक्ति-रस से परिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर जगदीश श्याम दास जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के षष्ठ स्कंध के तृतीय अध्याय पर आधारित दिव्य कथा का भावपूर्ण एवं सारगर्भित वर्णन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुमधुर हरिनाम संकीर्तन से हुआ, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति-भाव से भर दिया। कथा उपरांत आरती सम्पन्न हुई, जिसके बाद भक्तों ने उत्साहपूर्वक नृत्य युक्त संकीर्तन में भाग लिया और पूरा पंडाल हरिनाम के आनंद से गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को पूर्ण थाली महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसमें पुरी, सब्ज़ी, चटनी एवं खीर सम्मिलित थी। श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक महाप्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। इस अवसर पर जगदीश श्याम दास जी महाराज ने इस्कॉन बेगूसराय के बैनर तले इस तीन दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में लगे सभी सेवाभावी स्वयंसेवकों, आयोजकों एवं भक्तों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी की निस्वार्थ सेवा भावना की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ श्रीहरि सेवा में संलग्न रहने का आह्वान किया।


