सिद्धाश्रम की धरा कभी संत विहीन नहीं रही, इसके आगे कोई तीर्थ नहीं

सिद्धाश्रम की धरा कभी संत विहीन नहीं रही, इसके आगे कोई तीर्थ नहीं

भास्कर न्यूज | बक्सर गंगाधाम आश्रम, कम्हरिया में गुरुवार को विशाल कलश यात्रा के श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ स्थल से निकाली गई कलश यात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं लाल रंग के परिधान में शामिल हुए। श्रद्धालुओं भक्ति में लीन दिखे। यात्रा वामन भगवान मंदिर तक भ्रमण करते हुए कम्हरिया गंगा घाट पर पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जलभरी की गई। इस महायज्ञ में खास यह है कि यह आयोजन पवित्र गंगा के गोद में किया जा रहा है। यज्ञ स्थल पर कलश स्थापित करने के बाद सवा लाख हनुमान चालीसा का अखंड पाठ का भी शुभारंभ किया गया। हनुमान चालीसा का पाठ काशी के विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा किया जा रहा है। यज्ञ स्थल मां गंगा के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में विश्व क महान मनीषी संत परमपूज्य श्री 1008 श्री गंगा पुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने बक्सर महात्म्य पर चर्चा की। उन्होंने बक्सर के हर धार्मिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से श्रद्धालुओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सतयुग, त्रेता और द्वापर से सिद्धाश्रम बक्सर में यज्ञ होते आ रहा है। बक्सर यज्ञ भूमि है। यहां हजारों ऋषियों व मुनियों ने तप किया है। उन्होंने कहा कि सिद्धाश्रम बक्सर कभी संत विहीन रहा ही नहीं है। यही वजह है कि बक्सर को सिद्धाश्रम कहा जाता है। सिद्धाश्रम के आगे कोई तीर्थ नहीं हुआ और ना आगे होगा। यह धरती आशीर्वाद युक्त धरती है। वामन अवतार की भूमि है। बक्सर की महिमा अपने आप में है। बक्सर के स्मरण मात्र से लोगों का कष्ट खत्म हो जाता है। बक्सर को बक्सर बनाने के लिए संतों को आगे आना होगा, तभी बक्सर दिव्य होगा। बक्सर के महात्म्य को सुनकर श्रद्धालु धन्य हो गये। यज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। भास्कर न्यूज | बक्सर गंगाधाम आश्रम, कम्हरिया में गुरुवार को विशाल कलश यात्रा के श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ स्थल से निकाली गई कलश यात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं लाल रंग के परिधान में शामिल हुए। श्रद्धालुओं भक्ति में लीन दिखे। यात्रा वामन भगवान मंदिर तक भ्रमण करते हुए कम्हरिया गंगा घाट पर पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जलभरी की गई। इस महायज्ञ में खास यह है कि यह आयोजन पवित्र गंगा के गोद में किया जा रहा है। यज्ञ स्थल पर कलश स्थापित करने के बाद सवा लाख हनुमान चालीसा का अखंड पाठ का भी शुभारंभ किया गया। हनुमान चालीसा का पाठ काशी के विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा किया जा रहा है। यज्ञ स्थल मां गंगा के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में विश्व क महान मनीषी संत परमपूज्य श्री 1008 श्री गंगा पुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने बक्सर महात्म्य पर चर्चा की। उन्होंने बक्सर के हर धार्मिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से श्रद्धालुओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सतयुग, त्रेता और द्वापर से सिद्धाश्रम बक्सर में यज्ञ होते आ रहा है। बक्सर यज्ञ भूमि है। यहां हजारों ऋषियों व मुनियों ने तप किया है। उन्होंने कहा कि सिद्धाश्रम बक्सर कभी संत विहीन रहा ही नहीं है। यही वजह है कि बक्सर को सिद्धाश्रम कहा जाता है। सिद्धाश्रम के आगे कोई तीर्थ नहीं हुआ और ना आगे होगा। यह धरती आशीर्वाद युक्त धरती है। वामन अवतार की भूमि है। बक्सर की महिमा अपने आप में है। बक्सर के स्मरण मात्र से लोगों का कष्ट खत्म हो जाता है। बक्सर को बक्सर बनाने के लिए संतों को आगे आना होगा, तभी बक्सर दिव्य होगा। बक्सर के महात्म्य को सुनकर श्रद्धालु धन्य हो गये। यज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।  

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