आजमगढ़ की श्रीरामकथा में केवट प्रसंग ने किया भाव विभोर:सोई सुत तोहि ऊऋण मैं नाही समर्पण और निष्काम सेवा का अनुपम संदेश

आजमगढ़ की श्रीरामकथा में केवट प्रसंग ने किया भाव विभोर:सोई सुत तोहि ऊऋण मैं नाही समर्पण और निष्काम सेवा का अनुपम संदेश

आजमगढ़ जिले के एसकेपी इंटर कॉलेज प्रांगण में आयोजित श्रीरामकथा के सातवें दिन एवं विश्राम दिवस की कथा अत्यंत मार्मिक, करुण और समर्पण भाव से परिपूर्ण रही। कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने “सोई सुत तोहि ऊऋण मैं नाहीं चौपाई के माध्यम से प्रभु श्रीराम के वनगमन और केवट प्रसंग का हृदयस्पर्शी वर्णन किया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। आचार्य शांतनु जी महाराज ने बताया कि जब प्रभु श्रीराम वनगमन के क्रम में गंगा तट पर पहुँचे। तब केवट ने उन्हें अपनी नाव से पार उतारा। उतराई के रूप में उसने प्रभु से कुछ भी स्वीकार नहीं किया। तब प्रभु श्रीराम ने कहा सोई सुत तोहि ऊऋण मैं नाहीं। अर्थात आज मैं तुमसे ऋणी हो गया। महाराज श्री ने कहा कि यह प्रसंग निष्काम सेवा, समर्पण और आत्मिक प्रेम का सर्वोच्च उदाहरण है। जहाँ देने वाला कुछ नहीं लेता और भगवान स्वयं ऋणी हो जाते हैं। श्रीरामकथा में उमड़ रही भारी भीड़ आजमगढ़ के एसकेपी इंटर कॉलेज में चल रही श्री राम कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त आ रहे हैं। और श्री राम कथा का श्रवण कर रहे हैं। जिले में श्री राम कथा का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जिले में लगातार श्री राम कथाओं का बड़े पैमाने पर आयोजन किया जाता है जिसमें बड़ी संख्या में लोग अपनी सहभागिता करते हैं। इस अवसर पर पड़ी संख्या में भक्त श्रीराम कथा का आनंद लेते नजर आए।

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